माउंटेन ड्यू कोल्ड ड्रिंक्स के एक एड पंचलाइन 'डर सुनने में तो छोटा-सा लगता, पर जब लगता है, तो बहुत लगता है, डर सबको लगता है, गला सबका सूखता है। ऐसा ही डर टेररिस्तान के नाम से मशहूर भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को भी लगा था। जिसकी बानगी पाकिस्तान असेंबली के पूर्व स्पीकर ने करते हुए हाले-बयान कुछ इस तरह से किया था- भारत के हमले की आशंका से उस समय पाकिस्तान के सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा के पैर कांप रहे थे और चेहरे पर पसीना आ रहा था। अभिनंदन को लेकर वो कह रहे थे कि खुदा के वास्ते उसे जाने दें। राफेल फ्रेंच भाषा का शब्द है इसका शाब्दिक अर्थ है हवा का तेज झोंका। लेकिन पाकिस्तान व उसके वजीर-ए-आला के लिए इसका अर्थ है डर का तेज झोंका। राफेल एक रात के भीतर कई बार पाकिस्तान के पूरे चक्कर लगा सकता है और इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक तहलका भी मचा सकता है। राफेल विमार का लगातार 12 घंटे तक उड़ान भरने का रिकॉर्ड है। अब पाकिस्तान का ये डर और भी बढ़ने वाला है। भारतीय वायुसेना फ्रांस से करीब-करीब 114 राफेल एयरक्राफ्ट खरीदने जा रही है और इस डील को फिलहाल इंडियन एयरफोर्स के इतिहास के सबसे बड़े डील के रूप में देखा जा रहा है। जिसमें करीब-करीब ₹3,25,000 करोड़ खर्चा किया जाएगा। इस डील के अंतर्गत केवल मात्र एयरक्राफ्टों को डायरेक्टली यह ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के अंतर्गत ही खरीदा नहीं जाएगा।
रिपोर्टों में क्लेम किया जा रहा है कि इन एयरक्राफ्टों में भारतीय हार्डवेयर और हथियारों का भी इंटीग्रेशन होगा। इससे भारत को एयरक्राफ्ट रिलेटेड काफी सारी सुविधाएं मिलेगा। खास करके इन सुविधाओं से आने वाले समय में एयरक्राफ्टों के मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरऑल जैसे जो चीज है वो और आसान होगा। भारत इस तरीके के एयरक्राफ्टों का तलाश तो लंबे समय से कर रहा था लेकिन अब बताया जा रहा है कि आखिरकार भारत का यह तलाश समाप्त हो गई है और जल्द ही भारत फ्रांस से करीब-करीब 114 राफेल एयरक्राफ्टों को खरीदेगा। हालांकि अभी तक भारत और फ्रांस के बीच में इन राफेल एयरक्राफ्टों को लेकर डील नहीं हुआ है। लेकिन अनुमान जताया जा रहा है कि शायद इस साल के अंत तक यह डील हो जाए।डील होने से पहले मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस की तरफ से इस डील को लेकर कई तरीके के खुलासे किया गया है और इनमें से एक खुलासे में यह भी कंफर्म किया गया है कि यह जो डील है यह आईसीडी क्लॉज़ के अंतर्गत गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्ट में होगा। मतलब दोनों देशों के गवर्नमेंट मिलकर डील को जहां पर आगे बढ़ाएगा तो वहीं पर डील में इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट जैसे क्लॉज़ को रखा जाएगा। जिससे कि आने वाले समय में इन एयरक्राफ्टों में भारतीय कॉमोनेंटों के साथ-साथ हथियारों को इंटीग्रेट कर किया जा सकेगा।
हालांकि बता दें कि इन एयरक्राफ्टों के डील में पहले से ही मेक इन इंडिया इनिशिएटिव और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी जैसे क्लॉज़ को रखा गया है। जिससे कि कुछ एयरक्राफ्टों को सीधी खदीर करने के बाद बाकी एयरक्राफ्टों को भारत में प्रोड्यूस किया जा सकेगा। इसके साथ-साथ यह भी दावा किया जा रहा है कि एयरक्राफ्टों के प्रोडक्शन के शुरुआती तौर पर जहां पर एयरक्राफ्टों में कम से कम 30% तक इंडीजीनियस कंपोनेंट होगा। वहीं पे प्रोडक्शन आगे बढ़ने के साथ-साथ इसमें करीब-करीब 60% तक इंडीजीनियस कंपोनेंटों का उपयोग किया जाएगा। अह जो आईसीडी या फिर कह तो इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट है, यह मोटा-मोटी एक ऐसा फ्रेमवर्क है जिसके अंतर्गत यह बताया जाता है कि कैसे एयरक्राफ्टों के अलग-अलग सब सिस्टम मतलब जैसे कि राइडर, एयनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक, वॉरफेयर सूट, हथियार एक दूसरे के साथ कम्युनिकेट करता है। अगर भारत 114 रेफेल एयरक्राफ्टों के डी डील में आईसीडी को इंटीग्रेट करता है तो इससे आने वाले समय में भारत अपने हथियारों को औरने हार्डवेयरों को भी इन एयरक्राफ्टों में इंटीग्रेट कर पाएगा।