म्याँमार: एक ‘अभूतपूर्व’ मानवीय संकट, सहायता धनराशि की कटौती ने बढ़ाई मुश्किलें
वर्ष 2025 में, म्याँमार अनेक मोर्चों पर संकट से जूझता रहा. हिंसक टकराव, भूकम्प और बाढ़ के कारण परिवार बार-बार विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए. 1.2 करोड़ लोग भूखे हैं. बारूदी सुरंगों की वजह से हर दिन औसतन 2 लोगों की जान जा रही है. म्याँमार में यूएन की मानवतावादी समन्वयक ग्वेन लुईस का कहना है कि सहायता धनराशि में कटौती की वजह से हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गए हैं और इसके मद्देनज़र, 2026 में बड़े स्तर पर समर्थन मुहैया कराए जाने की आवश्यकता है.
वर्ष 2025 में, म्याँमार अनेक मोर्चों पर संकट से जूझता रहा. हिंसक टकराव, भूकम्प और बाढ़ के कारण परिवार बार-बार विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए. 1.2 करोड़ लोग भूखे हैं. बारूदी सुरंगों की वजह से हर दिन औसतन 2 लोगों की जान जा रही है. म्याँमार में यूएन की मानवतावादी समन्वयक ग्वेन लुईस का कहना है कि सहायता धनराशि में कटौती की वजह से हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गए हैं और इसके मद्देनज़र, 2026 में बड़े स्तर पर समर्थन मुहैया कराए जाने की आवश्यकता है.