Adhik Maas 2026 Rules: क्यों बंद रहते हैं शुभ काम? जानें क्या करने से मिलता है 10 गुना पुण्य

हिंदू धर्म में अधिक मास का विशेष महत्व माना गया है, इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, यह 3 साल में एक बार आने वाला महीना होता है। अधिक मास में जप-तप और दान-पुण्य के लिए अच्छा माना जाता है। इस साल यह महीना 17 मई से शुरु हो गया है। इस पूरे महीने में सूर्य संक्रांति नहीं होती। इसके साथ ही शुभ कार्यों करने की मनाही होती है। आइए आपको बताते हैं अधिक मास में किन चीजों नहीं करना चाहिए और क्या शुभ है।अधिक मास में न करें ये मांगलिक कार्य- पुरुषोत्तम मास में शादी-विवाह या सगाई जैसे रिश्ते तय करने वाले संस्कार पूरी तरह से वर्जित होते हैं। माना जाता है कि इस अवधि में किए जाने विवाह से दांपत्य जीवन में सुख और शांति अभाव होता है।- नए घर की नींव रखना या नए बने हुए मकान में प्रवेश करना। इस महीने अशुभ होता है। - बच्चों का मुंडन संस्कार या जनेऊ संस्कार भी मलमास में नहीं किए जाते हैं। - अधिक मास में नया बिजनस शुरु करना, नई गाड़ी खरीदना या बड़ी संपत्ति का सौदा करने से बचें। क्योंकि इस समय किए गए निवेश में बरकत नहीं होती है।अधिक मास में क्या करना होता है बेहद फलदायी होता है?- अधिक मास में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं, लेकिन इस महीने के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु (श्रीहरि पुरुषोत्तम) हैं, जो कि धार्मिक कार्यों का फल सामान्य दिनों से कई गुना अधिक प्राप्त होता है। - इस पूरे महीने में सुबह-शाम भगवान विष्णु के  'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें। - कुंडली में कोई गंभीर दोष है, तो इस महीने भगवान शिव की आराधना और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें, जिससे आपको कष्टों से मुक्ति मिल जाए। - अधिक मास के दौरान दीपदान, वस्त्र दान, अनाज और तिल का दान करना काफी शुभ माना जाता बै। - किसी जरुरतमंद या ब्राह्मण को मालपुए का दान करने से पितृ दोष और ग्रहों के बुरे प्रभाव दूर होते हैं। - इस महीने में पवित्र नदीं में स्नान करना तन और मन दोनों को शुद्ध करना बहुत ही जरुरी है।

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May 20, 2026 - 12:18
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Adhik Maas 2026 Rules: क्यों बंद रहते हैं शुभ काम? जानें क्या करने से मिलता है 10 गुना पुण्य
हिंदू धर्म में अधिक मास का विशेष महत्व माना गया है, इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, यह 3 साल में एक बार आने वाला महीना होता है। अधिक मास में जप-तप और दान-पुण्य के लिए अच्छा माना जाता है। इस साल यह महीना 17 मई से शुरु हो गया है। इस पूरे महीने में सूर्य संक्रांति नहीं होती। इसके साथ ही शुभ कार्यों करने की मनाही होती है। आइए आपको बताते हैं अधिक मास में किन चीजों नहीं करना चाहिए और क्या शुभ है।

अधिक मास में न करें ये मांगलिक कार्य

- पुरुषोत्तम मास में शादी-विवाह या सगाई जैसे रिश्ते तय करने वाले संस्कार पूरी तरह से वर्जित होते हैं। माना जाता है कि इस अवधि में किए जाने विवाह से दांपत्य जीवन में सुख और शांति अभाव होता है।

- नए घर की नींव रखना या नए बने हुए मकान में प्रवेश करना। इस महीने अशुभ होता है।

 - बच्चों का मुंडन संस्कार या जनेऊ संस्कार भी मलमास में नहीं किए जाते हैं।

 - अधिक मास में नया बिजनस शुरु करना, नई गाड़ी खरीदना या बड़ी संपत्ति का सौदा करने से बचें। क्योंकि इस समय किए गए निवेश में बरकत नहीं होती है।

अधिक मास में क्या करना होता है बेहद फलदायी होता है?

- अधिक मास में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं, लेकिन इस महीने के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु (श्रीहरि पुरुषोत्तम) हैं, जो कि धार्मिक कार्यों का फल सामान्य दिनों से कई गुना अधिक प्राप्त होता है।

 - इस पूरे महीने में सुबह-शाम भगवान विष्णु के  'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें।

 - कुंडली में कोई गंभीर दोष है, तो इस महीने भगवान शिव की आराधना और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें, जिससे आपको कष्टों से मुक्ति मिल जाए।

 - अधिक मास के दौरान दीपदान, वस्त्र दान, अनाज और तिल का दान करना काफी शुभ माना जाता बै।

 - किसी जरुरतमंद या ब्राह्मण को मालपुए का दान करने से पितृ दोष और ग्रहों के बुरे प्रभाव दूर होते हैं।

 - इस महीने में पवित्र नदीं में स्नान करना तन और मन दोनों को शुद्ध करना बहुत ही जरुरी है।

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