ग़ाज़ा के पत्रकार: हालात के चश्मदीद गवाह और त्रासदी के शिकार

"मैं युद्ध में अपनी एक टांग खोने के बाद फ़ोटो पत्रकारिता में केवल काम के लिए नहीं लौटा, बल्कि इसलिए भी क्योंकि मुझे बचपन से फ़ोटोग्राफ़ी से प्यार है", ये शब्द हैं एक फ़लस्तीनी पत्रकार समी शहादा के, जिन्हें अपनी एक टांग, ग़ाज़ा में अप्रैल 2024 में नुसीरात में हुए एक हमले में घायल होने के बाद गँवानी पड़ी थी. उनकी स्थिति युद्धग्रस्त क्षेत्रों में पत्रकारों के लिए उत्पन्न ख़तरों की एक बानगी पेश करती है.

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May 3, 2025 - 03:29
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ग़ाज़ा के पत्रकार: हालात के चश्मदीद गवाह और त्रासदी के शिकार
"मैं युद्ध में अपनी एक टांग खोने के बाद फ़ोटो पत्रकारिता में केवल काम के लिए नहीं लौटा, बल्कि इसलिए भी क्योंकि मुझे बचपन से फ़ोटोग्राफ़ी से प्यार है", ये शब्द हैं एक फ़लस्तीनी पत्रकार समी शहादा के, जिन्हें अपनी एक टांग, ग़ाज़ा में अप्रैल 2024 में नुसीरात में हुए एक हमले में घायल होने के बाद गँवानी पड़ी थी. उनकी स्थिति युद्धग्रस्त क्षेत्रों में पत्रकारों के लिए उत्पन्न ख़तरों की एक बानगी पेश करती है.

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