एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा, नहीं मांगेंगे अगला कार्यकाल

एन चंद्रशेखरन ने बुधवार को टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया। कंपनी की सालाना आम बैठक 18 अगस्त को होनी है। एक बयान में चंद्रशेखरन ने कहा कि मैंने टाटा ग्रुप में अपने प्रोफेशनल जीवन के 40 साल पूरे कर लिए हैं। मैं इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने के बेहद संतोषजनक अवसर के लिए आभारी हूं। चंद्रशेखरन ने अपने इस्तीफ़े के पत्र में कहा कि मैंने टाटा संस बोर्ड को बता दिया है कि 20 फरवरी, 2027 को मेरा कार्यकाल खत्म होने पर मैं दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करूंगा। मैंने बोर्ड से कहा है कि वे उत्तराधिकार के बारे में जल्द फ़ैसला लें ताकि कामकाज का सुचारू रूप से हस्तांतरण हो सके। इसे भी पढ़ें: Mohan Yadav ने Rahul Gandhi पर बोला हमला, संसद की कार्यवाही बाधित करने का लगाया आरोपचंद्रशेखरन 2017 से टाटा संस की कमान संभाले हुए हैं। उनके जाने से भारत के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप्स में से एक, टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी में लीडरशिप में बदलाव होगा। टाटा संस 30 से ज़्यादा कंपनियों को संभालती है, जिनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़, टाटा मोटर्स और एयर इंडिया शामिल हैं। चंद्रशेखरन के इस्तीफ़े के बाद टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई; TCS, टाटा स्टील और टाटा पावर के शेयरों में भी गिरावट देखी गई।चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 तक चलेगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि कार्यकाल खत्म होने के बाद वे दोबारा नियुक्ति नहीं चाहेंगे। उन्होंने कहा कि टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को खत्म हो रहा है। उनका इस्तीफ़ा शेयरहोल्डर्स के साथ तनाव और चंद्रशेखरन तथा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के बीच मतभेदों के माहौल में आया है। फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल पूरा करने के बारे में बात करते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से मेरे अगले कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने का फ़ैसला किया था और इसकी सिफ़ारिश की थी। इसे भी पढ़ें: Chest Pain की वजह बनी वो 'बड़ी ईंट', ममता बनर्जी ने काफिले पर हमले को बताया सोची-समझी साजिशयह घटनाक्रम 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की सालाना आम बैठक से कुछ दिन पहले हुआ है, जिसमें शेयरहोल्डर डायरेक्टर के तौर पर चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर वोट करेंगे। चंद्रशेखरन के पद पर बने रहने का मुद्दा पहले से ही ग्रुप के अंदर तनाव की वजह बना हुआ था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा द्वारा चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का विरोध किए जाने के बाद टाटा संस ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने का फैसला टाल दिया था।

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Aug 12, 2026 - 17:51
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एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा, नहीं मांगेंगे अगला कार्यकाल
एन चंद्रशेखरन ने बुधवार को टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया। कंपनी की सालाना आम बैठक 18 अगस्त को होनी है। एक बयान में चंद्रशेखरन ने कहा कि मैंने टाटा ग्रुप में अपने प्रोफेशनल जीवन के 40 साल पूरे कर लिए हैं। मैं इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने के बेहद संतोषजनक अवसर के लिए आभारी हूं। चंद्रशेखरन ने अपने इस्तीफ़े के पत्र में कहा कि मैंने टाटा संस बोर्ड को बता दिया है कि 20 फरवरी, 2027 को मेरा कार्यकाल खत्म होने पर मैं दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करूंगा। मैंने बोर्ड से कहा है कि वे उत्तराधिकार के बारे में जल्द फ़ैसला लें ताकि कामकाज का सुचारू रूप से हस्तांतरण हो सके।
 

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चंद्रशेखरन 2017 से टाटा संस की कमान संभाले हुए हैं। उनके जाने से भारत के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप्स में से एक, टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी में लीडरशिप में बदलाव होगा। टाटा संस 30 से ज़्यादा कंपनियों को संभालती है, जिनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़, टाटा मोटर्स और एयर इंडिया शामिल हैं। चंद्रशेखरन के इस्तीफ़े के बाद टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई; TCS, टाटा स्टील और टाटा पावर के शेयरों में भी गिरावट देखी गई।

चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 तक चलेगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि कार्यकाल खत्म होने के बाद वे दोबारा नियुक्ति नहीं चाहेंगे। उन्होंने कहा कि टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को खत्म हो रहा है। उनका इस्तीफ़ा शेयरहोल्डर्स के साथ तनाव और चंद्रशेखरन तथा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के बीच मतभेदों के माहौल में आया है। फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल पूरा करने के बारे में बात करते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से मेरे अगले कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने का फ़ैसला किया था और इसकी सिफ़ारिश की थी।
 

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यह घटनाक्रम 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की सालाना आम बैठक से कुछ दिन पहले हुआ है, जिसमें शेयरहोल्डर डायरेक्टर के तौर पर चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर वोट करेंगे। चंद्रशेखरन के पद पर बने रहने का मुद्दा पहले से ही ग्रुप के अंदर तनाव की वजह बना हुआ था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा द्वारा चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का विरोध किए जाने के बाद टाटा संस ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने का फैसला टाल दिया था।

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