मुंबई से आई एक महत्वपूर्ण कारोबारी घोषणा में टाटा मोटर्स ने आने वाले वर्षों के लिए अपनी विकास रणनीति का खाका पेश किया है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2031 तक संयुक्त राजस्व को 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य कंपनी के भारतीय यात्री वाहन कारोबार और उसकी लक्जरी वाहन इकाई जगुआर लैंड रोवर के प्रदर्शन पर आधारित है।
बता दें कि टाटा मोटर्स ने निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत अपनी योजना में कहा है कि वह वित्त वर्ष 2029 तक 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक राजस्व हासिल करना चाहती है। इसके साथ ही कंपनी ने ब्याज और कर से पहले आय मार्जिन को 10 प्रतिशत तक पहुंचाने तथा वित्त वर्ष 2031 तक 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक कर पूर्व लाभ अर्जित करने का लक्ष्य भी रखा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, कंपनी वित्त वर्ष 2029 तक पूरी तरह शुद्ध कर्जमुक्त बनने की दिशा में भी काम कर रही है। टाटा मोटर्स ने अपनी पांच वर्षीय रणनीति के लिए वित्त वर्ष 2025 को आधार वर्ष माना है, क्योंकि वित्त वर्ष 2026 में जगुआर लैंड रोवर को साइबर हमले और उत्पादन बाधाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।
गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का संयुक्त राजस्व लगभग 3.66 लाख करोड़ रुपये रहा था। वहीं वित्त वर्ष 2026 में यह घटकर करीब 3.36 लाख करोड़ रुपये रह गया। इसका प्रमुख कारण जगुआर लैंड रोवर के कारोबार पर अमेरिकी शुल्क वृद्धि, चीन में कमजोर मांग, पुराने जगुआर मॉडलों का उत्पादन बंद होना और साइबर हमले का असर माना गया है।
हालांकि भारतीय यात्री वाहन कारोबार ने इस दौरान शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में 6 लाख 41 हजार 586 वाहनों की बिक्री दर्ज की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक रही। इसी अवधि में राजस्व बढ़कर 58,465 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और लाभ में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
टाटा मोटर्स का अनुमान है कि भारतीय यात्री वाहन कारोबार भविष्य की वृद्धि का प्रमुख आधार बनेगा। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031 तक वार्षिक बिक्री को बढ़ाकर 12 लाख वाहनों से अधिक करना है। इसके लिए विद्युत और सीएनजी वाहनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कंपनी की योजना अपने विद्युत वाहन पोर्टफोलियो को वर्तमान छह मॉडलों से बढ़ाकर दस मॉडल तक पहुंचाने की है। साथ ही कुल बिक्री में विद्युत वाहनों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है।
कंपनी ने बताया कि वह वित्त वर्ष 2029 तक उत्पाद विकास, नई तकनीकों और विनिर्माण क्षमता विस्तार पर 37,500 करोड़ से 40,000 करोड़ रुपये तक निवेश करेगी। इसके बावजूद 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का संचयी मुक्त नकदी प्रवाह उत्पन्न करने की उम्मीद जताई गई है।
टाटा मोटर्स ने अगले पांच वर्षों के लिए पांच प्रमुख प्राथमिकताएं भी तय की हैं, जिनमें तेज वृद्धि, पूंजी दक्षता, तकनीकी विकास, कारोबारी मजबूती और रणनीतिक साझेदारियां शामिल हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सॉफ्टवेयर आधारित वाहन, उन्नत चालक सहायता प्रणाली और बैटरी आधारित तकनीकों पर भी विशेष फोकस रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी अपने निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में सफल रहती है तो वह वैश्विक वाहन उद्योग में और मजबूत स्थिति बनाने में सफल हो सकती हैं।