Tighee Movie Review | तीन टूटी हुई औरतें और पारिवारिक रहस्यों का अनकहा बोझ

आज के दौर में खून के रिश्तों की जटिलता और उनकी रूढ़िवादिता अक्सर हमें अचंभित कर देती है। क्या दो बहनें ईर्ष्या से परे एक परिपक्व रिश्ता साझा कर सकती हैं? क्या एक अकेली माँ (Single Mother) अपनी बेटियों के लिए पर्याप्त संबल बन सकती है? जीजीविषा काले द्वारा निर्देशित फिल्म ‘तिघी’ इन्हीं मानवीय संवेदनाओं के इर्द-गिर्द बुनी गई है। यह फिल्म इस फलसफे को पुख्ता करती है कि रिश्ते हालातों की उपज होते हैं और कभी-कभी 'मुसीबत में एकता' ही सबसे बड़ा मरहम साबित होती है। कहानी का ताना-बानाफिल्म की शुरुआत ही एक भारी तनाव के साथ होती है। स्वाति (नेहा पेंडसे) एक दोहरे मोर्चे पर जूझ रही है- पेशेवर ज़िंदगी में उसका सामना एक अय्याश बॉस (जयमिनी पाठक) से है, जिसका कर्ज उसे चुकाना है, और निजी ज़िंदगी में उसकी शादी मल्हार (पुष्करराज चिरपुतकर) के साथ एक नाजुक मोड़ पर है। लेकिन इन सबसे बड़ा बोझ उसकी माँ, हेमलता (भारती आचरेकर) है, जो कैंसर की आखिरी स्टेज से लड़ रही है। कहानी के दूसरे छोर पर स्वाति की छोटी बहन, सारिका (सोनाली कुलकर्णी) है। एक ही छत के नीचे एक अकेली माँ द्वारा पाली गई इन दोनों बहनों के व्यक्तित्व में ज़मीन-आसमान का अंतर है, जो फिल्म को असल ज़िंदगी के बेहद करीब ले आता है।अतीत का साया और गहरे राजएक घर जहाँ केवल दुखद यादें बसी हों, वहाँ किसी आसन्न त्रासदी (Tragedy) का होना अक्सर बिखरे हुए सदस्यों को करीब लाने का जरिया बनता है। ‘तिघी’ की यह तिकड़ी हमें अपने ही उलझे हुए रिश्तों की याद दिलाती है। फिल्म का मुख्य आकर्षण वह 'काला सच' (Dark Secret) है जिसे हेमलता ने सालों से अपने सीने में दबा रखा है। जब पिता विहीन बचपन बिताने वाली स्वाति और सारिका के सामने यह रहस्य खुलता है, तो दर्शकों को समझ आता है कि कैसे उस एक जानकारी ने न केवल उनके बचपन को आकार दिया, बल्कि उनके जीवन में आने वाले पुरुषों के साथ उनके वयस्क रिश्तों को भी प्रभावित किया। इसे भी पढ़ें: Nora Fatehi Song Controversy | चुनिंदा गुस्सा क्यों? KD - The Devil डायरेक्टर की पत्नी रक्षिता का पलटवार, 'चोली के पीछे' और 'Peelings' का दिया हवाला अभिनय और निर्देशन का तालमेलभारती आचरेकर ने हेमलता के रूप में एक ऐसा प्रदर्शन दिया है जो दिल को झकझोर देता है। बीमारी की लाचारी और अतीत के अपराधबोध को उन्होंने अपनी आँखों और आवाज़ के उतार-चढ़ाव से जीवंत कर दिया है। नेहा पेंडसे और सोनाली कुलकर्णी ने भी अपनी-अपनी भूमिकाओं में बेहतरीन संतुलन बनाए रखा है, जिससे दोनों बहनों के बीच का आपसी तनाव बेहद वास्तविक (Authentic) लगता है। इसे भी पढ़ें: बेशर्मी की.... Nora Fatehi के गाने पर भड़कीं Kangana Ranaut, इंडस्ट्री की लगाई क्लासनिष्कर्ष: क्या रिश्ते सुधर पाएंगे?‘तिघी’ केवल दुखों की कहानी नहीं है, बल्कि यह टूटे हुए धागों को फिर से जोड़ने की एक कोशिश है। फिल्म का अंत एक बेहतर भविष्य का वादा करता है। यह हमें सिखाती है कि चाहे अतीत कितना भी दर्दनाक क्यों न रहा हो, सच का सामना करना ही हीलिंग (Healing) की पहली सीढ़ी है।यदि आप अर्थपूर्ण सिनेमा और रिश्तों की बारीकियों को समझना पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक विचारोत्तेजक अनुभव साबित होगी।  View this post on Instagram A post shared by Saiyami Kher (@saiyami)

