SAVE America Act Explained:अमेरिका में ट्रंप का SIR, क्यों मचा है इस पर सियासी घमासान, जानें हर सवाल का जवाब

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिनिधि सभा के रिपब्लिकन सदस्यों से कहा कि वे एक महत्वपूर्ण पक्षपातपूर्ण चुनाव विधेयक को नए प्रावधानों के साथ तीसरी बार पारित करें, और कहा कि मध्यावधि चुनावों से पहले यह रिपब्लिकन पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अपने गोल्फ रिसॉर्ट में एकत्रित सांसदों से ट्रंप ने कहा कि यह मध्यावधि चुनावों की गारंटी देगा। अगर आप इसे पारित नहीं कराते हैं, तो मेरी राय में बड़ी मुसीबत होगी। राष्ट्रपति ने लगभग एक घंटे के अपने भाषण के अंत में 13 मिनट यह स्पष्ट करने में बिताए कि उन्हें स्पीकर माइक जॉनसन और अन्य शीर्ष नेताओं से अपनी मांगों को पूरा करने की उम्मीद है। प्रतिनिधि सभा पहले ही उस विधेयक के दो संस्करण पारित कर चुकी है जिसे अब 'सेव अमेरिका एक्ट' कहा जाता है, जो मतदान के लिए सख्त नागरिकता और फोटो पहचान पत्र संबंधी नए नियम लागू करेगा। ट्रंप ने वहां मौजूद सांसदों से कहा कि वे मेल-इन वोटिंग पर रोक लगाने और ट्रांसजेंडर अधिकारों को निशाना बनाने वाले प्रावधान कानून में शामिल करें, भले ही इसके लिए नवंबर के चुनावों से पहले अपनी बाकी विधायी योजना को छोड़ना ही क्यों न पड़े। उन्होंने कहा कि हमें सीधा सबसे बड़े लक्ष्य पर जाना चाहिए। यह वास्तव में राष्ट्रीय अस्तित्व का गंभीर मामला है। हम इस तरह के चुनाव अब और नहीं होने दे सकते।इसे भी पढ़ें: ईरान के ड्रोन की वजह से टूटी पाकिस्तानियों की टांगे, हिल जाएगा भारत !कांग्रेस को कड़ी चेतावनीअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वोटिंग निचम कड़े करने वाले 'सेव अमेरिका एक्ट' को लेकर कांग्रेस को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रम्प ने कहा है कि जब तक यह बिल पारित नहीं होगा, वे किसी भी अन्य चिल पर साइन नहीं करेंगे। यह बिल 2023 में कांग्रेस में पेश हुआ था और 2026 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से पारित हो चुका है, लेकिन सीनेट में 60 वोट की शार्त के कारण अटका है। नार कानून के तहत मतदाता पंजीकरण और वोट डालने के समय नागरिकता साबित करने के लिए पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र या अन्य आधिकारिक दस्तावेज दिखाना अनिवार्य होगा। विपक्षी दल और ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस का कहना है कि अमेरिका के 2.13 करोड़ पात्र नागरिक (11%) ऐसे हैं जिनके पास नागरिकता साबित करने वाले जरूनी दस्तावेज तुरंत उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम कटने का खतरा है। यह मुदा इसलिए अक्षम है क्योंकि अगले 3 महीनों में अमेरिकी मध्यावधि चुनाव होने हैं, जिनमें हाउस की सभी 435 सीटों और सीनेट की 33 सीटों पर मतदान होना है। अमेरिका में 50 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनमें 25 लाख पात्र मतदाता हैं। इनमें बाड़ी संख्या नेचुरलाइज्ड नागरिकों की है, जिनके पास पुराने दस्तावेज हमेशा उपलब्ध नहीं है।इसे भी पढ़ें: गजब बेइज्जती है! ट्रंप को कुछ समझ ही नहीं रहा ईरान, अब कहा- तुमसे बड़े आए-गए, कहीं खुद का सफाया न हो जाएअमेरिका में 52% लोगों के पास पासपोर्ट नहीं तो 20% महिलाओं के नाम मिस मैच1. बोट देने के लिए पासपोर्ट, बर्थ सर्टिफिकेट अनिवार्यआपत्तिः बेनन सेंटर के अनुसार अमेरिका के 2.13 करोड़ पात्र नागरिक (11%) के पास नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज तुरंत उपलब्ध नहीं हैं। वहीं करीब 52% अमेरिकियों के पास पासपोर्ट नहीं है. इसलिए कई योग्य मतदाता पंजीकरण से बाहर हो सकते हैं।2. वोट डालने के लिए सरकारी फोटो आईडी अनिवार्यआपत्तिः शोभ बताते हैं कि अश्वेत महदाताओं में वैध फोटो अईडी न होने की संभावना श्वेतों की तुलना में लगभग 3 गुना अधिक है।इससे मतदान में नस्ली असमानता बढ़ने का खतरा बताया जा रहा है। 3.3. मेल-इन बैलेट (डाक मतदान) पर कड़ा प्रतिबंधआपत्तिः 2020 के अमेरिकी चुनाव में करीब 40% वोट मेल-इन बैलेट से पड़े थे। इसे सीमित करने से बुजुर्गों, दूर रहने वाले और कामकाजी मतदाताओं के लिए बोट देना कठिन हो सकता है।4. मतदाता सूची का गृह मंत्रालय के डेटाबेस से मिलानआपत्तिः विशेषज्ञों का दावा सरकारी डेटाबेस पूरी तरह सटीक नहीं। पिछले अभियानों में 5% वैध मतदाताओं के नाम गलती से हटे थे।5. दस्तावेज गलत होने पर चुनाव अधिकारियों पर मुकदमाआपत्तिः अमेरिका में बोटर फ्रॉड के मामले 0.0001% से भी कम पाए गए हैं। अधिकार समूहों का कहना है कि मुकदमे के डर से अधिकारी नए पंजीकरण करने से बच सकते हैं।6. शादी के बाद नाम बदलने वालों के दस्तावेज अलगआपत्तिः सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस के अनुसार अमेरिका में 6.9 करोड़ महिलाएं (20% महिला मतदाता) शादी के बाद उपनाम बदली हैं। दस्तावेज पुराने नाम से होने से सत्यापन में दिक्कत।

