UNSC में भरत पर क्या बड़ा फैसला हो गया, मिलेगा Veto Power! चीन भी सपोर्ट में उतरा

भारत का अब वो सपना पूरा होने जा रहा है जिसका भारतवासियों को दशकों से बेसब्री से इंतजार था। भारत उन महाशक्तियों में शुमार हो जाएगा जो दुनिया भर के फैसलों में अब सीधे दखल देगा। यानी कि भारत की सहमति के बिना अब दुनिया भर में कोई बड़े फैसले नहीं लिए जाएंगे। क्योंकि अब भारत को वीटो पावर मिलने के साथ ही यूएन में स्थाई मेंबरशिप मिलने वाली है। दरअसल 80 साल बाद संयुक्त राष्ट्र संघ के स्ट्रक्चर में फेरबदल की सुबगाहट तेज हो गई है। इसको लेकर यूएससी में रिफॉर्म नाम से एक डिबेट की भी शुरुआत हुई है। इस डिबेट में संयुक्त राष्ट्र संघ में फेरबदल को लेकर सभी देश अपना-अपना पक्ष रखेंगे। यूएससी रिफॉर्म डिबेट से जो अब तक संकेत निकल कर सामने आए हैं उससे साफ हो गया है कि अगर फेरबदल की सहमति बनती है तो भारत को वीटो पावर के साथ यूएन की स्थाई मेंबरशिप मिल सकती है।इसे भी पढ़ें: गरुड़ 25: भारत के Su-30MKI और फ्रांसीसी राफेल ने आसमान में दिखाई ताकत, चीन-पाक की बढ़ी धड़कनें ब्रिटेन रूस के बाद फ्रांस के धमाकेदार सपोर्ट से मिला है। भारत को यूनाइटेड नेशन की सदस्यता मिलनी चाहिए। इसकी पैरवी ब्रिटेन और रूस करते रहे हैं। लेकिन अब फ्रांस ने भी इसकी घोषणा कर दी है। यूएन में भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन एक बार फिर फ्रांस ने किया। फ्रांस ने साफ शब्दों में कहा कि वह भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएससी में स्थाई सदस्य बनाने के लिए समर्थन करता है। फ्रांस ने ना सिर्फ स्थाई सदस्यता बल्कि वीटो पावर के लिए भी भारत का समर्थन किया। फ्रांस ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार के दौरान अफ्रीका को दो सीटें मिलनी चाहिए। इसके साथ ही साथ ग्रुप ऑफ फोर यानी ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान को एक-एक सीट दी जानी चाहिए। इन देशों को विशेषाधिकार भी मिलना चाहिए।इसे भी पढ़ें: PM मोदी ने किया बड़ा ऐलान, पाकिस्तान ने उड़ाए लड़ाकू विमान! दूसरी तरफ चीन ने भी बड़ा संकेत दिया है। जो भारत को वीटो पावर मिलने को लेकर हमेशा रोड़ा बनताया है। दरअसल यूएस रिफॉर्म पर चीन ने भी अपना पक्ष रखा है। चीन की तरफ से यूएन की स्थाई दूत ने बयान दिया है। चीन ने इस बैठक में भारत का विरोध नहीं किया है। चीन ने जी4 के सिर्फ जापान का विरोध किया है। चीन का कहना है कि जापान जिस तरह से ताइवान के मुद्दे पर मुखर है। उससे साबित होता है कि जापान यूएन की स्थाई मेंबरशिप मांगने का कोई अधिकार नहीं रखता। चीन ने जापान पर शांति भंग करने का आरोप लगाया। चीन ने कहा कि जापान को अगर मेंबरशिप देने की कोशिश हुई तो हम इसका खुलकर विरोध करेंगे। यानी कि चीन ने खुले तौर पर भारत का भी समर्थन कर दिया है जो भारत के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है।इसे भी पढ़ें: Rafale के साथ भारत के पायलटों ने ऐसा क्या किया? फ्रांस ने ठोका सलाम, हिल गए तुर्किए-चीन-पाकिस्तानदरअसल 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन किया गया था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी कि यूएससी में कुल 15 मेंबर होते हैं। जिनमें पांच स्थाई सदस्य [संगीत] और 10 अस्थाई मेंबर होते हैं। अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन स्थाई मेंबर हैं और इनके पास वीटो पावर हैं। वहीं स्थाई सदस्य 2 साल के लिए चुने जाते हैं और वे क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए चुने जाते हैं। 