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Mar 20, 2026 - 09:51
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Tighee Movie Review | तीन टूटी हुई औरतें और पारिवारिक रहस्यों का अनकहा बोझ
आज के दौर में खून के रिश्तों की जटिलता और उनकी रूढ़िवादिता अक्सर हमें अचंभित कर देती है। क्या दो बहनें ईर्ष्या से परे एक परिपक्व रिश्ता साझा कर सकती हैं? क्या एक अकेली माँ (Single Mother) अपनी बेटियों के लिए पर्याप्त संबल बन सकती है? जीजीविषा काले द्वारा निर्देशित फिल्म ‘तिघी’ इन्हीं मानवीय संवेदनाओं के इर्द-गिर्द बुनी गई है। यह फिल्म इस फलसफे को पुख्ता करती है कि रिश्ते हालातों की उपज होते हैं और कभी-कभी 'मुसीबत में एकता' ही सबसे बड़ा मरहम साबित होती है।
 

कहानी का ताना-बाना

फिल्म की शुरुआत ही एक भारी तनाव के साथ होती है। स्वाति (नेहा पेंडसे) एक दोहरे मोर्चे पर जूझ रही है- पेशेवर ज़िंदगी में उसका सामना एक अय्याश बॉस (जयमिनी पाठक) से है, जिसका कर्ज उसे चुकाना है, और निजी ज़िंदगी में उसकी शादी मल्हार (पुष्करराज चिरपुतकर) के साथ एक नाजुक मोड़ पर है। लेकिन इन सबसे बड़ा बोझ उसकी माँ, हेमलता (भारती आचरेकर) है, जो कैंसर की आखिरी स्टेज से लड़ रही है। कहानी के दूसरे छोर पर स्वाति की छोटी बहन, सारिका (सोनाली कुलकर्णी) है। एक ही छत के नीचे एक अकेली माँ द्वारा पाली गई इन दोनों बहनों के व्यक्तित्व में ज़मीन-आसमान का अंतर है, जो फिल्म को असल ज़िंदगी के बेहद करीब ले आता है।

अतीत का साया और गहरे राज

एक घर जहाँ केवल दुखद यादें बसी हों, वहाँ किसी आसन्न त्रासदी (Tragedy) का होना अक्सर बिखरे हुए सदस्यों को करीब लाने का जरिया बनता है। ‘तिघी’ की यह तिकड़ी हमें अपने ही उलझे हुए रिश्तों की याद दिलाती है। फिल्म का मुख्य आकर्षण वह 'काला सच' (Dark Secret) है जिसे हेमलता ने सालों से अपने सीने में दबा रखा है। जब पिता विहीन बचपन बिताने वाली स्वाति और सारिका के सामने यह रहस्य खुलता है, तो दर्शकों को समझ आता है कि कैसे उस एक जानकारी ने न केवल उनके बचपन को आकार दिया, बल्कि उनके जीवन में आने वाले पुरुषों के साथ उनके वयस्क रिश्तों को भी प्रभावित किया।
 

इसे भी पढ़ें: Nora Fatehi Song Controversy | चुनिंदा गुस्सा क्यों? KD - The Devil डायरेक्टर की पत्नी रक्षिता का पलटवार, 'चोली के पीछे' और 'Peelings' का दिया हवाला

 

अभिनय और निर्देशन का तालमेल

भारती आचरेकर ने हेमलता के रूप में एक ऐसा प्रदर्शन दिया है जो दिल को झकझोर देता है। बीमारी की लाचारी और अतीत के अपराधबोध को उन्होंने अपनी आँखों और आवाज़ के उतार-चढ़ाव से जीवंत कर दिया है। नेहा पेंडसे और सोनाली कुलकर्णी ने भी अपनी-अपनी भूमिकाओं में बेहतरीन संतुलन बनाए रखा है, जिससे दोनों बहनों के बीच का आपसी तनाव बेहद वास्तविक (Authentic) लगता है।
 

इसे भी पढ़ें: बेशर्मी की.... Nora Fatehi के गाने पर भड़कीं Kangana Ranaut, इंडस्ट्री की लगाई क्लास


निष्कर्ष: क्या रिश्ते सुधर पाएंगे?

‘तिघी’ केवल दुखों की कहानी नहीं है, बल्कि यह टूटे हुए धागों को फिर से जोड़ने की एक कोशिश है। फिल्म का अंत एक बेहतर भविष्य का वादा करता है। यह हमें सिखाती है कि चाहे अतीत कितना भी दर्दनाक क्यों न रहा हो, सच का सामना करना ही हीलिंग (Healing) की पहली सीढ़ी है।

यदि आप अर्थपूर्ण सिनेमा और रिश्तों की बारीकियों को समझना पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक विचारोत्तेजक अनुभव साबित होगी।
 

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