Best Flour: Diabetes और Fatty Liver का रामबाण! Diet में शामिल करें कटहल-क्विनोआ के ये 2 Superfood आटे

अच्छी सेहत के लिए लाइफस्टाइल में और खानपान में सुधार की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। हम जो भी खाते हैं या हमारी जैसी लाइफस्टाइल है, उसका सेहत पर सीधा असर होता है। यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट भी लोगों को अपनी दिनचर्या सही रखने की सलाह देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक रिफाइंड आटा यानी मैदा, प्रोसेस्ड फूड, नमक और चीनी वाली चीजों का अधिक सेवन किया जाता है, जिससे डायबिटीज, मोटापा, हाई बीपी और हृदय रोगों का खतरा भी तेजी से बढ़ता है।क्योंकि शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित आहार दुनियाभर में होने वाली क्रॉनिक बीमारियों के प्रमुख कारण है। अगर हम अपनी डाइट में पौष्टिक और फाइबर वाली चीजों की मात्रा को बढ़ाते हैं, तो इससे न सिर्फ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, बल्कि कई बीमारियों का भी खतरा कम हो सकता है। जब खानपान में सुधार की बात होती है, तो लोगों के मन में एक सवाल यह भी होता है कि सेहत के लिए कौन सा आटा अच्छा है।इसे भी पढ़ें: Kids Heart Attack: बदलता Lifestyle बना खतरा, बच्चों में बढ़ रहा High BP और Heart Attack का Risk, एक्सपर्ट्स ने चेतायासेहत के लिए कौन सा आटा अच्छाभारत में गेहूं का आटा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसमें फाइबर, कार्बोहाइड्रेट्स, आयरन और विटामिन बी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। साबुत गेहूं का आटा पाचन को बेहतर करने और ऊर्जा देने में मदद करता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में अन्य तरह के आटे की मांग भी तेजी से बढ़ गई है।पारंपरिक गेहूं के आटे के अलावा आजकल हरे कटहल का आटा और क्विनोआ का आटा भी लोग इस्तेमाल में ला रहे हैं।यह दोनों ऑप्शन पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। यह उन लोगों के लिए खासतौर पर फायदेमंद हैं, जो ब्लड शुगर, पाचन या वजन से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं।क्विनोआ का आटायह एक स्वास्थ्यवर्धन बीज है, यह कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसलिए इसको सुपरफूड माना जाता है। क्विनोआ में फाइबर, मैग्नीशियम, आयरन, पोटैशियम, अमीनो एसिड, मैंगनीज, फॉस्फोरस, विटाबिन बी और फोलेट पाया जाता है। इसमें मौजूद अमीनो एसिड मांसपेशियों की मरम्मत करने और इसके विकास में अहम भूमिका निभाता है। क्विनोआ में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पेट को लंबे समय तक भरा महसूस कराता है। जिससे आप बार-बार खाने से बच जाते हैं।जानिए ये फायदेक्विनोआ के आटे में पोटेशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो बीपी को कंट्रोल करने के साथ बैड कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है।क्विनोआ में मौजूद मैग्नीशियम, विटामिन बी, आयरन और फॉस्फोरस एनीमिया को रोकने में मदद करते हैं।हरे कटहल का आटामधुमेह रोगियों में प्लाज्मा शर्करा के लेवल को कम करने और ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन को कंट्रोल करने में कटहल का आटा काफी कारगर माना गया था। ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन का बढ़ना डायबिटीज का संकेत माना जाता है।टाइप-2 डायबिटीज को कंट्रोल करने वाले पेटेंटेड हरे कटहल के आटे पर नैदानिक परीक्षण में इसको मोटापे और फैटी लिवर को रोकने में कारगर बताया गया था।लिवर और शुगर के लिए फायदेमंदबता दें कि चूहों पर किए गए शोध में पता चलता है कि हरे कटहल के आटे का सिर्फ 3 महीने सेवन करने से वजन वृद्धि को काफी हद तक रोका जा सकता है। वहीं यह लिवर में फैट जमने की समस्या को कम करने में प्रभावी है।शोधकर्ताओं में से एक और हरे कटहल का आटा बनाने वाली कंपनी के मुताबिक गेहूं के आटे के साथ प्लेसबो समूह की तुलना में इससे इंसुलिन संवेदनशीलता में भी सुधार पाया गया है। इससे लिपोजेनेसिस मार्करों और इंफ्लामेशन में भी काफी कमी आ सकती है।

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Apr 14, 2026 - 16:52
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Best Flour: Diabetes और Fatty Liver का रामबाण! Diet में शामिल करें कटहल-क्विनोआ के ये 2 Superfood आटे
अच्छी सेहत के लिए लाइफस्टाइल में और खानपान में सुधार की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। हम जो भी खाते हैं या हमारी जैसी लाइफस्टाइल है, उसका सेहत पर सीधा असर होता है। यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट भी लोगों को अपनी दिनचर्या सही रखने की सलाह देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक रिफाइंड आटा यानी मैदा, प्रोसेस्ड फूड, नमक और चीनी वाली चीजों का अधिक सेवन किया जाता है, जिससे डायबिटीज, मोटापा, हाई बीपी और हृदय रोगों का खतरा भी तेजी से बढ़ता है।

क्योंकि शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित आहार दुनियाभर में होने वाली क्रॉनिक बीमारियों के प्रमुख कारण है। अगर हम अपनी डाइट में पौष्टिक और फाइबर वाली चीजों की मात्रा को बढ़ाते हैं, तो इससे न सिर्फ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, बल्कि कई बीमारियों का भी खतरा कम हो सकता है। जब खानपान में सुधार की बात होती है, तो लोगों के मन में एक सवाल यह भी होता है कि सेहत के लिए कौन सा आटा अच्छा है।

इसे भी पढ़ें: Kids Heart Attack: बदलता Lifestyle बना खतरा, बच्चों में बढ़ रहा High BP और Heart Attack का Risk, एक्सपर्ट्स ने चेताया


सेहत के लिए कौन सा आटा अच्छा

भारत में गेहूं का आटा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसमें फाइबर, कार्बोहाइड्रेट्स, आयरन और विटामिन बी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। साबुत गेहूं का आटा पाचन को बेहतर करने और ऊर्जा देने में मदद करता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में अन्य तरह के आटे की मांग भी तेजी से बढ़ गई है।

पारंपरिक गेहूं के आटे के अलावा आजकल हरे कटहल का आटा और क्विनोआ का आटा भी लोग इस्तेमाल में ला रहे हैं।

यह दोनों ऑप्शन पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। यह उन लोगों के लिए खासतौर पर फायदेमंद हैं, जो ब्लड शुगर, पाचन या वजन से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

क्विनोआ का आटा

यह एक स्वास्थ्यवर्धन बीज है, यह कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसलिए इसको सुपरफूड माना जाता है।
 
क्विनोआ में फाइबर, मैग्नीशियम, आयरन, पोटैशियम, अमीनो एसिड, मैंगनीज, फॉस्फोरस, विटाबिन बी और फोलेट पाया जाता है।
 
इसमें मौजूद अमीनो एसिड मांसपेशियों की मरम्मत करने और इसके विकास में अहम भूमिका निभाता है।
 
क्विनोआ में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पेट को लंबे समय तक भरा महसूस कराता है। जिससे आप बार-बार खाने से बच जाते हैं।

जानिए ये फायदे

क्विनोआ के आटे में पोटेशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो बीपी को कंट्रोल करने के साथ बैड कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है।

क्विनोआ में मौजूद मैग्नीशियम, विटामिन बी, आयरन और फॉस्फोरस एनीमिया को रोकने में मदद करते हैं।

हरे कटहल का आटा

मधुमेह रोगियों में प्लाज्मा शर्करा के लेवल को कम करने और ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन को कंट्रोल करने में कटहल का आटा काफी कारगर माना गया था। ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन का बढ़ना डायबिटीज का संकेत माना जाता है।

टाइप-2 डायबिटीज को कंट्रोल करने वाले पेटेंटेड हरे कटहल के आटे पर नैदानिक परीक्षण में इसको मोटापे और फैटी लिवर को रोकने में कारगर बताया गया था।

लिवर और शुगर के लिए फायदेमंद

बता दें कि चूहों पर किए गए शोध में पता चलता है कि हरे कटहल के आटे का सिर्फ 3 महीने सेवन करने से वजन वृद्धि को काफी हद तक रोका जा सकता है। वहीं यह लिवर में फैट जमने की समस्या को कम करने में प्रभावी है।

शोधकर्ताओं में से एक और हरे कटहल का आटा बनाने वाली कंपनी के मुताबिक गेहूं के आटे के साथ प्लेसबो समूह की तुलना में इससे इंसुलिन संवेदनशीलता में भी सुधार पाया गया है। इससे लिपोजेनेसिस मार्करों और इंफ्लामेशन में भी काफी कमी आ सकती है।

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