हॉकी के द्रोणाचार्य Baldev Singh को मिलेगा Padma Shri, 80 इंटरनेशनल खिलाड़ी किए तैयार

हॉकी कोच बलदेव सिंह को 25 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा जाएगा। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। सिंह (75 वर्ष) ने एनएच 44 पर बसे छोटे से शहर शाहाबाद मारकंडा को बेहतरीन हॉकी प्रतिभा पैदा करने का एक बड़ा केंद्र बना दिया। वह 1982 में हरियाणा खेल विभाग में कोच के तौर पर शाहाबाद मारकंडा आए थे और उन्होंने वहां चार साल तक सेवा दी। अधिकारियों ने बताया कि 1993 में वह इस शहर में वापस लौटे और उन्होंने इस हॉकी नर्सरी को सबसे ज्यादा हॉकी प्रतिभा पैदा करने वाले केंद्र में से एक बना दिया। भैणी साहिब की नामधारी हॉकी टीम से अपने पेशेवर करियर की शुरुआत करने वाले और अस्सी के दशक की शुरुआत में बेंगलुरु के राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनआईएस) से हॉकी कोचिंग में डिप्लोमा हासिल करने वाले सिंह ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए इस खेल में 80 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और आठ भारतीय कप्तानों को तराशा। जैसे-जैसे यह अकादमी इस खेल के लिए एक प्रमुख केंद्र बनती गई, सिंह ने हॉकी की प्रतिस्पर्धी व्यवस्था में कई अहम भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने 1993 में जूनियर पुरुष टीम के मुख्य कोच और चयनकर्ता के तौर पर काम किया। फिर वह 1996 में मद्रास में चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाली भारतीय टीम के सहायक कोच रहे और बाद में सीनियर राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच बने। अधिकारियों ने बताया कि 2001 से 2004 तक उन्होंने भारतीय पुरुष टीम के कोच के तौर पर काम किया और 2004 के एशिया कप में टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। चार दशकों से भी ज्यादा समय से सिंह सुर्खियों से दूर रहकर काम करते रहे, उन्होंने भारतीय हॉकी की संस्थागत नींव को मजबूत करने में योगदान दिया। सिंह ने फतेहगढ़ साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब विश्व विश्वविद्यालय और अमृतसर के खालसा कॉलेज में हॉकी कोच के तौर पर सेवा दी। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा 2020 तोक्यो, 2024 पेरिस और 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक खेलों के लिए एक ‘रोडमैप’ तैयार करने हेतु गठित ओलंपिक कार्य बल के मुख्य सदस्य के तौर पर भी काम किया है।Baldev Singh, a veteran hockey coach and the architect behind some of India’s finest hockey talent, will be honoured with the Padma Shri for his exceptional contribution to Indian hockey, grassroots sports development, and over four decades of distinguished coaching.Popularly… pic.twitter.com/0fTpgGUb3e— Ministry of Information and Broadcasting (@MIB_India) May 20, 2026

PNSPNS
May 21, 2026 - 11:23
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हॉकी के द्रोणाचार्य Baldev Singh को मिलेगा Padma Shri, 80 इंटरनेशनल खिलाड़ी किए तैयार

हॉकी कोच बलदेव सिंह को 25 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा जाएगा। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। सिंह (75 वर्ष) ने एनएच 44 पर बसे छोटे से शहर शाहाबाद मारकंडा को बेहतरीन हॉकी प्रतिभा पैदा करने का एक बड़ा केंद्र बना दिया। वह 1982 में हरियाणा खेल विभाग में कोच के तौर पर शाहाबाद मारकंडा आए थे और उन्होंने वहां चार साल तक सेवा दी। अधिकारियों ने बताया कि 1993 में वह इस शहर में वापस लौटे और उन्होंने इस हॉकी नर्सरी को सबसे ज्यादा हॉकी प्रतिभा पैदा करने वाले केंद्र में से एक बना दिया।

भैणी साहिब की नामधारी हॉकी टीम से अपने पेशेवर करियर की शुरुआत करने वाले और अस्सी के दशक की शुरुआत में बेंगलुरु के राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनआईएस) से हॉकी कोचिंग में डिप्लोमा हासिल करने वाले सिंह ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए इस खेल में 80 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और आठ भारतीय कप्तानों को तराशा। जैसे-जैसे यह अकादमी इस खेल के लिए एक प्रमुख केंद्र बनती गई, सिंह ने हॉकी की प्रतिस्पर्धी व्यवस्था में कई अहम भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने 1993 में जूनियर पुरुष टीम के मुख्य कोच और चयनकर्ता के तौर पर काम किया। फिर वह 1996 में मद्रास में चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाली भारतीय टीम के सहायक कोच रहे और बाद में सीनियर राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच बने।

अधिकारियों ने बताया कि 2001 से 2004 तक उन्होंने भारतीय पुरुष टीम के कोच के तौर पर काम किया और 2004 के एशिया कप में टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। चार दशकों से भी ज्यादा समय से सिंह सुर्खियों से दूर रहकर काम करते रहे, उन्होंने भारतीय हॉकी की संस्थागत नींव को मजबूत करने में योगदान दिया। सिंह ने फतेहगढ़ साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब विश्व विश्वविद्यालय और अमृतसर के खालसा कॉलेज में हॉकी कोच के तौर पर सेवा दी। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा 2020 तोक्यो, 2024 पेरिस और 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक खेलों के लिए एक ‘रोडमैप’ तैयार करने हेतु गठित ओलंपिक कार्य बल के मुख्य सदस्य के तौर पर भी काम किया है।

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