भारत और न्यूजीलैंड ने बढ़ाया रणनीतिक सहयोग, 2030 तक 35 हजार करोड़ रुपये के व्यापार का लक्ष्य

भारत और न्यूजीलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर पहुंचा दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने साल 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के आपसी वार्षिक व्यापार को दोगुना कर 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। करीब 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की यह पहली यात्रा है।दोनों नेताओं के बीच हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में 18 ठोस परिणाम सामने आए, जिनमें 10 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाना शामिल है। इनमें अगले चार वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने की रूपरेखा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग बढ़ाने का ढांचा और भारतीय नौसेना व न्यूजीलैंड रक्षा बल के बीच पारस्परिक लॉजिस्टिक सहयोग समझौता प्रमुख रूप से शामिल हैं।बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी और लक्सन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति पर व्यापक चर्चा की। दोनों देशों ने एक स्वतंत्र, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा करने के महत्व पर बल दिया।दोनों प्रधानमंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, 1982 के अनुरूप समुद्री नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने का पुरजोर समर्थन किया। इसके अलावा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों ने एक नया समुद्री सुरक्षा संवाद शुरू करने पर भी सहमति जताई है, जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान और समन्वय मजबूत होगा।ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पूरी करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के तीसरे और अंतिम चरण के तहत न्यूजीलैंड पहुंचे हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव और उसके आक्रामक रुख के बीच आपसी रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना है। यह यात्रा हाल ही में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद हो रही है। दोनों नेताओं ने इस समझौते को जल्द से जल्द प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का संकल्प लिया है।बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड दोनों ही समुद्री राष्ट्र हैं और दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र को नई शक्ति प्रदान करेगा। उन्होंने बैठक के शुरुआत में अपने संबोधन में कहा कि दो समुद्री देशों के रूप में हमारा घनिष्ठ सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र को नई शक्ति देता है और हमारे संबंध शांति के साझा लक्ष्यों को हासिल करने में नई ऊर्जा भर सकते हैं।इसके अलावा, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष और बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। संयुक्त बयान के अनुसार, उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। दोनों प्रधानमंत्रियों ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से निर्बाध समुद्री नौवहन और वैश्विक व्यापार की बहाली का आह्वान किया और समुद्री परिवहन में किसी भी तरह की बाधा डालने का विरोध किया। उन्होंने जोर दिया कि इस संघर्ष का स्थायी समाधान केवल संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के जरिए ही निकाला जा सकता है। बैठक में संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया गया और सुरक्षा परिषद के विस्तार का भी पुरजोर समर्थन किया गया।

PNSPNS
Jul 11, 2026 - 09:07
 0
भारत और न्यूजीलैंड ने बढ़ाया रणनीतिक सहयोग, 2030 तक 35 हजार करोड़ रुपये के व्यापार का लक्ष्य

भारत और न्यूजीलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर पहुंचा दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने साल 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के आपसी वार्षिक व्यापार को दोगुना कर 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। करीब 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की यह पहली यात्रा है।

दोनों नेताओं के बीच हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में 18 ठोस परिणाम सामने आए, जिनमें 10 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाना शामिल है। इनमें अगले चार वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने की रूपरेखा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग बढ़ाने का ढांचा और भारतीय नौसेना व न्यूजीलैंड रक्षा बल के बीच पारस्परिक लॉजिस्टिक सहयोग समझौता प्रमुख रूप से शामिल हैं।

बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी और लक्सन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति पर व्यापक चर्चा की। दोनों देशों ने एक स्वतंत्र, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा करने के महत्व पर बल दिया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, 1982 के अनुरूप समुद्री नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने का पुरजोर समर्थन किया। इसके अलावा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों ने एक नया समुद्री सुरक्षा संवाद शुरू करने पर भी सहमति जताई है, जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान और समन्वय मजबूत होगा।

ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पूरी करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के तीसरे और अंतिम चरण के तहत न्यूजीलैंड पहुंचे हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव और उसके आक्रामक रुख के बीच आपसी रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना है। यह यात्रा हाल ही में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद हो रही है। दोनों नेताओं ने इस समझौते को जल्द से जल्द प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का संकल्प लिया है।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड दोनों ही समुद्री राष्ट्र हैं और दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र को नई शक्ति प्रदान करेगा। उन्होंने बैठक के शुरुआत में अपने संबोधन में कहा कि दो समुद्री देशों के रूप में हमारा घनिष्ठ सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र को नई शक्ति देता है और हमारे संबंध शांति के साझा लक्ष्यों को हासिल करने में नई ऊर्जा भर सकते हैं।

इसके अलावा, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष और बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। संयुक्त बयान के अनुसार, उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। दोनों प्रधानमंत्रियों ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से निर्बाध समुद्री नौवहन और वैश्विक व्यापार की बहाली का आह्वान किया और समुद्री परिवहन में किसी भी तरह की बाधा डालने का विरोध किया। उन्होंने जोर दिया कि इस संघर्ष का स्थायी समाधान केवल संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के जरिए ही निकाला जा सकता है। बैठक में संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया गया और सुरक्षा परिषद के विस्तार का भी पुरजोर समर्थन किया गया।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow