भारत की Solar Energy में रिकॉर्ड छलांग, 14 महीने में जोड़े 50 GW, अब दुनिया में नंबर 2 बनने पर नजर

भारत सालाना सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के मामले में 2026 तक विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा बाजार बनने की राह पर है। नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनएसईएफआई) ने बुधवार को यह बात कही। एनएसईएफआई के बयान के अनुसार, भारत ने मात्र 14 महीनों में 50 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़कर अब तक की सबसे तेज वृद्धि हासिल की है और 150 गीगावाट का महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल कर लिया है। यह तेज वृद्धि है। पहले 50 गीगावाट तक पहुंचने में 11 साल लगे थे। उसके बाद 100 गीगावाट तक पहुंचने में लगभग तीन साल लगे हैं। एनएसईएफआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुब्रह्मण्यम पुलिपाका ने कहा कि भारत के 2030 तक 500 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा 280 से 300 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। वर्तमान गति के साथ, भारत 50 गीगावाट की वार्षिक वृद्धि के लक्ष्य के करीब पहुंच रहा है, जो इस लक्ष्य के साथ पूरी तरह से मेल खाता है। पुलिपाका ने कहा वास्तव में, पीएम सूर्य घर जैसी पहल, आगामी पीएम कुसुम 2.0, ‘फ्लोटिंग’ सौर संयंत्र के लिए अलग से नीति और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से जुड़ी बढ़ती मांग के कारण, देश में सौर ऊर्जा क्षमता इन अनुमानों से कहीं अधिक बढ़ने की काफी संभावना है। वैश्विक परिदृश्यों में बदलाव के बीच, एनएसईएफआई का अनुमान है कि भारत वार्षिक क्षमता स्थापित किये जाने के मामले में 2026 तक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा बाजार बनने की राह पर है। एनएसईएफआई ने कहा कि वैश्विक रुझान अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख बाजारों में क्षमता वृद्धि में संभावित नरमी का संकेत दे रहे हैं, जो वर्तमान में वार्षिक स्थापित क्षमता के मामले में दूसरे स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। पुलिपाका ने कहा कि इसके उलट, भारत नवीकरणीय ऊर्जा के विकास में लगातार तेजी ला रहा है और प्रमुख लक्ष्यों को लगातार पार कर रहा है। इसके साथ आने वाले वर्ष में वार्षिक क्षमता स्थापित किये जाने के के मामले में दूसरे सबसे बड़े देश के रूप में उभरने के लिए तैयार है। एनएसईएफआई ने कहा कि वितरित नवीकरणीय ऊर्जा (डीआरई) और वाणिज्यिक एवं औद्योगिक (सी एंड आई) स्तर पर सौर ऊर्जा को अपनाना अगले तीन वर्षों में वृद्धि के को गति देने वाले प्रमुख तत्व होंगे।

PNSPNS
Apr 15, 2026 - 10:22
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भारत की Solar Energy में रिकॉर्ड छलांग, 14 महीने में जोड़े 50 GW, अब दुनिया में नंबर 2 बनने पर नजर

भारत सालाना सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के मामले में 2026 तक विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा बाजार बनने की राह पर है। नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनएसईएफआई) ने बुधवार को यह बात कही। एनएसईएफआई के बयान के अनुसार, भारत ने मात्र 14 महीनों में 50 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़कर अब तक की सबसे तेज वृद्धि हासिल की है और 150 गीगावाट का महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल कर लिया है। यह तेज वृद्धि है। पहले 50 गीगावाट तक पहुंचने में 11 साल लगे थे। उसके बाद 100 गीगावाट तक पहुंचने में लगभग तीन साल लगे हैं।

एनएसईएफआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुब्रह्मण्यम पुलिपाका ने कहा कि भारत के 2030 तक 500 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा 280 से 300 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। वर्तमान गति के साथ, भारत 50 गीगावाट की वार्षिक वृद्धि के लक्ष्य के करीब पहुंच रहा है, जो इस लक्ष्य के साथ पूरी तरह से मेल खाता है। पुलिपाका ने कहा वास्तव में, पीएम सूर्य घर जैसी पहल, आगामी पीएम कुसुम 2.0, ‘फ्लोटिंग’ सौर संयंत्र के लिए अलग से नीति और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से जुड़ी बढ़ती मांग के कारण, देश में सौर ऊर्जा क्षमता इन अनुमानों से कहीं अधिक बढ़ने की काफी संभावना है।

वैश्विक परिदृश्यों में बदलाव के बीच, एनएसईएफआई का अनुमान है कि भारत वार्षिक क्षमता स्थापित किये जाने के मामले में 2026 तक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा बाजार बनने की राह पर है। एनएसईएफआई ने कहा कि वैश्विक रुझान अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख बाजारों में क्षमता वृद्धि में संभावित नरमी का संकेत दे रहे हैं, जो वर्तमान में वार्षिक स्थापित क्षमता के मामले में दूसरे स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

पुलिपाका ने कहा कि इसके उलट, भारत नवीकरणीय ऊर्जा के विकास में लगातार तेजी ला रहा है और प्रमुख लक्ष्यों को लगातार पार कर रहा है। इसके साथ आने वाले वर्ष में वार्षिक क्षमता स्थापित किये जाने के के मामले में दूसरे सबसे बड़े देश के रूप में उभरने के लिए तैयार है। एनएसईएफआई ने कहा कि वितरित नवीकरणीय ऊर्जा (डीआरई) और वाणिज्यिक एवं औद्योगिक (सी एंड आई) स्तर पर सौर ऊर्जा को अपनाना अगले तीन वर्षों में वृद्धि के को गति देने वाले प्रमुख तत्व होंगे।

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