Shivaji Maharaj Death Anniversary: 15 साल की उम्र में Shivaji Maharaj ने कैसे रखी थी Hindu Swaraj की नींव

छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के एक ऐसे महानायक हैं, जो वीरता और स्वाभिमान के प्रतीक माने जाते हैं। आज ही के दिन यानी की 03 अप्रैल को शिवाजी महाराज की मृत्यु हुई थी। उस दौरान उनकी उम्र सिर्फ 50 साल थी। माना जाता है कि शिवाजी महाराज की मृत्यु रहस्यमयी थी। शिवाजी की एक हुंकार से उनके समकालीन मुगल शासक औरंगजेब थर-थर कांपता था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और परिवारबता दें कि 19 फरवरी 1630 को छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम शाहजी भोंसले और मां का नाम जीजाबाई थी। इस दौरान न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि पूरा भारत मुगल आक्रमणकारियों के सामने बेबस था। मुगलों ने दिल्ली सहित पूरे भारत पर कब्जा कर लिया था। ऐसे में छत्रपति शिवाजी महाराज ने महज 15 साल की उम्र में हिंदू हुकूमत को एक बार फिर से स्थापित करने की प्रतिज्ञा ली थी।इसे भी पढ़ें: Guru Tegh Bahadur Birth Anniversary: 13 साल में उठाई तलवार, जानें 'हिंद की चादर' बनने का पूरा सफरसनातन धर्म की रक्षाशिवाजी महाराज ने न सिर्फ मराठा साम्राज्य की नींव रखी, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। उन्होंने 15 साल की उम्र में मुगल सल्तनत को धूल चटाने के लिए बीजापुर पर हमला कर दिया। शिवाजी जी ने गोरिल्ला युद्ध नीति के जरिए बीजापुर के शासक आदिलशाह को घुटने पर मजबूर कर दिया था। शिवाजी को बना लिया बंदीसाल 1966 में आदिलशाह को मौत के घाट उतारने के बाद शिवाजी ने बीजापुर के चार किलों पर कब्जा जमा लिया था। जिसके बाद शिवाजी को बंदी बनाने के लिए औरंगजेब ने संधि का हाथ आगे बढ़ाया। जब शिवाजी संधि प्रस्ताव के तहत आगरा पहुंचे, तो उनको बंदी बना लिया गया। लेकिन मुगलिया सल्तनत उनको अधिक समय तक बंदी नहीं बना सकी। शिवाजी एक फल की टोकरी में बैठकर जेल से फरार हो गए। इस घटना के बाद शिवाजी ने तय कर लिया कि वह मुगलिया सल्तनत को जड़ से खत्म कर देंगे।सभी धर्मों का करते थे सम्मानशिवाजी सभी धर्मों का सम्मान करते थे। उन्होंने कभी किसी धार्मिक स्थल पर हमला नहीं किया। वह जबरन धर्म परिवर्तन के भी खिलाफ थे। शिवाजी महाराज ने अपने राजकाज में संस्कृत और फारसी को ज्यादा वरीयता दी थी।मृत्युवहीं 03 अप्रैल 1680 को छत्रपति शिवाजी महाराज का पहाड़ी दुर्ग राजगढ़ निधन हो गया था।

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Apr 3, 2026 - 12:24
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Shivaji Maharaj Death Anniversary: 15 साल की उम्र में Shivaji Maharaj ने कैसे रखी थी Hindu Swaraj की नींव
छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के एक ऐसे महानायक हैं, जो वीरता और स्वाभिमान के प्रतीक माने जाते हैं। आज ही के दिन यानी की 03 अप्रैल को शिवाजी महाराज की मृत्यु हुई थी। उस दौरान उनकी उम्र सिर्फ 50 साल थी। माना जाता है कि शिवाजी महाराज की मृत्यु रहस्यमयी थी। शिवाजी की एक हुंकार से उनके समकालीन मुगल शासक औरंगजेब थर-थर कांपता था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

बता दें कि 19 फरवरी 1630 को छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम शाहजी भोंसले और मां का नाम जीजाबाई थी। इस दौरान न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि पूरा भारत मुगल आक्रमणकारियों के सामने बेबस था। मुगलों ने दिल्ली सहित पूरे भारत पर कब्जा कर लिया था। ऐसे में छत्रपति शिवाजी महाराज ने महज 15 साल की उम्र में हिंदू हुकूमत को एक बार फिर से स्थापित करने की प्रतिज्ञा ली थी।

इसे भी पढ़ें: Guru Tegh Bahadur Birth Anniversary: 13 साल में उठाई तलवार, जानें 'हिंद की चादर' बनने का पूरा सफर

सनातन धर्म की रक्षा

शिवाजी महाराज ने न सिर्फ मराठा साम्राज्य की नींव रखी, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। उन्होंने 15 साल की उम्र में मुगल सल्तनत को धूल चटाने के लिए बीजापुर पर हमला कर दिया। शिवाजी जी ने गोरिल्ला युद्ध नीति के जरिए बीजापुर के शासक आदिलशाह को घुटने पर मजबूर कर दिया था। 

शिवाजी को बना लिया बंदी

साल 1966 में आदिलशाह को मौत के घाट उतारने के बाद शिवाजी ने बीजापुर के चार किलों पर कब्जा जमा लिया था। जिसके बाद शिवाजी को बंदी बनाने के लिए औरंगजेब ने संधि का हाथ आगे बढ़ाया। जब शिवाजी संधि प्रस्ताव के तहत आगरा पहुंचे, तो उनको बंदी बना लिया गया। लेकिन मुगलिया सल्तनत उनको अधिक समय तक बंदी नहीं बना सकी। शिवाजी एक फल की टोकरी में बैठकर जेल से फरार हो गए। इस घटना के बाद शिवाजी ने तय कर लिया कि वह मुगलिया सल्तनत को जड़ से खत्म कर देंगे।

सभी धर्मों का करते थे सम्मान

शिवाजी सभी धर्मों का सम्मान करते थे। उन्होंने कभी किसी धार्मिक स्थल पर हमला नहीं किया। वह जबरन धर्म परिवर्तन के भी खिलाफ थे। शिवाजी महाराज ने अपने राजकाज में संस्कृत और फारसी को ज्यादा वरीयता दी थी।

मृत्यु

वहीं 03 अप्रैल 1680 को छत्रपति शिवाजी महाराज का पहाड़ी दुर्ग राजगढ़ निधन हो गया था।

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