ईरान का पवित्र माना जाने वाला शहर मशहद जिसे मशहद मुकद्दस कहा जाता है। इसी शहर में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामने सुपुरदे खाक किए गए। 9 जुलाई को दिन भर मशहद शहर में यह नजारा था। शदीद गर्मी के बावजूद पैर रखने की जगह नहीं थी। सड़कों पर बस लोग ही लोग। लेकिन रात को मशहद में ऐसा कुछ हुआ जो आपको चौंका देगा। यह शहर मशहद में गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात है। जो लोग खामनेई की तस्वीरें और लाल परचम लेकर उन्हें श्रद्धांजलि देने ईरान भर से आए थे। वही युवा, बुजुर्ग और महिलाएं भी रात में उन्हीं सड़कों पर कूड़ा चुन रहे थे। लोगों ने उसी रात मशहद की सड़कों पर काम शुरू कर दिया। क्योंकि दिन में गर्मी बहुत थी और लाखों में जनता थी। ऐसे में लोगों ने प्लास्टिक बोतलों से खूब पानी पिया। लेकिन रात में वही लोग बोतलों का कचरा, खाने-पीने के रैपर और दीगर कूड़ा साफ कर रहे थे। बिना यह इंतजार किए कि मशहद म्यनिसिपल कॉरपोरेशन का अमला आएगा और साफ सफाई को अंजाम देगा।
मशहद शहर में खामनेई के चाहने वालों में सफाई को लेकर एक अलग ही जुनून है और वो अपने देश को बहुत प्यार करते हैं। साफ सफाई ईमान का हिस्सा है। आपने सुना होगा इस तरह की हदीस है। लोगों ने पानी बहुत ज्यादा पानी भी गर्मी के हवाले से। लेकिन आप देखेंगे यहां यहीं पे लोग वेट नहीं कर रहे हैं कि मुंसिपल्टी वाली आए और आकर के रास्ते को क्लीन करें और खुद से ही कर दिया है इसको। एक्सपर्ट कहते हैं कि ईरानी कौम अपने मुल्क के प्रति कट्टर राष्ट्रवाद को जीती है जिसमें देश के लिए कुछ भी कर गुजरने का जुनून है जज्बा है। यही वजह है कि ईरान 40 दिनों की जंग में मुस्तैदी से डटा रहा। जबकि उसके दुश्मन अमेरिका, इसराइल और पर्दे के पीछे अरब देशों ने उसे खत्म करने, उसके कल्चर को नाबूद करने, इस्लामिक रेवोल्यूशन को तबाह करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी थी।
चाहे 40 दिनों तक रमजान के महीने में भी दिन और रात सड़कों पर लोगों की भीड़ रही हो या फिर इमाम खामने के जनाजे में दिखी आवाम की ताकत या फिर मौका पड़ने पर खुद ही सफाई का मोर्चा संभाल लेना ईरानी जनता ने दुनिया को यह बता दिया है कि वो जरा हटकर है और अपने देश के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार है। खासतौर से जो मशहद शहर है ईरान का वो बहुत पवित्र माना जाता है। इमाम आयतुल्लाह अली खामनई के दौर में ही मशहद को उसका यह रूप दिया गया। उसमें बहुत सारे ऐसे काम हुए जो जायरीन के लिए दुनिया भर से आने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए बहुत सहूलियत की बात है। इमाम आयतुल्लाह अली खामनी खुद मशद जाते थे और वहां पर इमाम रजा के रोजे के दीदार करते थे। वो खुद वहां मौजूद रहते थे।