भारत मदद करने के लिए तैयार, नेपाल ने ठुकरा दिया रेस्क्यू का ऑफर!

नेपाल में बहुत बड़ी बाढ़ आई जिसमें अब तक कई सौ लोगों की मौत हो चुकी है। कई हजार लापता हैं। रेस्क्यू लगातार चल रहा है। लेकिन इसी बीच बालेन शाह ने मदद लेने से इंकार कर दिया है। दरअसल बालेन शाह ने दुनिया के सभी देशों को यह कह दी है बात कि उन्हें रेस्क्यू में किसी की मदद नहीं चाहिए। लेकिन सवाल भारत पर है कि भारत जब मदद कर रहा है भारत रेस्क्यू करवाने के लिए अपनी टीम भेजने के लिए तैयार था तो बालेन शाह क्यों मना कर रहे हैं? इसे भी पढ़ें: Tibet में Flash Floods से 5 लोगों की मौत, 558 लापता होने की पुष्टिबालेन शाह के छोटे भाई  हरीश कुमार ने कहा कि जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और भारत ने नेपाल की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। यह साबित करता है कि हम दोनों सिर्फ पड़ोसी नहीं एक दूसरे के प्यारे भाई हैं। अगर इस लिहाज से भावना अच्छी है और कह रहा है कि अगर हम किसी से नहीं लेंगे तो ईश्वर करें कि नेपाल को वो शक्ति दे कि अपने पैरों पर स्वयं ही खड़ा हो सके। नेपाल की डेमोग्राफी इस तरह से है कि हिमालय के उस पार चाइना है। तो चीन जो भी मदद करेगा उसको पूरा हिमालयन क्रॉस करके आना पड़ेगा तब मदद पहुंचाएगा। भारत के साथ ऐसी बात है कि भारत चारों तरफ से बिलकुल मदद भेज सकता है। खास करके पूरा मधेशी इलाका पूरा यूपी पूरा बिहार पूरा ट्रांसपोर्ट फैसिलिटीज है। जब भी नेपाल पे मुसीबत आई है चाहे भूकंप आया हो या बाढ़ आया हो भारत ने मदद की है। इस आपदा का दायरा बहुत बड़ा है। नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,545 लोगों को बचाया गया है और वे घायल हैं। आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, लगभग 1,000 लोग लापता हैं, जिनमें 28 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं जिनका कोई पता नहीं चल पाया है।इसे भी पढ़ें: Nepal Flood से भारत-नेपाल व्यापार प्रभावित, Sonauli Border पर 16 किमी तक ट्रकों की कतारनेपाल पुलिस ने खोज और बचाव कार्यों के लिए 4,348 कर्मियों को तैनात किया है। अधिकारियों ने रसुवा से 644, नुवाकोट से 898 और धाडिंग से तीन लोगों को बचाया है।लापता लोगों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। 'काठमांडू पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, 178 भारतीय, 65 अमेरिकी, 51 मलेशियाई, 53 यूक्रेनी, 33 ब्रिटिश, 35 ऑस्ट्रेलियाई और 25 कनाडाई नागरिकों के साथ-साथ दर्जनों अन्य देशों के नागरिक भी लापता हैं। चीनी अधिकारियों ने भी कहा है कि कम से कम 100 चीनी नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।इसके बावजूद, नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और मानवीय सहायता का स्वागत किया है। अमेरिका ने 5,00,000 डॉलर की सहायता का वादा किया है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आपातकालीन चिकित्सा सामग्री भेजी है।इसे भी पढ़ें: Nepal Flood: Bhotekoshi नदी में जलस्तर बढ़ने के बाद दूसरी लहर की चेतावनी जारीविदेश मंत्रालय ने बाढ़ से प्रभावित विदेशी नागरिकों के लिए जानकारी, खोज और बचाव प्रयासों तथा कांसुलर सहायता के समन्वय के लिए एक आपातकालीन नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है।

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Aug 29, 2026 - 14:13
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भारत मदद करने के लिए तैयार, नेपाल ने ठुकरा दिया रेस्क्यू का ऑफर!
नेपाल में बहुत बड़ी बाढ़ आई जिसमें अब तक कई सौ लोगों की मौत हो चुकी है। कई हजार लापता हैं। रेस्क्यू लगातार चल रहा है। लेकिन इसी बीच बालेन शाह ने मदद लेने से इंकार कर दिया है। दरअसल बालेन शाह ने दुनिया के सभी देशों को यह कह दी है बात कि उन्हें रेस्क्यू में किसी की मदद नहीं चाहिए। लेकिन सवाल भारत पर है कि भारत जब मदद कर रहा है भारत रेस्क्यू करवाने के लिए अपनी टीम भेजने के लिए तैयार था तो बालेन शाह क्यों मना कर रहे हैं? 

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बालेन शाह के छोटे भाई  हरीश कुमार ने कहा कि जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और भारत ने नेपाल की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। यह साबित करता है कि हम दोनों सिर्फ पड़ोसी नहीं एक दूसरे के प्यारे भाई हैं। अगर इस लिहाज से भावना अच्छी है और कह रहा है कि अगर हम किसी से नहीं लेंगे तो ईश्वर करें कि नेपाल को वो शक्ति दे कि अपने पैरों पर स्वयं ही खड़ा हो सके। नेपाल की डेमोग्राफी इस तरह से है कि हिमालय के उस पार चाइना है। तो चीन जो भी मदद करेगा उसको पूरा हिमालयन क्रॉस करके आना पड़ेगा तब मदद पहुंचाएगा। भारत के साथ ऐसी बात है कि भारत चारों तरफ से बिलकुल मदद भेज सकता है। खास करके पूरा मधेशी इलाका पूरा यूपी पूरा बिहार पूरा ट्रांसपोर्ट फैसिलिटीज है। जब भी नेपाल पे मुसीबत आई है चाहे भूकंप आया हो या बाढ़ आया हो भारत ने मदद की है। इस आपदा का दायरा बहुत बड़ा है। नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,545 लोगों को बचाया गया है और वे घायल हैं। आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, लगभग 1,000 लोग लापता हैं, जिनमें 28 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं जिनका कोई पता नहीं चल पाया है।

इसे भी पढ़ें: Nepal Flood से भारत-नेपाल व्यापार प्रभावित, Sonauli Border पर 16 किमी तक ट्रकों की कतार

नेपाल पुलिस ने खोज और बचाव कार्यों के लिए 4,348 कर्मियों को तैनात किया है। अधिकारियों ने रसुवा से 644, नुवाकोट से 898 और धाडिंग से तीन लोगों को बचाया है।
लापता लोगों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। 'काठमांडू पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, 178 भारतीय, 65 अमेरिकी, 51 मलेशियाई, 53 यूक्रेनी, 33 ब्रिटिश, 35 ऑस्ट्रेलियाई और 25 कनाडाई नागरिकों के साथ-साथ दर्जनों अन्य देशों के नागरिक भी लापता हैं। चीनी अधिकारियों ने भी कहा है कि कम से कम 100 चीनी नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
इसके बावजूद, नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और मानवीय सहायता का स्वागत किया है। अमेरिका ने 5,00,000 डॉलर की सहायता का वादा किया है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आपातकालीन चिकित्सा सामग्री भेजी है।

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विदेश मंत्रालय ने बाढ़ से प्रभावित विदेशी नागरिकों के लिए जानकारी, खोज और बचाव प्रयासों तथा कांसुलर सहायता के समन्वय के लिए एक आपातकालीन नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है।

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