RK Laxman Birth Anniversary: आम आदमी की आवाज को कार्टून के जरिए उठाते थे आर के लक्ष्मण, झेलनी पड़ी थी इंदिरा गांधी की नाराजगी

अपने कार्टून्स से लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाले 'द कॉमन मैन' के निर्माता आर के लक्ष्मण का 24 अक्तूबर को जन्म हुआ था। आर के लक्ष्मण ने अपने कार्टून्स से समाज के आम लोगों की आवाज को उठाने का काम किया था। वह अपने कार्टून्स के जरिए राजनीतिक खामियों, समाज की कमियों पर तीखा हमला करते थे। आर के लक्ष्मण का सबसे चर्चित कार्टून 'कॉमन मैन' था। बता दें कि साल 1985 में लंदन में आर के लक्ष्मण के कार्टून की प्रदर्शनी लगाई गई थी। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर आर के लक्ष्मण के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और परिवारमैसूर के तमिल अय्यर परिवार में 24 अक्तूबर 1921 को आर के लक्ष्मण का जन्म हुआ था। वह बचपन से ही दीवारों पर पेंसिल चलाया करते थे। आर के लक्ष्मण छोटी उम्र से ही मैगजीन में कार्टून देखा करते थे और यहीं से उनकी दिलचस्पी कार्टून में हो गई। इसके बाद उन्होंने मुंबई के जे जे स्कूल ऑफ आर्ट में एडमिशन लेने के लिए आवेदन किया, जिस पर डीन ने उनको यह कहकर एडमिशन देने से मना कर दिया कि आर के लक्ष्मण में स्किल की कमी है। हालांकि कुछ साल बाद इसी संस्थान ने आर के लक्ष्मण को खास इनविटेशन देकर स्पीच देने के लिए बुलाया था।इसे भी पढ़ें: Thomas Edison Death Anniversary: सिर्फ बल्ब ही नहीं, एडिसन ने दिए दुनिया को कई क्रांतिकारी आविष्कार, ऐसे थे दूरदर्शी वैज्ञानिकमतभेद होने पर छोड़ी नौकरीआर के लक्ष्मण ने अखबारों के लिए पॉलिटिकल कार्टून बनाना शुरू किया। उन्होंने फिल्म 'नारद' के लिए भी कार्टून बनाया, लेकिन उनको यहां पर परमानेंट नौकरी नहीं मिली। आजादी की लड़ाई के दौरान यह सिलसिला भी थम गया। ऐसे में वह कार्टून बनाकर 'स्वराज' के ऑफिस पहुंचे। जहां पर वह 50 रुपए सैलरी पर काम करने लगे। इसके बाद वह मुंबई गए और वहां पर फुल टाइम फ्री प्रेस जर्नल में बतौर कार्टूनिस्ट काम करने लगे। लेकिन यहां के संपादक से मतभेद होने के बाद आर के लक्ष्मण ने यहां भी नौकरी छोड़ दी।फ्री प्रेस जर्नल की नौकरी छोड़ने के बाद वह अंग्रेजी अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' पहुंचे। यहां पर उन्होंने करीब 50 साल से भी ज्यादा समय तक काम किया। यहां से ही आर के लक्ष्मण को आम लोगों से जुड़ने का मौका मिला। लोग उनको फोन या चिट्ठियों के जरिए अपनी रोजमर्रा की परेशानियां बताते थे। लोगों के लिए आर के लक्ष्मण के कार्टून उनकी आवाज थे और उनके कार्टूनों का सरकारों पर काफी प्रभाव भी पड़ता था।इंदिरा गांधी हुई थीं नाराजबता दें कि साल 1944 से लेकर 1964 तक आर के लक्ष्मण के कार्टून्स में नेहरु युग का भारत दिखाई देता था। इसके बाद इंदिरा गांधी के दौर में भी आर के लक्ष्मण का काम चलता रहा। इंमरजेंसी के दौरान प्रेस की आजादी पर जो प्रतिबंध लगाए गए थे, उस पर भी आरके लक्ष्मण ने कई कार्टून बनाए थे। आर के लक्ष्मण ने डी के बरुआ के वक्तव्य 'इंदिरा इस इंडिया, इंडिया इज इंदिरा' पर भी कार्टून बनाया था, जिसको देखकर इंदिरा गांधी काफी ज्यादा नाराज हुई थीं।मृत्युवहीं 26 जनवरी 2015 को 93 साल की उम्र में आर के लक्ष्मण ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था।

