इस मुस्लिम दोस्त ने भारत को दिया बड़ा धोखा, चीन के साथ बढ़ा रहा अपनी नजदीकियां

मिस्र में चल रही ईगल्स ऑफ सिविलाइजेशन एक्सरसाइज से आई तस्वीरों ने नई दिल्ली से लेकर पेरिस तक हलचल तेज कर दी है। पहली बार चीन का भारी भरकम J6 फाइटर जेट सीधे राफेल के साथ कॉम्बैट ड्रिल कर रहा है। पिछले साल भारत पाकिस्तान संघर्ष के दौरान भी चीनी J10 फाइटर जेट की भूमिका ने खूब ध्यान खींचा। अब सवाल यह है कि क्या इस एक्सरसाइज से चीन को राफेल की कमियां और खूबियों की वो दुर्लभ जानकारी मिल जाएगी जिसका इस्तेमाल वह भविष्य में भारत के खिलाफ कर सकता है। मिस्र की सेना की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक चीनी वायुसेना पीएलएफ यानी पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स का जे6 और मिस्र वायुसेना का दशॉल ट्रैफेल एक साथ कई दिवसीय हवाई अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। एवीआईसी शेनयांग द्वारा निर्मित एक ट्विन इंजन टू सीटर 4.5 जनरेशन का भारी फाइटर जेट है जिसे रूसी एसयू 30 के डिजाइन पर तैयार किया गया है। इसे भी पढ़ें: सामने बैठे थे जयशंकर, तभी पुतिन ने मोदी के लिए क्या कहा? सब चौंकेचीन ने साल 2025 में इस अभ्यास के लिए अपने हल्के जेट इन जेट भेजे थे। लेकिन इस बार अपने सबसे भारी और उन्नत J16 को भेजकर उसने यह साफ किया कि वह पश्चिमी प्लेटफॉर्म्स खासकर राफेल के रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम को करीब से आंकना चाहता है। भारतीय वायुसेना का सबसे मुख्य और घातक [संगीत] हथियार राफेल ही है। तकनीकी तौर पर राफेल अपने अत्याधुनिक सेंसर, स्पेक्ट्रोइनिक वारफेयर स्वीट और लंबी दूरी की मेोर मिसाइल के कारण दुनिया में सबसे घातक माना जाता है। दूसरी ओर चीनी J16 भारी पेलोड क्षमता और बड़े रडार में मजबूत है। एक्सपर्ट्स को डर है कि इस अभ्यास के दौरान चीनी पायलटों और रडार ऑपरेटरों को राफेल के रडार सिग्नेचर, पैतरेबाजी और कॉम्बैट रेंज का दुर्लभ डाटा मिल सकता है। यदि यह डाटा चीनी वायुसेना के पास पहुंचता है तो वे एलएससी पर भारतीय राफेल के खिलाफ अपनी रणनीति को और सटीक बना सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Russia के सबसे अजीब इलाके को बचाएगा भारत, पुतिन-जयशंकर की मुलाकात पर बड़ा खुलासा!यह घटनाक्रम इसलिए भी संवेदनशील हो जाता है क्योंकि मई 2025 में भारत के खिलाफ संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने बड़े पैमाने पर चीन निर्मित जेसी जेट का इस्तेमाल किया। हालांकि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के लगभग एक दर्जन विमानों जिनमें F16 और JF7 शामिल उन्हें ढेर कर दिया था। वहीं दूसरी ओर मिस्र भारत का गहरा मित्र होने के साथ-साथ अमेरिका का रणनीतिक साझेदार भी है जो F16 जेट और अपाचे हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल करता है। मिस्र का चीन के साथ यह अभ्यास बीजिंग को पश्चिमी और फ्रांसीसी तकनीक की गहराई समझने का वो मौका दे रहा है जो उसे अपनी सीमा पर कभी नहीं मिल सकता। मिस्री में राफेल और J16 का एक साथ उड़ान भरना चीन के लिए भले ही जैकपॉट साबित हो रहा हो लेकिन भारतीय वायुसेना के लिए अपनी युद्ध नीतियों में बदलाव करने की एक नई चुनौती बन सकता है।

