Dilip Gavit Asian Games में विश्व रिकॉर्ड बनाएंगे, 100 और 400 मीटर पर नजर

... सुमन रे ... नयी दिल्ली, पांच अगस्त राष्ट्रमंडल खेलों में पदार्पण करते हुए 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने के साथ रिकॉर्ड बनाने वाले पैरा एथलीट दिलीप गावित का लक्ष्य अगले महीने जापान में होने वाले पैरा एशियाई खेलों में 100 मीटर और 400 मीटर दोनों स्पर्धाओं में विश्व रिकॉर्ड कामय करने का है। टी47 वर्ग में हिस्सा लेने वाले गावित ने पैरा खिलाड़ियों के सम्मान समारोह के दौरान कहा, ‘‘मैं एशियाई खेलों में 100 मीटर और 400 मीटर में विश्व रिकॉर्ड बनाना चाहता हूं। 2022 में हांगझोउ एशियाई खेलों में मैंने 400 मीटर में स्वर्ण पदक जीता था।ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में मैंने पहली बार 100 मीटर में हिस्सा लिया और इन खेलों के रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता।’’ गावित ने कहा कि उनका लक्ष्य 100 मीटर में 10.28 सेकंड का समय निकालना है, जो भारत के पुरुष वर्ग के राष्ट्रीय रिकॉर्ड के करीब है। उन्होंने बताया कि पहले वह सामान्य वर्ग की प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेते थे और राष्ट्रीय स्तर तथा खेलो इंडिया खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। उस समय उनका मुख्य ध्यान 400 मीटर दौड़ पर था।टी47 वर्ग उन खिलाड़ियों के लिए होता है, जिनके हाथों में किसी प्रकार की परेशानी होती है, जैसे एक हाथ का कट जाना या उसकी कार्यक्षमता कम होना। इसका असर संतुलन, तालमेल और दौड़ने की तकनीक पर पड़ सकता है। गावित का मानना है कि एशियाई खेलों में चुनौती काफी कठिन होगी।उन्होंने कहा, ‘‘मैं 400 मीटर और 100 मीटर दोनों में हिस्सा लूंगा। वहां प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी ऊंचा होगा। मेरे कोच उसी के अनुसार मेरी तैयारी कराएंगे।’’ दो अलग-अलग स्पर्धाओं में उतरने की चुनौती के बारे में गावित ने कहा कि उन्हें दोनों में दौड़ना पसंद है और उन्होंने किसी दबाव के बिना प्रदर्शन किया।उन्होंने कहा, मैं आमतौर पर 400 मीटर में दौड़ता हूं, इसलिए 100 मीटर में उतरना मुश्किल नहीं था। इसमें सिर्फ तेज दौड़ना होता है। मैं किसी दबाव में नहीं था क्योंकि मुझे 100 मीटर दौड़ना पसंद है।मैंने बस अपनी पूरी ताकत से दौड़ लगाई और इसका आनंद लिया।’’ गावित ने अपना स्वर्ण पदक अपने निजी कोच वैजनाथ काले को समर्पित किया। उन्होंने कहा, ग्लास्गो में जिस दिन मैंने 100 मीटर दौड़ लगाई, उस दिन गुरु पूर्णिमा थी। मेरे कोच काले सर हमेशा कहते हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए, लक्ष्य केवल भारत को गौरवान्वित करना होना चाहिए।उनकी यह बात मेरे मन में थी। मैंने तय किया था कि अगर उस दिन स्वर्ण पदक जीतूंगा तो इसे अपने गुरु को समर्पित करूंगा।’’ गावित ने कहा कि एशियाई खेलों से पहले उन्हें आराम की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘इस दौरान मुझे पर्याप्त आराम मिल चुका है।मैं आराम नहीं करना चाहता। आगे कई प्रतियोगिताएं हैं और मुझे उनके लिए तैयार रहना है। इसलिए प्रशिक्षण बहुत जरूरी है।

