विष्णु नागर का व्यंग्यः छप्पन इंच का छोटा बंदर कहो या कायर, जब तक देश की छाती मजबूत है, उस पर कूदते रहेंगे!

अमित शाह के इस्तीफे का सवाल ही नहीं। हम मर जाएंगे तो भी पद नहीं छोड़ेंगे। जब तक देश की छाती मजबूत है, हम उस पर कूदते रहेंगे।छाती को समतल करने में अपना विनम्र योगदान देते रहेंगे! उसकी एक-एक हड्डी को कुचल कर रहेंगे!

PNSPNS
Aug 16, 2026 - 10:54
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विष्णु नागर का व्यंग्यः छप्पन इंच का छोटा बंदर कहो या कायर, जब तक देश की छाती मजबूत है, उस पर कूदते रहेंगे!

जिस प्रकार राहुल गांधी को प्रधानमंत्री कार्यालय में क्या चल रहा है, इसकी खबर मिल जाती है।इसी तरह मुझे भी स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री क्या भाषण देने वाले हैं, इसका ड्राफ्ट मिल गया था। मेरे सुझाव पर ही इसमें तरमीम की गई है। मैंने कहा कि भाषण रोने से क्यों शुरू करते हो, तथाकथित बहादुरी से शुरू करो। और जबरदस्त फिंकवाओ उनसे, जब तक श्रोता उबासी न लेने लगें और कुछ लोग टीवी न फोड़ दें। बाकी सभी सज्जन टीवी बंद कर दें। और कसम खाएं कि अब कभी इनका भाषण सुनने के लिए टीवी नहीं खोलेंगे। और पछतावे में एक दिन का उपवास रखें।

बिना बड़ी-बड़ी फेंके यह प्रधानमंत्री का भाषण नहीं लगेगा। और यह भाषण तो दस मिनट का भी नहीं है। इसमें झूठ की मिकदार काफी बढ़ाओ वरना कौन सुनेगा इतना संक्षिप्त भाषण! लोग लालकिले आना बंद कर देंगे। उनका ब्रांड वैसे ही खतरे में है। मोदी जी विश्वभर में बदनाम हो जाएंगे। ट्रंप और नेतन्याहू भी उनकी कद्र नहीं करेंगे। उनका डंका वैसे ही नहीं बज रहा है, डंका शब्द ही ब्रह्मांड से गायब हो जाएगा।

उनका ओरिजिनल भाषण यह था। यह बात मैं मोदी जी की कसम खाकर कह सकता हूं:

फ्रेंड्स और भाइयों-बहनों,

सच बताऊं मुझे 20 जुलाई से आज तक दो घंटे भी नींद नहीं आई है। भूल गया हूं सोना क्या होता है और जागना क्या! नींद की गोलियां भी बेअसर हैं। आरामदेह बिस्तर भी अब कांटों का लगने लगा है। मैं अपने सहयोगियों से कहता हूं कि इससे तो अच्छा है, मुझे कांटों के बिस्तर पर लिटा दो तो नींद तो आ जाएगी मगर वे हंसते हैं। उन्हें शायद लगता है कि मैं पागल हो गया हूं। मगर नींद गायब होना एक हकीकत है और यह मैं सच बोल रहा हूं। इसका कारण‌ भारत का जन-जन अच्छी तरह जानता है। एक प्रधानमंत्री के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। कहते हैं कि हम इसे पागल बना देंगे। सर्वनाश हो मेरे दुश्मनों का, उन्हें कीड़े पड़ें।

मुझे चक्कर सा आ रहा है फ्रेंड्स, इसलिए मैं आज अधिक देर तक आपको संबोधित नहीं कर पाऊंगा। भगवान श्रीराम ने चाहा तो अगले साल हम फिर यहीं मिलेंगे और मैं आपसे डेढ़-दो घंटे बल्कि इस बार की भी कसर पूरी करने के लिए ढाई से तीन घंटे तक बोलूंगा, आप घबराना मत।सू-सू, पोटी आए तो लालकिले की पवित्र भूमि में यहीं कर लेना। कोई आपत्ति करे तो बताना प्रधान जी का आदेश है।

और अगर ईश्वर की ऐसी इच्छा नहीं हुई और मैं लालकिले से आपको संबोधित नहीं कर पाया तो आपको आज के दिन अमेरिका में राष्ट्रीय ध्वज फहराता हुआ मिलूंगा। उसके साथ मैं भगवा झंडा भी फहराऊंगा। जब प्रधानमंत्री नहीं तो शर्म कैसी! अरे मैंने तो प्रधानमंत्री रहते शर्मो-हया से नाता नहीं रखा तो तब क्या रखूंगा!

नई सरकार मुझे भारत लाने की खूब कोशिश करेगी, करती रहे। आई डोंट केयर। मैं मेहुल भाई, नीरव मोदी, विजय माल्या आदि का प्रत्यर्पण नहीं करवा पाया तो ये मेरी गारंटी है कि आनेवाली भारत की सरकार भी मुझे यहां कभी नहीं ला पाएगी। मैं ऐश से वहां जीवन बिताऊंगा और अमेरिका और ट्रंप की जय बोलूंगा।

आपने देखा होगा कि संसद में और संसद के बाहर मेरे खिलाफ किस तरह का षड़यंत्र रचा गया। मेरी कमजोरी का फायदा उठाया गया कि‌ मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से डरता हूं। कायर हूं। मैं भारत का ही नहीं विश्व का एकमात्र ऐसा प्रधानमंत्री हूं! भाइयों-बहनो, मैं एक क्या सौ बार प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर सकता था मगर मैंने व्रत लिया है कि मैं नहीं करूंगा और लोगों से सीधे संवाद करूंगा। एक ऐसे प्रधानमंत्री के रूप में अपना नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करवाऊंगा, जिसने अपने कार्यकाल में एक भी अनियोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की‌। आपको बाद में पढ़कर गौरव की अनुभूति होगी कि ऐसा अनोखा प्रधानमंत्री भी इस देश‌ में हुआ था!

