शेयर बाजार में शुक्रवार को बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इसकी सबसे बड़ी वजह इंडियन बैंक के पहली तिमाही के मजबूत वित्तीय नतीजे रहे। नतीजे घोषित होने के बाद बैंक के शेयरों में जोरदार तेजी आई, जिसका सकारात्मक असर सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य बैंकों के शेयरों पर भी दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत मुनाफा, बढ़ती ऋण वृद्धि और लगातार सुधरती एसेट गुणवत्ता ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इंडियन बैंक का शेयर कारोबार के दौरान लगभग 10 प्रतिशत चढ़कर 872.45 रुपये के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में कुछ निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते इसमें हल्की गिरावट आई और शेयर लगभग 860.35 रुपये पर कारोबार करता दिखाई दिया, जो पिछले बंद भाव की तुलना में करीब 8.47 प्रतिशत अधिक था।
बता दें कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान इंडियन बैंक ने 3,273.09 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में बैंक का शुद्ध लाभ 2,972.82 करोड़ रुपये था। इस तरह बैंक के मुनाफे में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
बैंक की शुद्ध ब्याज आय में भी बढिया सुधार देखने को मिला है। यह बढ़कर 7,435 करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 6,359 करोड़ रुपये थी। यानी इस मद में लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बैंकिंग क्षेत्र में शुद्ध ब्याज आय को किसी भी बैंक के मुख्य कारोबार की मजबूती का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
गौरतलब है कि बैंक के ऋण वितरण में भी लगातार बढ़ोतरी जारी रही है। जून 2026 तक बैंक का कुल ऋण बढ़कर 6,84,623 करोड़ रुपये हो गया, जबकि जून 2025 में यह 6,01,147 करोड़ रुपये था। यानी बैंक के ऋण पोर्टफोलियो में लगभग 13.89 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
जमा राशि के मोर्चे पर भी इंडियन बैंक ने मजबूत प्रदर्शन किया है। बैंक की कुल जमा राशि बढ़कर 8,44,578 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 7,44,289 करोड़ रुपये थी। इसके साथ ही बैंक का घरेलू चालू और बचत खाता अनुपात भी बढ़कर 39.73 प्रतिशत हो गया, जो एक वर्ष पहले 38.97 प्रतिशत था। बैंकिंग क्षेत्र में इस अनुपात को कम लागत वाली जमा का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
सबसे राहत देने वाली बात बैंक की खराब ऋण स्थिति में सुधार रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार, बैंक का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात घटकर 1.86 प्रतिशत रह गया, जबकि एक वर्ष पहले यह 3.01 प्रतिशत था। इसी तरह शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात भी 0.18 प्रतिशत से घटकर 0.15 प्रतिशत पर आ गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि बैंक की एसेट गुणवत्ता लगातार बेहतर हो रही है।
बैंक का घरेलू शुद्ध ब्याज मार्जिन भी बढ़कर 3.41 प्रतिशत पहुंच गया है। यह पिछले तिमाही के 3.35 प्रतिशत से अधिक है और बैंक द्वारा पूरे वित्त वर्ष के लिए तय 3.10 से 3.25 प्रतिशत के अनुमान से भी ऊपर है। इसके अलावा बैंक का प्रावधान कवरेज अनुपात बढ़कर 98.22 प्रतिशत हो गया, जो पिछले वर्ष 98.20 प्रतिशत था। हालांकि बैंक ने संभावित जोखिमों को देखते हुए प्रावधान और अप्रत्याशित खर्च में भी बढ़ोतरी की है। यह राशि बढ़कर 1,196 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 691 करोड़ रुपये थी। इनमें से 376 करोड़ रुपये खराब ऋणों के लिए अलग रखे गए हैं।
इंडियन बैंक के बेहतर नतीजों का असर पूरे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग शेयरों पर देखने को मिला। बैंक ऑफ महाराष्ट्र के शेयर में लगभग 5 प्रतिशत और बैंक ऑफ इंडिया के शेयर में करीब 4.5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सूचकांक में शामिल सभी 12 बैंक हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।
वहीं निजी क्षेत्र के बैंकों में भी खरीदारी का माहौल रहा। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक जैसे प्रमुख बैंक शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इसके चलते बैंकिंग क्षेत्र का प्रमुख सूचकांक लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ कारोबार करता रहा।
बाजार जानकारों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अन्य बड़े बैंक भी इसी तरह मजबूत तिमाही नतीजे पेश करते हैं, तो बैंकिंग क्षेत्र में निवेशकों की रुचि और बढ़ सकती है। फिलहाल इंडियन बैंक के प्रदर्शन ने यह संकेत दिया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के कई बैंक बेहतर लाभ, नियंत्रित जोखिम और मजबूत ऋण वृद्धि के दम पर अपनी वित्तीय स्थिति को लगातार मजबूत कर रहे हैं।