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Aug 5, 2026 - 15:45
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Dilip Gavit Asian Games में विश्व रिकॉर्ड बनाएंगे, 100 और 400 मीटर पर नजर

... सुमन रे ... नयी दिल्ली, पांच अगस्त राष्ट्रमंडल खेलों में पदार्पण करते हुए 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने के साथ रिकॉर्ड बनाने वाले पैरा एथलीट दिलीप गावित का लक्ष्य अगले महीने जापान में होने वाले पैरा एशियाई खेलों में 100 मीटर और 400 मीटर दोनों स्पर्धाओं में विश्व रिकॉर्ड कामय करने का है। टी47 वर्ग में हिस्सा लेने वाले गावित ने पैरा खिलाड़ियों के सम्मान समारोह के दौरान कहा, ‘‘मैं एशियाई खेलों में 100 मीटर और 400 मीटर में विश्व रिकॉर्ड बनाना चाहता हूं। 2022 में हांगझोउ एशियाई खेलों में मैंने 400 मीटर में स्वर्ण पदक जीता था।

ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में मैंने पहली बार 100 मीटर में हिस्सा लिया और इन खेलों के रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता।’’ गावित ने कहा कि उनका लक्ष्य 100 मीटर में 10.28 सेकंड का समय निकालना है, जो भारत के पुरुष वर्ग के राष्ट्रीय रिकॉर्ड के करीब है। उन्होंने बताया कि पहले वह सामान्य वर्ग की प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेते थे और राष्ट्रीय स्तर तथा खेलो इंडिया खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। उस समय उनका मुख्य ध्यान 400 मीटर दौड़ पर था।

टी47 वर्ग उन खिलाड़ियों के लिए होता है, जिनके हाथों में किसी प्रकार की परेशानी होती है, जैसे एक हाथ का कट जाना या उसकी कार्यक्षमता कम होना। इसका असर संतुलन, तालमेल और दौड़ने की तकनीक पर पड़ सकता है। गावित का मानना है कि एशियाई खेलों में चुनौती काफी कठिन होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं 400 मीटर और 100 मीटर दोनों में हिस्सा लूंगा। वहां प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी ऊंचा होगा। मेरे कोच उसी के अनुसार मेरी तैयारी कराएंगे।’’ दो अलग-अलग स्पर्धाओं में उतरने की चुनौती के बारे में गावित ने कहा कि उन्हें दोनों में दौड़ना पसंद है और उन्होंने किसी दबाव के बिना प्रदर्शन किया।

उन्होंने कहा, मैं आमतौर पर 400 मीटर में दौड़ता हूं, इसलिए 100 मीटर में उतरना मुश्किल नहीं था। इसमें सिर्फ तेज दौड़ना होता है। मैं किसी दबाव में नहीं था क्योंकि मुझे 100 मीटर दौड़ना पसंद है।

मैंने बस अपनी पूरी ताकत से दौड़ लगाई और इसका आनंद लिया।’’ गावित ने अपना स्वर्ण पदक अपने निजी कोच वैजनाथ काले को समर्पित किया। उन्होंने कहा, ग्लास्गो में जिस दिन मैंने 100 मीटर दौड़ लगाई, उस दिन गुरु पूर्णिमा थी। मेरे कोच काले सर हमेशा कहते हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए, लक्ष्य केवल भारत को गौरवान्वित करना होना चाहिए।

उनकी यह बात मेरे मन में थी। मैंने तय किया था कि अगर उस दिन स्वर्ण पदक जीतूंगा तो इसे अपने गुरु को समर्पित करूंगा।’’ गावित ने कहा कि एशियाई खेलों से पहले उन्हें आराम की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘इस दौरान मुझे पर्याप्त आराम मिल चुका है।

मैं आराम नहीं करना चाहता। आगे कई प्रतियोगिताएं हैं और मुझे उनके लिए तैयार रहना है। इसलिए प्रशिक्षण बहुत जरूरी है।

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