Ram Manohar Lohia Birth Anniversary: समतामूलक समाजवादी समाज की स्थापना का सपना देखते थे राम मनोहर लोहिया

देश के महानायक और समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया का 23 मार्च को जन्म हुआ था। वह एक ऐसे चिंतक और नेता थे, जिन्होंने अपना जन्मदिन शहादत दिवस के लिए मनाना छोड़ दिया था। लोहिया एक ऐसे समाज की स्थापना का सपना देखते थे, जिमें शोषण, भेदभाव, असमानता और किसी प्रकार का अप्राकृतिक या अमानवीय विभेद न हो। वह एक समतामूलक समाजवादी समाज की स्थापना का सपना देखते थे। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर डॉ राम मनोहर लोहिया के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और शिक्षाउत्तर प्रदेश के जनपद अंबेडकर नगर में 23 मार्च 1910 को राम मनोहर लोहिया का जन्म हुआ था। साल 1925 में 15 साल की उम्र में वह पढ़ाई के लिए बीएचयू के सीएचएस से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की थी। यहीं से उनके किशोर मन में स्वतंत्रता और स्वदेशी आंदोलन का ऐसा असर हुआ कि इसी उम्र में उनको खादी भा गई, जोकि ताउम्र उनके बदन से लिपटी रही।इसे भी पढ़ें: Kanshi Ram Birth Anniversary: राजनीति के अजातशत्रु कहे जाते थे कांशीराम, दलित उत्थान के लिए समर्पित किया पूरा जीवनबदलाव की बयार आजादीदेश की राजनीति में भावी बदलाव की बयार राम मनोहर लोहिया ने आजादी से पहले पहले ही ला दी थी। वहीं उनके पिता गांधीजी के अनुयायी थे। वहीं अपनी प्रखर देशभक्ति और तेजस्‍वी समाजवादी विचारों की वजह से कम समय में ही डॉ राम मनोहर लोहिया ने अपने विरोधियों और समर्थकों के बीच सम्मान हासिल कर लिया था। स्वतंत्रता के बाद लोहिया उन नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने अपने दम पर शासन का रुख बदल दिया था।भारत के स्वतंत्रता युद्ध के आखिरी दौर में डॉ राम मनोहर लोहिया ने अहम भूमिका निभाई थी। वह भारतीय राजनीति के अकेले ऐसे नेता थे, जिनके पास एक सुविचारित सिद्धांत था। बता दें कि वह भारतीय राजनीति में गैर कांग्रेसवाद के शिल्पी थे। यह लोहिया के अथक प्रयासों का फल था कि साल 1967 में कई राज्यों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। उनके द्वारा चलाई गई गैर कांग्रेसवाद की विचारधारा की वजह से आगे चलकर साल 1977 में पहली बार केंद्र में गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी।बता दें कि डॉ लोहिया ने अपने पूरे जीवन में कभी भी राजनीतिक लाभ उठाने के लिए अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया था। साल 1967 में वह संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के नेता थे। लोहिया ने कन्नौज सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था। इस दौरान लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ हो रहे थे। वहीं इससे पहले साल 1967 में लोहिया फर्रुखाबाद लोकसभा सीट से उपचुनाव में जीत हासिल कर पहली बार सांसद बने थे।मृत्युअपने अंतिम समय में डॉ राम मनोहर लोहिया मधुमेह से पीड़ित थे और उनको उच्च रक्तचाप की भी समस्या थी। वहीं 12 अक्तूबर 1967 को 57 साल की उम्र में उनका नई दिल्ली में निधन हो गया था।

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Apr 14, 2025 - 15:56
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Ram Manohar Lohia Birth Anniversary: समतामूलक समाजवादी समाज की स्थापना का सपना देखते थे राम मनोहर लोहिया
देश के महानायक और समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया का 23 मार्च को जन्म हुआ था। वह एक ऐसे चिंतक और नेता थे, जिन्होंने अपना जन्मदिन शहादत दिवस के लिए मनाना छोड़ दिया था। लोहिया एक ऐसे समाज की स्थापना का सपना देखते थे, जिमें शोषण, भेदभाव, असमानता और किसी प्रकार का अप्राकृतिक या अमानवीय विभेद न हो। वह एक समतामूलक समाजवादी समाज की स्थापना का सपना देखते थे। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर डॉ राम मनोहर लोहिया के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और शिक्षा
उत्तर प्रदेश के जनपद अंबेडकर नगर में 23 मार्च 1910 को राम मनोहर लोहिया का जन्म हुआ था। साल 1925 में 15 साल की उम्र में वह पढ़ाई के लिए बीएचयू के सीएचएस से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की थी। यहीं से उनके किशोर मन में स्वतंत्रता और स्वदेशी आंदोलन का ऐसा असर हुआ कि इसी उम्र में उनको खादी भा गई, जोकि ताउम्र उनके बदन से लिपटी रही।

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बदलाव की बयार आजादी
देश की राजनीति में भावी बदलाव की बयार राम मनोहर लोहिया ने आजादी से पहले पहले ही ला दी थी। वहीं उनके पिता गांधीजी के अनुयायी थे। वहीं अपनी प्रखर देशभक्ति और तेजस्‍वी समाजवादी विचारों की वजह से कम समय में ही डॉ राम मनोहर लोहिया ने अपने विरोधियों और समर्थकों के बीच सम्मान हासिल कर लिया था। स्वतंत्रता के बाद लोहिया उन नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने अपने दम पर शासन का रुख बदल दिया था।

भारत के स्वतंत्रता युद्ध के आखिरी दौर में डॉ राम मनोहर लोहिया ने अहम भूमिका निभाई थी। वह भारतीय राजनीति के अकेले ऐसे नेता थे, जिनके पास एक सुविचारित सिद्धांत था। बता दें कि वह भारतीय राजनीति में गैर कांग्रेसवाद के शिल्पी थे। यह लोहिया के अथक प्रयासों का फल था कि साल 1967 में कई राज्यों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। उनके द्वारा चलाई गई गैर कांग्रेसवाद की विचारधारा की वजह से आगे चलकर साल 1977 में पहली बार केंद्र में गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी।

बता दें कि डॉ लोहिया ने अपने पूरे जीवन में कभी भी राजनीतिक लाभ उठाने के लिए अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया था। साल 1967 में वह संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के नेता थे। लोहिया ने कन्नौज सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था। इस दौरान लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ हो रहे थे। वहीं इससे पहले साल 1967 में लोहिया फर्रुखाबाद लोकसभा सीट से उपचुनाव में जीत हासिल कर पहली बार सांसद बने थे।

मृत्यु
अपने अंतिम समय में डॉ राम मनोहर लोहिया मधुमेह से पीड़ित थे और उनको उच्च रक्तचाप की भी समस्या थी। वहीं 12 अक्तूबर 1967 को 57 साल की उम्र में उनका नई दिल्ली में निधन हो गया था।

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