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Nov 3, 2025 - 17:42
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RK Laxman Birth Anniversary: आम आदमी की आवाज को कार्टून के जरिए उठाते थे आर के लक्ष्मण, झेलनी पड़ी थी इंदिरा गांधी की नाराजगी
अपने कार्टून्स से लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाले 'द कॉमन मैन' के निर्माता आर के लक्ष्मण का 24 अक्तूबर को जन्म हुआ था। आर के लक्ष्मण ने अपने कार्टून्स से समाज के आम लोगों की आवाज को उठाने का काम किया था। वह अपने कार्टून्स के जरिए राजनीतिक खामियों, समाज की कमियों पर तीखा हमला करते थे। आर के लक्ष्मण का सबसे चर्चित कार्टून 'कॉमन मैन' था। बता दें कि साल 1985 में लंदन में आर के लक्ष्मण के कार्टून की प्रदर्शनी लगाई गई थी। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर आर के लक्ष्मण के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

मैसूर के तमिल अय्यर परिवार में 24 अक्तूबर 1921 को आर के लक्ष्मण का जन्म हुआ था। वह बचपन से ही दीवारों पर पेंसिल चलाया करते थे। आर के लक्ष्मण छोटी उम्र से ही मैगजीन में कार्टून देखा करते थे और यहीं से उनकी दिलचस्पी कार्टून में हो गई। इसके बाद उन्होंने मुंबई के जे जे स्कूल ऑफ आर्ट में एडमिशन लेने के लिए आवेदन किया, जिस पर डीन ने उनको यह कहकर एडमिशन देने से मना कर दिया कि आर के लक्ष्मण में स्किल की कमी है। हालांकि कुछ साल बाद इसी संस्थान ने आर के लक्ष्मण को खास इनविटेशन देकर स्पीच देने के लिए बुलाया था।

इसे भी पढ़ें: Thomas Edison Death Anniversary: सिर्फ बल्ब ही नहीं, एडिसन ने दिए दुनिया को कई क्रांतिकारी आविष्कार, ऐसे थे दूरदर्शी वैज्ञानिक

मतभेद होने पर छोड़ी नौकरी

आर के लक्ष्मण ने अखबारों के लिए पॉलिटिकल कार्टून बनाना शुरू किया। उन्होंने फिल्म 'नारद' के लिए भी कार्टून बनाया, लेकिन उनको यहां पर परमानेंट नौकरी नहीं मिली। आजादी की लड़ाई के दौरान यह सिलसिला भी थम गया। ऐसे में वह कार्टून बनाकर 'स्वराज' के ऑफिस पहुंचे। जहां पर वह 50 रुपए सैलरी पर काम करने लगे। इसके बाद वह मुंबई गए और वहां पर फुल टाइम फ्री प्रेस जर्नल में बतौर कार्टूनिस्ट काम करने लगे। लेकिन यहां के संपादक से मतभेद होने के बाद आर के लक्ष्मण ने यहां भी नौकरी छोड़ दी।

फ्री प्रेस जर्नल की नौकरी छोड़ने के बाद वह अंग्रेजी अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' पहुंचे। यहां पर उन्होंने करीब 50 साल से भी ज्यादा समय तक काम किया। यहां से ही आर के लक्ष्मण को आम लोगों से जुड़ने का मौका मिला। लोग उनको फोन या चिट्ठियों के जरिए अपनी रोजमर्रा की परेशानियां बताते थे। लोगों के लिए आर के लक्ष्मण के कार्टून उनकी आवाज थे और उनके कार्टूनों का सरकारों पर काफी प्रभाव भी पड़ता था।

इंदिरा गांधी हुई थीं नाराज

बता दें कि साल 1944 से लेकर 1964 तक आर के लक्ष्मण के कार्टून्स में नेहरु युग का भारत दिखाई देता था। इसके बाद इंदिरा गांधी के दौर में भी आर के लक्ष्मण का काम चलता रहा। इंमरजेंसी के दौरान प्रेस की आजादी पर जो प्रतिबंध लगाए गए थे, उस पर भी आरके लक्ष्मण ने कई कार्टून बनाए थे। आर के लक्ष्मण ने डी के बरुआ के वक्तव्य 'इंदिरा इस इंडिया, इंडिया इज इंदिरा' पर भी कार्टून बनाया था, जिसको देखकर इंदिरा गांधी काफी ज्यादा नाराज हुई थीं।

मृत्यु

वहीं 26 जनवरी 2015 को 93 साल की उम्र में आर के लक्ष्मण ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था।

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