Vibrant Gujarat: तिलहन बनेगा किसानों की तकदीर! राजकोट में बनी आय दोगुनी करने की Global Strategy.

'वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस- सौराष्ट्र-कच्छ' के अंतर्गत सोमवार को गुजरात के राजकोट स्थित मारवाड़ी विश्वविद्यालय में "कृषि मूल्य - तिलहन अवसर" विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। बयान में कहा गया है कि इस कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों और उद्यमियों ने सौराष्ट्र और कच्छ की कृषि अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए विचार-विमर्श किया। गुजरात सरकार के कृषि एवं सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव आर.सी. मीना ने उपस्थित विशिष्ट अतिथियों और प्रतिनिधियों का हार्दिक स्वागत किया और गुजरात के कृषि क्षेत्र में तिलहन के महत्व तथा सरकार की भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।इसे भी पढ़ें: आतंकवाद पूरी मानवता के लिए खतरा, PM मोदी का ऐलान-जर्मनी-भारत मिलकर इससे लड़ेंगेभारतीय तिलहन एवं उत्पाद संवर्धन परिषद के अध्यक्ष रितुपर्णा डोले ने 'समृद्धि के बीज' विषय पर व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने तिलहन की वास्तविक क्षमता को उजागर करने की आवश्यकता पर बल दिया और गुणवत्तापूर्ण बीजों के महत्व पर प्रकाश डाला। CIARA-CEC के अध्यक्ष गुस्तावो इडिगोरस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अर्जेंटीना के तिलहन निर्यात मॉडल पर वर्चुअल मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने प्रतिभागियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी निर्यात के लिए आवश्यक कदमों से अवगत कराया। ICAR-मूंगफली अनुसंधान के निदेशक संदीप बेरा ने गुजरात में जलवायु-अनुकूल खेती और तिलहन सुरक्षा पर तकनीकी जानकारी भी साझा की।अन्वेषण के संस्थापक और सीईओ कुलदीप पारेवा ने सतत भविष्य के लिए तिलहन क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधान और कृषि नवाचार पर एक संबोधन दिया। वक्तव्य में कहा गया है, "तिलहन क्षेत्र के विकास और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान के लिए विभिन्न संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।इसे भी पढ़ें: Somnath Swabhiman Parv से पीएम मोदी का बड़ा बयान, कहा- राष्ट्रहित विरोधी ताकतें आज भी हैं सक्रियसेमिनार का मुख्य उद्देश्य तिलहन फसलों के उत्पादन से लेकर मूल्यवर्धन तक की पूरी प्रक्रिया में आर्थिक संभावनाओं को उजागर करना था। सौराष्ट्र और कच्छ जैसे क्षेत्रों में मूंगफली और अरंडी जैसी तिलहन फसलों की खेती की जाती है। यदि किसान इन तिलहन फसलों को सीधे बेचने के बजाय मूल्यवर्धन करें, तो अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। सेमिनार में तिलहन फसलों से तेल और अन्य उप-उत्पादों के उत्पादन से अधिक लाभ कमाने के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई।इसे भी पढ़ें: आतंकवाद पूरी मानवता के लिए खतरा, PM मोदी का ऐलान-जर्मनी-भारत मिलकर इससे लड़ेंगेविशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया। कोल्ड-प्रेस्ड तेल, घानी तेल और आधुनिक शोधन प्रक्रियाओं के बारे में भी जानकारी साझा की गई, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काफी मांग है। न केवल मूल्यवर्धन पर बल्कि विश्वभर के देशों में मूल्यवर्धित उत्पादों की डिलीवरी के लिए आवश्यक रसद सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। सेमिनार के दौरान तिलहन प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए अपील की गई।

PNSPNS
Jan 13, 2026 - 10:31
 0
Vibrant Gujarat: तिलहन बनेगा किसानों की तकदीर! राजकोट में बनी आय दोगुनी करने की Global Strategy.

'वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस- सौराष्ट्र-कच्छ' के अंतर्गत सोमवार को गुजरात के राजकोट स्थित मारवाड़ी विश्वविद्यालय में "कृषि मूल्य - तिलहन अवसर" विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। बयान में कहा गया है कि इस कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों और उद्यमियों ने सौराष्ट्र और कच्छ की कृषि अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए विचार-विमर्श किया। गुजरात सरकार के कृषि एवं सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव आर.सी. मीना ने उपस्थित विशिष्ट अतिथियों और प्रतिनिधियों का हार्दिक स्वागत किया और गुजरात के कृषि क्षेत्र में तिलहन के महत्व तथा सरकार की भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

इसे भी पढ़ें: आतंकवाद पूरी मानवता के लिए खतरा, PM मोदी का ऐलान-जर्मनी-भारत मिलकर इससे लड़ेंगे

भारतीय तिलहन एवं उत्पाद संवर्धन परिषद के अध्यक्ष रितुपर्णा डोले ने 'समृद्धि के बीज' विषय पर व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने तिलहन की वास्तविक क्षमता को उजागर करने की आवश्यकता पर बल दिया और गुणवत्तापूर्ण बीजों के महत्व पर प्रकाश डाला। CIARA-CEC के अध्यक्ष गुस्तावो इडिगोरस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अर्जेंटीना के तिलहन निर्यात मॉडल पर वर्चुअल मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने प्रतिभागियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी निर्यात के लिए आवश्यक कदमों से अवगत कराया। ICAR-मूंगफली अनुसंधान के निदेशक संदीप बेरा ने गुजरात में जलवायु-अनुकूल खेती और तिलहन सुरक्षा पर तकनीकी जानकारी भी साझा की।अन्वेषण के संस्थापक और सीईओ कुलदीप पारेवा ने सतत भविष्य के लिए तिलहन क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधान और कृषि नवाचार पर एक संबोधन दिया। वक्तव्य में कहा गया है, "तिलहन क्षेत्र के विकास और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान के लिए विभिन्न संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।

इसे भी पढ़ें: Somnath Swabhiman Parv से पीएम मोदी का बड़ा बयान, कहा- राष्ट्रहित विरोधी ताकतें आज भी हैं सक्रिय

सेमिनार का मुख्य उद्देश्य तिलहन फसलों के उत्पादन से लेकर मूल्यवर्धन तक की पूरी प्रक्रिया में आर्थिक संभावनाओं को उजागर करना था। सौराष्ट्र और कच्छ जैसे क्षेत्रों में मूंगफली और अरंडी जैसी तिलहन फसलों की खेती की जाती है। यदि किसान इन तिलहन फसलों को सीधे बेचने के बजाय मूल्यवर्धन करें, तो अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। सेमिनार में तिलहन फसलों से तेल और अन्य उप-उत्पादों के उत्पादन से अधिक लाभ कमाने के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई।

इसे भी पढ़ें: आतंकवाद पूरी मानवता के लिए खतरा, PM मोदी का ऐलान-जर्मनी-भारत मिलकर इससे लड़ेंगे

विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया। कोल्ड-प्रेस्ड तेल, घानी तेल और आधुनिक शोधन प्रक्रियाओं के बारे में भी जानकारी साझा की गई, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काफी मांग है। न केवल मूल्यवर्धन पर बल्कि विश्वभर के देशों में मूल्यवर्धित उत्पादों की डिलीवरी के लिए आवश्यक रसद सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। सेमिनार के दौरान तिलहन प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए अपील की गई।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow