Vilasrao Deshmukh Death Anniversary: जमीनी राजनीति से Maharashtra CM की कुर्सी तक का अद्भुत Journey

आज ही के दिन यानी की 14 अगस्त को विलासराव देशमुख का निधन हो गया था। वह महाराष्ट्र के दो बार मुख्यमंत्री बने थे। वह राजनीति के मंझे हुए राजनेता थे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत पंचायत चुनाव से की थी। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर विलासराव देशमुख के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और परिवारमहाराष्ट्र के लातूर जिले के बाभालगांव में 26 मई 1945 विलासराव देशमुख का जन्म हुआ था। उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से विज्ञान और ऑर्ट्स दोनों में ग्रेजुएशन किया था। उन्होंने पुणे के इंडियन लॉ सोसाइटी लॉ कॉलेज से कानूनी शिक्षा ली। उन्होंने अपने सियासी सफर की शुरूआत पंचायत चुनावों से की थी।इसे भी पढ़ें: Bhikaji Cama Death Anniversary: वो वीरांगना जिसने Germany में लहराया भारत का तिरंगा और British Rule को ललकाराराजनीतिक सफरउन्होंने अपने सियासी सफर की शुरूआत  साल 1974 से अपने पैतृक गांव से की थी। वह साल 1974 से लेकर 1979 तक सरपंच की भूमिका निभाई। फिर साल 1980 में वह पहली बार महाराष्ट्र की विधानसभा की सीढ़ियां चढ़ें। विधायक बनने से पहले विलासराव देशमुख लातूर तालुका पंचायत समिति का सभापति, उस्मानाबाद जिला परिषद सदस्य, उस्मानाबाद युवक कांग्रेस अध्यक्ष और उस्मानाबाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में अपनी अच्छी-खासी पहचान बना चुके थे।फिर साल 1985 से लेकर 1990 में वह राज्यमंत्री के रूप में उभरे। लेकिन साल 1995 के विधानसभा चुनाव में उनको हार का सामना करना पड़ा। वहीं साल 1999 में भाजपा और शिवसेना गठबंधन की सरकार में थी। वहीं भाजपा और शिवसेना को रोकने के लिए एनसीपी और कांग्रेस ने मिलकर लड़ाई लड़ी। इसमें विलासराव को उम्मीद दिखी। उन्होंने साल 1999 में कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।महाराष्ट्र के सीएमइसके बाद 18 अक्तूबर 1999 को विलासराव देशमुख महाराष्ट्र के सीएम बने। फिर साल 2004 में एक बार फिर वापसी करते हुए वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। लेकिन दूसरी पारी ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाई।  दरअसल, 26 नवंबर 2008 को आतंकवादी हमला हुआ। जिसके बाद देशमुख को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।देशमुख साल 2009 में लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन कुछ कारणों से वह लोकसभा चुनाव नहीं लड़ सके। वहीं बाद में कांग्रेस ने विलासराव देशमुख को राज्यसभा सदस्य बनाया और 28 मई 2009 को केंद्र सरकार में उद्योग मंत्री बने। फिर जनवरी 2011 से जुलाई 2011 तक केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रहे। फिर जुलाई 2011 में उनको विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री बनाया गया।मृत्युवहीं 14 अगस्त 2012 को लिवर और किडनी की बीमारी के कारण विलासराव देशमुख का निधन हो गया था।

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Aug 16, 2026 - 10:54
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Vilasrao Deshmukh Death Anniversary: जमीनी राजनीति से Maharashtra CM की कुर्सी तक का अद्भुत Journey
आज ही के दिन यानी की 14 अगस्त को विलासराव देशमुख का निधन हो गया था। वह महाराष्ट्र के दो बार मुख्यमंत्री बने थे। वह राजनीति के मंझे हुए राजनेता थे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत पंचायत चुनाव से की थी। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर विलासराव देशमुख के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

महाराष्ट्र के लातूर जिले के बाभालगांव में 26 मई 1945 विलासराव देशमुख का जन्म हुआ था। उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से विज्ञान और ऑर्ट्स दोनों में ग्रेजुएशन किया था। उन्होंने पुणे के इंडियन लॉ सोसाइटी लॉ कॉलेज से कानूनी शिक्षा ली। उन्होंने अपने सियासी सफर की शुरूआत पंचायत चुनावों से की थी।

इसे भी पढ़ें: Bhikaji Cama Death Anniversary: वो वीरांगना जिसने Germany में लहराया भारत का तिरंगा और British Rule को ललकारा

राजनीतिक सफर

उन्होंने अपने सियासी सफर की शुरूआत  साल 1974 से अपने पैतृक गांव से की थी। वह साल 1974 से लेकर 1979 तक सरपंच की भूमिका निभाई। फिर साल 1980 में वह पहली बार महाराष्ट्र की विधानसभा की सीढ़ियां चढ़ें। विधायक बनने से पहले विलासराव देशमुख लातूर तालुका पंचायत समिति का सभापति, उस्मानाबाद जिला परिषद सदस्य, उस्मानाबाद युवक कांग्रेस अध्यक्ष और उस्मानाबाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में अपनी अच्छी-खासी पहचान बना चुके थे।

फिर साल 1985 से लेकर 1990 में वह राज्यमंत्री के रूप में उभरे। लेकिन साल 1995 के विधानसभा चुनाव में उनको हार का सामना करना पड़ा। वहीं साल 1999 में भाजपा और शिवसेना गठबंधन की सरकार में थी। वहीं भाजपा और शिवसेना को रोकने के लिए एनसीपी और कांग्रेस ने मिलकर लड़ाई लड़ी। इसमें विलासराव को उम्मीद दिखी। उन्होंने साल 1999 में कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

महाराष्ट्र के सीएम

इसके बाद 18 अक्तूबर 1999 को विलासराव देशमुख महाराष्ट्र के सीएम बने। फिर साल 2004 में एक बार फिर वापसी करते हुए वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। लेकिन दूसरी पारी ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाई।  दरअसल, 26 नवंबर 2008 को आतंकवादी हमला हुआ। जिसके बाद देशमुख को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

देशमुख साल 2009 में लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन कुछ कारणों से वह लोकसभा चुनाव नहीं लड़ सके। वहीं बाद में कांग्रेस ने विलासराव देशमुख को राज्यसभा सदस्य बनाया और 28 मई 2009 को केंद्र सरकार में उद्योग मंत्री बने। फिर जनवरी 2011 से जुलाई 2011 तक केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रहे। फिर जुलाई 2011 में उनको विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री बनाया गया।

मृत्यु

वहीं 14 अगस्त 2012 को लिवर और किडनी की बीमारी के कारण विलासराव देशमुख का निधन हो गया था।

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