Commonwealth Games: भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक दिन, Harsh Singh और Asmita Dey ने जीते दो Gold Medals

भारतीय खेल जगत के लिए राष्ट्रमंडल खेलों से शानदार खबर सामने आई है। जूडो में भारत के खिलाड़ियों ने ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने देश का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया है। एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय खिलाड़ियों ने न केवल अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, बल्कि जूडो में भारत की नई पहचान भी बनाई है।मौजूद जानकारी के अनुसार, हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के ओलंपियन खिलाड़ी जोशुआ काट्ज को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। इस जीत के साथ वह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष जूडो खिलाड़ी बन गए हैं। फाइनल मुकाबले में हर्ष सिंह ने दबाव के बीच शानदार संयम दिखाया और अपने प्रतिद्वंद्वी को मात देकर देश को ऐतिहासिक सफलता दिलाई।बता दें कि हर्ष सिंह की जीत से कुछ ही समय पहले भारत की अस्मिता डे ने भी इतिहास रच दिया था। उन्होंने महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में कनाडा की हाइडी क्वाच को 2-1 के अंतर से हराकर स्वर्ण पदक जीता है। इस उपलब्धि के साथ अस्मिता डे राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय जूडो खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले भारत का कोई भी पुरुष या महिला जूडो खिलाड़ी इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल नहीं कर सका था।गौरतलब है कि हर्ष सिंह की जीत भारत के लिए राष्ट्रमंडल खेलों के जूडो इतिहास का दूसरा स्वर्ण पदक भी बनी है। पहला स्वर्ण पदक अस्मिता डे ने अपने नाम किया था और उसके तुरंत बाद हर्ष सिंह ने भी स्वर्ण जीतकर भारत के लिए ऐतिहासिक दिन बना दिया है। दोनों खिलाड़ियों की सफलता ने भारतीय जूडो को नई पहचान दिलाई है।अस्मिता डे का सफर संघर्ष और मेहनत की मिसाल माना जाता है। वह त्रिपुरा के दक्षिण त्रिपुरा जिले के बेलोनिया की रहने वाली हैं। उनके पिता साइकिल मरम्मत का काम करते हैं और सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद परिवार ने उनकी खेल यात्रा में पूरा साथ दिया है। शुरुआत में अस्मिता 800 मीटर दौड़ में हिस्सा लेती थीं, लेकिन उनके पहले प्रशिक्षक ने उनकी क्षमता को देखते हुए उन्हें जूडो अपनाने की सलाह दी। इसके बाद वर्ष 2015 में उन्होंने त्रिपुरा खेल विद्यालय में प्रवेश लिया और यहीं से उनके जूडो करियर की शुरुआत हुई है।मौजूद जानकारी के अनुसार, अस्मिता डे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उन्होंने एशियाई ओपन, जूनियर एशिया कप जूडो चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल जूडो चैंपियनशिप जैसी प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की है। इसी निरंतर प्रदर्शन का परिणाम अब राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया है।

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Aug 1, 2026 - 17:32
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Commonwealth Games: भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक दिन, Harsh Singh और Asmita Dey ने जीते दो Gold Medals
भारतीय खेल जगत के लिए राष्ट्रमंडल खेलों से शानदार खबर सामने आई है। जूडो में भारत के खिलाड़ियों ने ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने देश का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया है। एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय खिलाड़ियों ने न केवल अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, बल्कि जूडो में भारत की नई पहचान भी बनाई है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के ओलंपियन खिलाड़ी जोशुआ काट्ज को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। इस जीत के साथ वह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष जूडो खिलाड़ी बन गए हैं। फाइनल मुकाबले में हर्ष सिंह ने दबाव के बीच शानदार संयम दिखाया और अपने प्रतिद्वंद्वी को मात देकर देश को ऐतिहासिक सफलता दिलाई।

बता दें कि हर्ष सिंह की जीत से कुछ ही समय पहले भारत की अस्मिता डे ने भी इतिहास रच दिया था। उन्होंने महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में कनाडा की हाइडी क्वाच को 2-1 के अंतर से हराकर स्वर्ण पदक जीता है। इस उपलब्धि के साथ अस्मिता डे राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय जूडो खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले भारत का कोई भी पुरुष या महिला जूडो खिलाड़ी इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल नहीं कर सका था।

गौरतलब है कि हर्ष सिंह की जीत भारत के लिए राष्ट्रमंडल खेलों के जूडो इतिहास का दूसरा स्वर्ण पदक भी बनी है। पहला स्वर्ण पदक अस्मिता डे ने अपने नाम किया था और उसके तुरंत बाद हर्ष सिंह ने भी स्वर्ण जीतकर भारत के लिए ऐतिहासिक दिन बना दिया है। दोनों खिलाड़ियों की सफलता ने भारतीय जूडो को नई पहचान दिलाई है।

अस्मिता डे का सफर संघर्ष और मेहनत की मिसाल माना जाता है। वह त्रिपुरा के दक्षिण त्रिपुरा जिले के बेलोनिया की रहने वाली हैं। उनके पिता साइकिल मरम्मत का काम करते हैं और सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद परिवार ने उनकी खेल यात्रा में पूरा साथ दिया है। शुरुआत में अस्मिता 800 मीटर दौड़ में हिस्सा लेती थीं, लेकिन उनके पहले प्रशिक्षक ने उनकी क्षमता को देखते हुए उन्हें जूडो अपनाने की सलाह दी। इसके बाद वर्ष 2015 में उन्होंने त्रिपुरा खेल विद्यालय में प्रवेश लिया और यहीं से उनके जूडो करियर की शुरुआत हुई है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अस्मिता डे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उन्होंने एशियाई ओपन, जूनियर एशिया कप जूडो चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल जूडो चैंपियनशिप जैसी प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की है। इसी निरंतर प्रदर्शन का परिणाम अब राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया है।

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