अमेरिका के लगातार दूसरी रात हवाई हमले करने के बाद, दोनों देशों के बीच दो महीने से चल रहा तनावपूर्ण संघर्ष-विराम तेज़ी से कमज़ोर पड़ रहा है। गुरुवार को ईरान के विदेश मंत्रालय ने अब तक की सबसे कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वॉशिंगटन की सैन्य कार्रवाइयों ने बड़ी मुश्किल से हुए संघर्ष-विराम को "लगभग बेमतलब" बना दिया है। तनाव में यह हालिया बढ़ोतरी वॉशिंगटन के उन आरोपों के बाद हुई है जिनमें कहा गया है कि ईरान ने इस हफ़्ते की शुरुआत में होर्मुज़ जलडमरूमध्य के ऊपर अमेरिकी सेना का अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराया था। इसके बाद US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने होर्मोज़गन जैसे दक्षिणी प्रांतों में ईरानी एयर डिफेंस नेटवर्क, रडार साइटों और ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों को निशाना बनाते हुए "आत्मरक्षा में हमले" किए।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य 'बंद' रहेगा
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान के पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने उन जहाज़ों को, जिन्हें पहले ही गुज़रने की मंज़ूरी मिल चुकी है, सब्र रखने को कहा है। अथॉरिटी का कहना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अगली सूचना तक बंद रहेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस चेतावनी के बाद कि बातचीत में देरी के लिए तेहरान को "कीमत चुकानी होगी", अमेरिका ने गुरुवार सुबह ईरान पर हवाई हमलों का दूसरा दौर शुरू किया। इन नए हमलों से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है और नाज़ुक युद्धविराम को बनाए रखने की कोशिशों पर खतरा मंडराने लगा है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने गुरुवार को कहा कि उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद एयरबेस पर स्थित 18 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं। बहरीन के गृह मंत्रालय ने कहा कि चेतावनी देने वाले सायरन बजा दिए गए हैं। ये हमले दोनों पक्षों के बीच बढ़ते सैन्य टकराव में एक नया मोड़ हैं, जिससे पूर्ण पैमाने पर संघर्ष के फिर से शुरू होने का डर पैदा हो गया है। अप्रैल की शुरुआत में दोनों देशों के बीच एक नाज़ुक युद्धविराम पर सहमति बनने के बाद यह संघर्ष रुक गया था।
अमेरिका ने ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए
अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने लगातार दूसरे दिन ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान पर आरोप लगाया था कि वह अस्थायी शांति समझौते पर बातचीत में देरी कर रहा है। CENTCOM ने एक्स पर पोस्ट किए गए एक अपडेट में कहा कि CENTCOM की सेनाओं ने पूरे ईरान में ईरानी सेना की निगरानी क्षमताओं, संचार प्रणालियों और हवाई सुरक्षा ठिकानों पर हमले किए।