Uttarakhand: प्रदेश के जंगलों में बाघ व तेंदुआ सुरक्षित नहीं, तीन साल में 345 की मौत, जहर देकर पहले भी मारे गए
उत्तराखंड के जंगलों में बाघ और तेंदुआ सुरक्षित नहीं हैं। पिछले तीन साल में कुल 345 बाघ और तेंदुओं की मौत हो चुकी है।
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