भारत में प्राचीन और लोकप्रिय कई मंदिर मौजूद है। इन्हीं में से एक खास शिव मंदिर तमिलनाडु में स्थित है। भगवान शिव को नेचुरल हीलर के तौर पर भक्त मानते हैं। कई शिव मंदिरों के बारे में यहां मान्यता है कि यहां पर दर्शन करने और प्रसाद लेने से इंसान को कई बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है। तमिलनाडु में एक ऐसा मंदिर है, जहां सिर्फ दर्शन और पूजने के लिए नहीं बल्कि अपने अपने थायराइड इश्यू, महिलाएं पीसीओएस की समस्या दूर करने के लिए भी आती हैं। वैसे तो ये मंदिर किसी उपचार का हल नहीं है लेकिन लोगों की श्रद्धा ने उन्हें इस मंदिर की तरफ ले जाती है। आइए आपको बताते हैं कहां पर स्थित है ये मंदिर
जानिए तमिलनाडु में कहां पर स्थित है मंदिर?
तमिलनाडु के छोटे से गांव थिरुनिलकुडी के कुम्बकोणम में बना है नीलकंडेश्वर महादेव टेंपल। जो कि तंजावुर जिले में बना है। जहां पर भक्त थायराइड और पीसीओएस जैसी समस्याओं को हील करने के लिए जाते हैं।
नीलकंठ के रूप में पूजे जाते हैं महादेव
इस प्रसिद्ध मंदिर में भगवान शिव की पूजा नीलकंठेश्वर के रुप में होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवता और असुरों के बीच हुए समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने कंठ में धारण किया था। जिसकी जलन से भगवान का कंठ नीला हो गया था। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर में माता पार्वती ने भगवान शिव को तेल अर्पित किया था, जिससे उनकी गले की जलन शांत हो सके। इसी मान्यता के चलते इस मंदिर में भक्तजन थायराइड और पीसीओएस जैसी समस्या को शांत करने के लिए आते हैं।
चमत्कारिक विभूति के लिए आते हैं भक्त
इस मंदिर में भक्त अपने अंदर के डर, पीसीओएस की समस्या और थायराइड जैसे गले की प्रॉब्लम की हील करने के लिए आते हैं। माना जाता है कि इस मंदिर की पवित्र और चमत्कारिक विभूति को गले में लगाने से इन सभी समस्याओं से राहत मिलती है। इस मंदिर पर लोगों की गहरी आस्था है। ताकि उन्हें मानसिक रूप से बल मिल सके और वो अपनी बीमारियों से लड़कर उसे ठीक कर सकें।
भगवान शिव की पूजा वैद्य रूप में की जाती है
नीलकंडेश्वर महादेव मंदिर के अलावा कई और भी मंदिर है जहां पर भगवान शिव की पूजा वैद्य के रुप में की जाती है। सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में एक है वैथीस्वरन मंदिर। ये मंदिर तंजावुर जिले से दो घंटे की दूरी पर स्थित वैथीस्वरन कोइल मंदिर है। यहां पर सिद्ध कुंड है, जिसे सिद्धामृतम कुंड के नाम से जाना जाता है। इस जल को भक्त औषधीय मानते हैं जो उनके त्वचा के रोग ठीक हो सके।