महाराष्ट्र की राजनीति के लिए 14 अगस्त का दिन बेहद खास है। आज ही के दिन महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख का निधन हो गया था। वह महाराष्ट्र कांग्रेस के कद्दावर नेता थे। हालांकि उनका जीवन साधारण नहीं था। क्योंकि उन्होंने एक साधारण से लातूर जिले से राजनीति की शुरूआत की और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने तक का सफर तय किया था। इस दौरान उनके सामने कई मुश्किलें भी आईं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर विलासराव देशमुख के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
राजनीतिक सफर
साल 1974 में अपने गांव से विलासराव देशमुख ने अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत की थी। विलासराव देशमुख अपने गांव से पहले सदस्य चुने गए। फिर साल 1974 से लेकर 1979 तक वह सरपंच रहे। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 1980 में वह पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा की सीढ़ी चढ़ें। विधायक बनने के बाद साल 1985 से 1990 तक वह राज्यमंत्री के तौर पर उभरे। लेकिन साल 1995 के विधानसभा चुनाव में विलासराव देशमुख को हार का सामना करना पड़ा।
बता दें कि इस दौरान देश में राममंदिर निर्माण के कारण हिंदुत्व की लहर चल रही थी। जिस कारण विलासराव देशमुख 35 हजार वोटों से हार गए थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और वह मदद के लिए सीधे शिवसेना में बालासाहेब ठाकरे के पास पहुंचे। बालासाहेब ठाकरे की मदद से विलासराव देशमुख ने विधान परिषद का चुनाव लड़ा और सीधे मातेश्वरी पहुंचे। वहीं उनकी महाराष्ट्र में पकड़ देखते हुए बालासाहेब भी उनको रोक नहीं पाए और उनका साथ दिया।
विलासराव देशमुख ने कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ विधान परिषद का चुनाव लड़ा और इसमें भी उनको हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद उनके मुख्यमंत्री बनने के सभी रास्ते बंद होते नजर आ रहे थे। साल 1999 में भाजपा और शिवसेना गठबंधन सरकार में थी। शिवसेना और भाजपा को रोकने के लिए एनसीपी और कांग्रेस ने मिलकर लड़ाई लड़ी। ऐसे में विलासराव देशमुख ने एक बार फिर साल 1999 में कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की।
महाराष्ट्र सीएम
इस जीत के बाद 18 अक्तूबर 1999 को विलासराव देशमुख महाराष्ट्र के मुख्य बनें। वहीं साल 2004 में दोबारा फिर उन्होंने महाराष्ट्र के सीएम के तौर पर अपनी पारी शुरू की। लेकिन यह पारी अधिक दिनों तक नहीं चल पाई। असल, में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकवादी हमले के कारण विलासराव देशमुख को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा।
महाराष्ट्र राजनीति पर विलासराव देशमुख की पकड़ को देखते हुए कांग्रेस ने उनको राज्यसभा सदस्य बनाया। फिर 28 मई 2009 को वह केंद्र सरकार में उद्योग मंत्री बने। जनवरी 2011 से जुलाई 2011 तक वह केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रहे और फिर उनको विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री बनाया गया।
मृत्यु
वहीं लिवर और किडनी की बीमारी के चलते चेन्नई में 14 अगस्त 2012 को विलासराव देशमुख का निधन हो गया था।