PNSPNS
Aug 26, 2026 - 04:29
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इस मुस्लिम दोस्त ने भारत को दिया बड़ा धोखा, चीन के साथ बढ़ा रहा अपनी नजदीकियां
मिस्र में चल रही ईगल्स ऑफ सिविलाइजेशन एक्सरसाइज से आई तस्वीरों ने नई दिल्ली से लेकर पेरिस तक हलचल तेज कर दी है। पहली बार चीन का भारी भरकम J6 फाइटर जेट सीधे राफेल के साथ कॉम्बैट ड्रिल कर रहा है। पिछले साल भारत पाकिस्तान संघर्ष के दौरान भी चीनी J10 फाइटर जेट की भूमिका ने खूब ध्यान खींचा। अब सवाल यह है कि क्या इस एक्सरसाइज से चीन को राफेल की कमियां और खूबियों की वो दुर्लभ जानकारी मिल जाएगी जिसका इस्तेमाल वह भविष्य में भारत के खिलाफ कर सकता है। मिस्र की सेना की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक चीनी वायुसेना पीएलएफ यानी पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स का जे6 और मिस्र वायुसेना का दशॉल ट्रैफेल एक साथ कई दिवसीय हवाई अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। एवीआईसी शेनयांग द्वारा निर्मित एक ट्विन इंजन टू सीटर 4.5 जनरेशन का भारी फाइटर जेट है जिसे रूसी एसयू 30 के डिजाइन पर तैयार किया गया है। 

इसे भी पढ़ें: सामने बैठे थे जयशंकर, तभी पुतिन ने मोदी के लिए क्या कहा? सब चौंके

चीन ने साल 2025 में इस अभ्यास के लिए अपने हल्के जेट इन जेट भेजे थे। लेकिन इस बार अपने सबसे भारी और उन्नत J16 को भेजकर उसने यह साफ किया कि वह पश्चिमी प्लेटफॉर्म्स खासकर राफेल के रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम को करीब से आंकना चाहता है। भारतीय वायुसेना का सबसे मुख्य और घातक [संगीत] हथियार राफेल ही है। तकनीकी तौर पर राफेल अपने अत्याधुनिक सेंसर, स्पेक्ट्रोइनिक वारफेयर स्वीट और लंबी दूरी की मेोर मिसाइल के कारण दुनिया में सबसे घातक माना जाता है। दूसरी ओर चीनी J16 भारी पेलोड क्षमता और बड़े रडार में मजबूत है। एक्सपर्ट्स को डर है कि इस अभ्यास के दौरान चीनी पायलटों और रडार ऑपरेटरों को राफेल के रडार सिग्नेचर, पैतरेबाजी और कॉम्बैट रेंज का दुर्लभ डाटा मिल सकता है। यदि यह डाटा चीनी वायुसेना के पास पहुंचता है तो वे एलएससी पर भारतीय राफेल के खिलाफ अपनी रणनीति को और सटीक बना सकते हैं। 

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यह घटनाक्रम इसलिए भी संवेदनशील हो जाता है क्योंकि मई 2025 में भारत के खिलाफ संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने बड़े पैमाने पर चीन निर्मित जेसी जेट का इस्तेमाल किया। हालांकि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के लगभग एक दर्जन विमानों जिनमें F16 और JF7 शामिल उन्हें ढेर कर दिया था। वहीं दूसरी ओर मिस्र भारत का गहरा मित्र होने के साथ-साथ अमेरिका का रणनीतिक साझेदार भी है जो F16 जेट और अपाचे हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल करता है। मिस्र का चीन के साथ यह अभ्यास बीजिंग को पश्चिमी और फ्रांसीसी तकनीक की गहराई समझने का वो मौका दे रहा है जो उसे अपनी सीमा पर कभी नहीं मिल सकता। मिस्री में राफेल और J16 का एक साथ उड़ान भरना चीन के लिए भले ही जैकपॉट साबित हो रहा हो लेकिन भारतीय वायुसेना के लिए अपनी युद्ध नीतियों में बदलाव करने की एक नई चुनौती बन सकता है।

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