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Mar 12, 2026 - 10:05
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SAVE America Act Explained:अमेरिका में ट्रंप का SIR, क्यों मचा है इस पर सियासी घमासान, जानें हर सवाल का जवाब
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिनिधि सभा के रिपब्लिकन सदस्यों से कहा कि वे एक महत्वपूर्ण पक्षपातपूर्ण चुनाव विधेयक को नए प्रावधानों के साथ तीसरी बार पारित करें, और कहा कि मध्यावधि चुनावों से पहले यह रिपब्लिकन पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अपने गोल्फ रिसॉर्ट में एकत्रित सांसदों से ट्रंप ने कहा कि यह मध्यावधि चुनावों की गारंटी देगा। अगर आप इसे पारित नहीं कराते हैं, तो मेरी राय में बड़ी मुसीबत होगी। राष्ट्रपति ने लगभग एक घंटे के अपने भाषण के अंत में 13 मिनट यह स्पष्ट करने में बिताए कि उन्हें स्पीकर माइक जॉनसन और अन्य शीर्ष नेताओं से अपनी मांगों को पूरा करने की उम्मीद है। प्रतिनिधि सभा पहले ही उस विधेयक के दो संस्करण पारित कर चुकी है जिसे अब 'सेव अमेरिका एक्ट' कहा जाता है, जो मतदान के लिए सख्त नागरिकता और फोटो पहचान पत्र संबंधी नए नियम लागू करेगा। ट्रंप ने वहां मौजूद सांसदों से कहा कि वे मेल-इन वोटिंग पर रोक लगाने और ट्रांसजेंडर अधिकारों को निशाना बनाने वाले प्रावधान कानून में शामिल करें, भले ही इसके लिए नवंबर के चुनावों से पहले अपनी बाकी विधायी योजना को छोड़ना ही क्यों न पड़े। उन्होंने कहा कि हमें सीधा सबसे बड़े लक्ष्य पर जाना चाहिए। यह वास्तव में राष्ट्रीय अस्तित्व का गंभीर मामला है। हम इस तरह के चुनाव अब और नहीं होने दे सकते।

इसे भी पढ़ें: ईरान के ड्रोन की वजह से टूटी पाकिस्तानियों की टांगे, हिल जाएगा भारत !

