SEBI का कस्टोडियंस के लिए नया फरमान: विनियमित और गैर-विनियमित सेवाओं को करना होगा अलग, नेटवर्थ के नियम भी बदले

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने बुधवार को गैर-बैंक कस्टोडियंस (Non-bank Custodians) के लिए नए परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के तहत अब कस्टोडियंस को अपनी विभिन्न वित्तीय सेवाओं को अलग-अलग रणनीतिक व्यापार इकाइयों (Strategic Business Units - SBU) के माध्यम से संचालित करना अनिवार्य होगा। इनमें इन इकाइयों के लिए अलग खाते बनाए रखने और इन व्यवसायों के लिए स्वतंत्र रूप से नेटवर्थ संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के निर्देश भी शामिल हैं।इसे भी पढ़ें: US-India दोस्ती दान नहीं, Mutual Interest है, Raisina Dialogue में Christopher Landau का बड़ा बयान नियामक ने अपने परिपत्र में कहा कि कस्टोडियन एंड डीडीपी स्टैंडर्ड्स सेटिंग फोरम (सीडीएसएसएफ), सेबी के परामर्श से उन वित्तीय सेवा गतिविधियों की सूची तय करेगा, जो संरक्षक कर सकते हैं। सेबी ने कहा कि ऐसे कस्टोडियन जो बैंक नहीं हैं, या बैंकों की अनुषंगी कंपनियां, सहयोगी या संयुक्त उद्यम नहीं हैं, उन्हें सेबी विनियमित और गैर-सेबी विनियमित वित्तीय सेवाओं को अलग-अलग एसबीयू के माध्यम से संचालित करना होगा।इसे भी पढ़ें: Subedaar Movie Review | अनिल कपूर का दमदार अभिनय, लेकिन कमजोर कहानी ने फीका किया फिल्म का असर सेबी ने बुधवार को जारी अपने परिपत्र में कहा, ‘‘एसबीयू के लिए समान दूरी के आधार पर अलग खाते तैयार और बनाए रखे जाएंगे, कस्टोडियन के लिए नेटवर्थ के मानदंड एसबीयू के बही-खातों को छोड़कर पूरे किए जाने चाहिए।’’ उन्हें निर्देश दिया गया है कि यदि वे गैर-विनियमित वित्तीय सेवाएं प्रदान करते हैं, तो वे ग्राहकों को इस बारे में बताएं और एक पावती प्राप्त करें कि सेबी ऐसी गतिविधियों से संबंधित शिकायतों का निपटारा नहीं करेगा।

PNSPNS
Mar 8, 2026 - 20:10
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SEBI का कस्टोडियंस के लिए नया फरमान: विनियमित और गैर-विनियमित सेवाओं को करना होगा अलग, नेटवर्थ के नियम भी बदले

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने बुधवार को गैर-बैंक कस्टोडियंस (Non-bank Custodians) के लिए नए परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के तहत अब कस्टोडियंस को अपनी विभिन्न वित्तीय सेवाओं को अलग-अलग रणनीतिक व्यापार इकाइयों (Strategic Business Units - SBU) के माध्यम से संचालित करना अनिवार्य होगा। इनमें इन इकाइयों के लिए अलग खाते बनाए रखने और इन व्यवसायों के लिए स्वतंत्र रूप से नेटवर्थ संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के निर्देश भी शामिल हैं।

इसे भी पढ़ें: US-India दोस्ती दान नहीं, Mutual Interest है, Raisina Dialogue में Christopher Landau का बड़ा बयान

नियामक ने अपने परिपत्र में कहा कि कस्टोडियन एंड डीडीपी स्टैंडर्ड्स सेटिंग फोरम (सीडीएसएसएफ), सेबी के परामर्श से उन वित्तीय सेवा गतिविधियों की सूची तय करेगा, जो संरक्षक कर सकते हैं। सेबी ने कहा कि ऐसे कस्टोडियन जो बैंक नहीं हैं, या बैंकों की अनुषंगी कंपनियां, सहयोगी या संयुक्त उद्यम नहीं हैं, उन्हें सेबी विनियमित और गैर-सेबी विनियमित वित्तीय सेवाओं को अलग-अलग एसबीयू के माध्यम से संचालित करना होगा।

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सेबी ने बुधवार को जारी अपने परिपत्र में कहा, ‘‘एसबीयू के लिए समान दूरी के आधार पर अलग खाते तैयार और बनाए रखे जाएंगे, कस्टोडियन के लिए नेटवर्थ के मानदंड एसबीयू के बही-खातों को छोड़कर पूरे किए जाने चाहिए।’’ उन्हें निर्देश दिया गया है कि यदि वे गैर-विनियमित वित्तीय सेवाएं प्रदान करते हैं, तो वे ग्राहकों को इस बारे में बताएं और एक पावती प्राप्त करें कि सेबी ऐसी गतिविधियों से संबंधित शिकायतों का निपटारा नहीं करेगा।

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