सरकारी नोटिस के बाद जागा Meta, कहा- CSAM Content पर हमारी Zero Tolerance Policy

मेटा कंपनी ने भारत सरकार के सख्त नोटिस पर अपनी सफाई दी है। कंपनी के प्रवक्ता ने एनडीटीवी से कहा कि बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े कंटेंट (CSAM) को लेकर उनकी नीति जीरो-टॉलरेंस की है, चाहे वह कोई विज्ञापन हो या फिर कोई सामान्य पोस्ट।मेटा ने बताया कि वे इस तरह के गलत कंटेंट को खुद ढूंढने और अपराधियों को पकड़ने के लिए उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। कंपनी के मुताबिक, उनके 3.5 अरब यूजर्स के बीच छिपकर काम करने वाले अपराधियों को पकड़ने के लिए उनकी विशेषज्ञ टीमें लगातार काम कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट पर भारत सरकार का कड़ा रुख, Instagram-Meta को भेजा नोटिससरकार की कानूनी कार्रवाई की चेतावनीइससे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंस्टाग्राम को ऐसे सभी कंटेंट और विज्ञापनों को तुरंत हटाने का आदेश दिया था। सरकार ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि मेटा ने 7 दिनों के भीतर इस पर पूरी जानकारी के साथ जवाब नहीं दिया, तो उसके खिलाफ आईटी एक्ट और पोक्सो एक्ट, 2012 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। सरकार ने कंपनी के उस एल्गोरिदम को भी तुरंत सुधारने को कहा है जो इस तरह के कंटेंट को बढ़ावा दे रहा था।बीबीसी की रिपोर्ट से हुआ बड़ा खुलासायह पूरा मामला एक बीबीसी रिपोर्ट के बाद सामने आया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि इंस्टाग्राम और फेसबुक के विज्ञापन नियमों के खिलाफ जाकर बच्चों के शोषण वाले वीडियो को बढ़ावा दिया जा रहा था। जांच में पाया गया कि इंस्टाग्राम पर बकायदा पैसे देकर रेप वीडियो और चाइल्ड वीडियो जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन विज्ञापनों पर क्लिक करते ही यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेज दिया जाता था, जहां ऐसा गलत और गैर-कानूनी कंटेंट बेचा जा रहा था। इसे भी पढ़ें: UP में आम की दावत, सियासत पर चर्चा! CM Yogi से मिलकर Nitin Nabin ने सेट किया Mission 2027 का टारगेटकमाई वाले विज्ञापनों पर मेटा की होगी जवाबदेहीसरकार ने मेटा से कड़े सवाल पूछे हैं कि आखिर इस तरह के विज्ञापनों को मंजूरी कैसे मिली और भविष्य में इसे रोकने के लिए कंपनी क्या कदम उठा रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मेटा इस मामले में यह कहकर अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती कि यह कंटेंट किसी तीसरे पक्ष  का है। चूंकि इन विज्ञापनों को दिखाने के बदले मेटा कंपनी को मोटी कमाई होती है, इसलिए अगर ये आरोप सच साबित होते हैं, तो इन विज्ञापनों के लिए मेटा को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

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Jul 6, 2026 - 12:58
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सरकारी नोटिस के बाद जागा Meta, कहा- CSAM Content पर हमारी Zero Tolerance Policy
मेटा कंपनी ने भारत सरकार के सख्त नोटिस पर अपनी सफाई दी है। कंपनी के प्रवक्ता ने एनडीटीवी से कहा कि बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े कंटेंट (CSAM) को लेकर उनकी नीति जीरो-टॉलरेंस की है, चाहे वह कोई विज्ञापन हो या फिर कोई सामान्य पोस्ट।

मेटा ने बताया कि वे इस तरह के गलत कंटेंट को खुद ढूंढने और अपराधियों को पकड़ने के लिए उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। कंपनी के मुताबिक, उनके 3.5 अरब यूजर्स के बीच छिपकर काम करने वाले अपराधियों को पकड़ने के लिए उनकी विशेषज्ञ टीमें लगातार काम कर रही हैं।
 

इसे भी पढ़ें: बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट पर भारत सरकार का कड़ा रुख, Instagram-Meta को भेजा नोटिस


सरकार की कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंस्टाग्राम को ऐसे सभी कंटेंट और विज्ञापनों को तुरंत हटाने का आदेश दिया था। सरकार ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि मेटा ने 7 दिनों के भीतर इस पर पूरी जानकारी के साथ जवाब नहीं दिया, तो उसके खिलाफ आईटी एक्ट और पोक्सो एक्ट, 2012 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। सरकार ने कंपनी के उस एल्गोरिदम को भी तुरंत सुधारने को कहा है जो इस तरह के कंटेंट को बढ़ावा दे रहा था।

बीबीसी की रिपोर्ट से हुआ बड़ा खुलासा

यह पूरा मामला एक बीबीसी रिपोर्ट के बाद सामने आया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि इंस्टाग्राम और फेसबुक के विज्ञापन नियमों के खिलाफ जाकर बच्चों के शोषण वाले वीडियो को बढ़ावा दिया जा रहा था। जांच में पाया गया कि इंस्टाग्राम पर बकायदा पैसे देकर रेप वीडियो और चाइल्ड वीडियो जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन विज्ञापनों पर क्लिक करते ही यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेज दिया जाता था, जहां ऐसा गलत और गैर-कानूनी कंटेंट बेचा जा रहा था।
 

इसे भी पढ़ें: UP में आम की दावत, सियासत पर चर्चा! CM Yogi से मिलकर Nitin Nabin ने सेट किया Mission 2027 का टारगेट


कमाई वाले विज्ञापनों पर मेटा की होगी जवाबदेही

सरकार ने मेटा से कड़े सवाल पूछे हैं कि आखिर इस तरह के विज्ञापनों को मंजूरी कैसे मिली और भविष्य में इसे रोकने के लिए कंपनी क्या कदम उठा रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मेटा इस मामले में यह कहकर अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती कि यह कंटेंट किसी तीसरे पक्ष  का है। चूंकि इन विज्ञापनों को दिखाने के बदले मेटा कंपनी को मोटी कमाई होती है, इसलिए अगर ये आरोप सच साबित होते हैं, तो इन विज्ञापनों के लिए मेटा को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

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