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क्या जेन जी, आप अपने इस प्रधानमंत्री का नाम गिनीज बुक में देखना नहीं चाहोगे? अवश्य चाहोगे। मुझे मनमोहन सिंह बनाने का षड़यंत्र पहले दिन से चल रहा है जिन्होंने अपने दस साल में सौ से अधिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी! क्या मुझे अपनी अलग पहचान बनाने का हक नहीं है? क्या मुझे भी कांग्रेसी बनना होगा? गिनीज बुक में क्या कांग्रेसी ही प्रवेश पा सकते हैं, हम नागपुरवाले नहीं?

मैं इनके ताने-तिश्नों से नहीं डरता! देखो पूरे वर्षा सत्र में मुझे और मेरे मित्र अमित शाह के खिलाफ क्या-क्या नारे नहीं लगाए गए मगर हम सदन के अंदर नहीं गए तो नहीं गए और गए तो वन्देमातरम गाने गए। इसमें भी हमने वर्ल्ड रिकॉर्ड बना कर दिखाया है। कांग्रेसी कायरों में इतनी हिम्मत कहां? वे तो पहली ही पुकार पर सदन‌ में चले जाते और जेन जी से माफी मांग लेते! पुलिस अधिकारियों पर एक्शन ले लेते, इसीलिए मैं इन्हें कायर कहता हूं। छप्पन इंची मैं हूं, ये नहीं! बोलो छप्पन इंची जिंदाबाद।

दोस्तों, मेरे खिलाफ नहीं, पूरे देश के ख़िलाफ एक षड़यंत्र सा चल रहा है। मुझे 'छप्पन इंच का छोटा बंदर कहा जा रहा है और पूछा जा रहा है, कब आएगा ये सदन केअंदर'! (इतना कहकर वे रोने‌ लगते हैं। आंसू पोंछने के लिए जेब में रूमाल ढूंढते हैं तो नहीं मिलता! अमित शाह से बाजी मारते हुए गिरिराज सिंह अपना रूमाल उन्हें सौप देते हैं और उसे वापिस लेने के लिए पास में खड़े हो जाते हैं। तीस सेकंड बाद भी वे नहीं मानते तो‌ हाथ से प्रधान जी उन्हें अलग कर देते हैं कि फ्रेम से बाहर जाओ। अपनी सीट पर बैठ जाओ वरना रूमाल के चक्कर में अगली बार मंत्रिमंडल की सीट भी खो‌ देगो! वैसे प्रधान जी का शायद आगे भी दो-तीन बार और रोने का प्लान था, इसलिए वे रूमाल नहीं दे रहे थे और देश के नाम ‌संबोधन के बाद भी उन्होंने नहीं ‌दिया। इतना बड़ा नुक़सान गिरिराज सिंह ने अपनी पूरी जिंदगी में नहीं सहा था मगर असहाय थे!)

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अरे हां मित्रो, टेलिप्रांप्टर ने बताया है कि सबसे पहले मुझे स्वतंत्रता दिवस की आपको बधाई और शुभकामनाएं देना चाहिए था। तो बहुत बधाई देशवासियो। देश बेहद मुश्किल स्थितियों से गुजर रहा है। उसका केसरियाकरण नहीं होने दिया जा‌ रहा है। पहले विदेशी शक्तियां षड़यंत्र करती थीं, तो सहन हो जाता था। अब इस देश की रोटी खानेवाला विपक्ष ही मेरी सरकार पर हमले पर हमले कर रहा है। इनमें सीधा हमला करने की हिम्मत नहीं तो इन्होंने छात्रों के कंधों पर बंदूक रखकर पहले‌ मेरे प्रिय शिष्य धर्मेन्द्र प्रधान को हटवाया। दिल पर पत्थर रखकर मैंने उसे हटा दिया। सोचा इस बलिदान के बाद मामला शांत हो जाएगा!

इससे मन नहीं भरा तो इन्होंने अमित शाह पर निशाना साधा ताकि हम दोनों को राजनीतिक सीन से हमेशा के लिए आउट कर दिया जाए। सुन‌ लो कांग्रेसियों हम ऐसी मिट्टी के बने हैं कि हम मर जाएंगे तो भी पद नहीं छोड़ेंगे। इस देश‌ को 2047 में विकसित भारत बनाकर ही दम लेंगे। तब भी नहीं बना तो पच्चीस साल और मांग लेंगे। इसके बाद पचास साल और मांग लेंगे।उसके बाद सौ साल भी मांग सकते हैं। इन्हें पता नहीं कि मैं नॉन बायोलॉजिकल हूं। नॉन बायोलॉजिकल कभी मरता नहीं। जब तक देश की छाती मजबूत है, हम उस पर कूदते रहेंगे।छाती को समतल करने में अपना विनम्र योगदान देते रहेंगे! उसकी एक-एक हड्डी को कुचल कर रहेंगे और फिर देश से कहेंगे कि चीन की तरह दौड़ कर दिखा!

बस आज इतना कहकर विश्राम लेता हूं। भाई आपमें से कोई तीन बार भारत माता की जय बुलवा दे! मुझ में अब शक्ति नहीं रही। मैं सदमे में हूं मितरों!

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