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Nov 21, 2025 - 17:59
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UNSC में भरत पर क्या बड़ा फैसला हो गया, मिलेगा Veto Power! चीन भी सपोर्ट में उतरा

भारत का अब वो सपना पूरा होने जा रहा है जिसका भारतवासियों को दशकों से बेसब्री से इंतजार था। भारत उन महाशक्तियों में शुमार हो जाएगा जो दुनिया भर के फैसलों में अब सीधे दखल देगा। यानी कि भारत की सहमति के बिना अब दुनिया भर में कोई बड़े फैसले नहीं लिए जाएंगे। क्योंकि अब भारत को वीटो पावर मिलने के साथ ही यूएन में स्थाई मेंबरशिप मिलने वाली है। दरअसल 80 साल बाद संयुक्त राष्ट्र संघ के स्ट्रक्चर में फेरबदल की सुबगाहट तेज हो गई है। इसको लेकर यूएससी में रिफॉर्म नाम से एक डिबेट की भी शुरुआत हुई है। इस डिबेट में संयुक्त राष्ट्र संघ में फेरबदल को लेकर सभी देश अपना-अपना पक्ष रखेंगे। यूएससी रिफॉर्म डिबेट से जो अब तक संकेत निकल कर सामने आए हैं उससे साफ हो गया है कि अगर फेरबदल की सहमति बनती है तो भारत को वीटो पावर के साथ यूएन की स्थाई मेंबरशिप मिल सकती है।

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ब्रिटेन रूस के बाद फ्रांस के धमाकेदार सपोर्ट से मिला है। भारत को यूनाइटेड नेशन की सदस्यता मिलनी चाहिए। इसकी पैरवी ब्रिटेन और रूस करते रहे हैं। लेकिन अब फ्रांस ने भी इसकी घोषणा कर दी है। यूएन में भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन एक बार फिर फ्रांस ने किया। फ्रांस ने साफ शब्दों में कहा कि वह भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएससी में स्थाई सदस्य बनाने के लिए समर्थन करता है। फ्रांस ने ना सिर्फ स्थाई सदस्यता बल्कि वीटो पावर के लिए भी भारत का समर्थन किया। फ्रांस ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार के दौरान अफ्रीका को दो सीटें मिलनी चाहिए। इसके साथ ही साथ ग्रुप ऑफ फोर यानी ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान को एक-एक सीट दी जानी चाहिए। इन देशों को विशेषाधिकार भी मिलना चाहिए।

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दूसरी तरफ चीन ने भी बड़ा संकेत दिया है। जो भारत को वीटो पावर मिलने को लेकर हमेशा रोड़ा बनताया है। दरअसल यूएस रिफॉर्म पर चीन ने भी अपना पक्ष रखा है। चीन की तरफ से यूएन की स्थाई दूत ने बयान दिया है। चीन ने इस बैठक में भारत का विरोध नहीं किया है। चीन ने जी4 के सिर्फ जापान का विरोध किया है। चीन का कहना है कि जापान जिस तरह से ताइवान के मुद्दे पर मुखर है। उससे साबित होता है कि जापान यूएन की स्थाई मेंबरशिप मांगने का कोई अधिकार नहीं रखता। चीन ने जापान पर शांति भंग करने का आरोप लगाया। चीन ने कहा कि जापान को अगर मेंबरशिप देने की कोशिश हुई तो हम इसका खुलकर विरोध करेंगे। यानी कि चीन ने खुले तौर पर भारत का भी समर्थन कर दिया है जो भारत के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है।

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दरअसल 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन किया गया थासंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी कि यूएससी में कुल 15 मेंबर होते हैंजिनमें पांच स्थाई सदस्य [संगीत] और 10 अस्थाई मेंबर होते हैं। अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन स्थाई मेंबर हैं और इनके पास वीटो पावर हैं। वहीं स्थाई सदस्य 2 साल के लिए चुने जाते हैं और वे क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए चुने जाते हैं। 

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