कांग्रेस को कड़ी चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वोटिंग निचम कड़े करने वाले 'सेव अमेरिका एक्ट' को लेकर कांग्रेस को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रम्प ने कहा है कि जब तक यह बिल पारित नहीं होगा, वे किसी भी अन्य चिल पर साइन नहीं करेंगे। यह बिल 2023 में कांग्रेस में पेश हुआ था और 2026 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से पारित हो चुका है, लेकिन सीनेट में 60 वोट की शार्त के कारण अटका है। नार कानून के तहत मतदाता पंजीकरण और वोट डालने के समय नागरिकता साबित करने के लिए पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र या अन्य आधिकारिक दस्तावेज दिखाना अनिवार्य होगा। विपक्षी दल और ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस का कहना है कि अमेरिका के 2.13 करोड़ पात्र नागरिक (11%) ऐसे हैं जिनके पास नागरिकता साबित करने वाले जरूनी दस्तावेज तुरंत उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम कटने का खतरा है। यह मुदा इसलिए अक्षम है क्योंकि अगले 3 महीनों में अमेरिकी मध्यावधि चुनाव होने हैं, जिनमें हाउस की सभी 435 सीटों और सीनेट की 33 सीटों पर मतदान होना है। अमेरिका में 50 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनमें 25 लाख पात्र मतदाता हैं। इनमें बाड़ी संख्या नेचुरलाइज्ड नागरिकों की है, जिनके पास पुराने दस्तावेज हमेशा उपलब्ध नहीं है।

इसे भी पढ़ें: गजब बेइज्जती है! ट्रंप को कुछ समझ ही नहीं रहा ईरान, अब कहा- तुमसे बड़े आए-गए, कहीं खुद का सफाया न हो जाए

अमेरिका में 52% लोगों के पास पासपोर्ट नहीं तो 20% महिलाओं के नाम मिस मैच

1. बोट देने के लिए पासपोर्ट, बर्थ सर्टिफिकेट अनिवार्य
आपत्तिः बेनन सेंटर के अनुसार अमेरिका के 2.13 करोड़ पात्र नागरिक (11%) के पास नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज तुरंत उपलब्ध नहीं हैं। वहीं करीब 52% अमेरिकियों के पास पासपोर्ट नहीं है. इसलिए कई योग्य मतदाता पंजीकरण से बाहर हो सकते हैं।
2. वोट डालने के लिए सरकारी फोटो आईडी अनिवार्य
आपत्तिः शोभ बताते हैं कि अश्वेत महदाताओं में वैध फोटो अईडी न होने की संभावना श्वेतों की तुलना में लगभग 3 गुना अधिक है।
इससे मतदान में नस्ली असमानता बढ़ने का खतरा बताया जा रहा है। 3.
3. मेल-इन बैलेट (डाक मतदान) पर कड़ा प्रतिबंध
आपत्तिः 2020 के अमेरिकी चुनाव में करीब 40% वोट मेल-इन बैलेट से पड़े थे। इसे सीमित करने से बुजुर्गों, दूर रहने वाले और कामकाजी मतदाताओं के लिए बोट देना कठिन हो सकता है।
4. मतदाता सूची का गृह मंत्रालय के डेटाबेस से मिलान
आपत्तिः विशेषज्ञों का दावा सरकारी डेटाबेस पूरी तरह सटीक नहीं। पिछले अभियानों में 5% वैध मतदाताओं के नाम गलती से हटे थे।
5. दस्तावेज गलत होने पर चुनाव अधिकारियों पर मुकदमा
आपत्तिः अमेरिका में बोटर फ्रॉड के मामले 0.0001% से भी कम पाए गए हैं। अधिकार समूहों का कहना है कि मुकदमे के डर से अधिकारी नए पंजीकरण करने से बच सकते हैं।
6. शादी के बाद नाम बदलने वालों के दस्तावेज अलग
आपत्तिः सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस के अनुसार अमेरिका में 6.9 करोड़ महिलाएं (20% महिला मतदाता) शादी के बाद उपनाम बदली हैं। दस्तावेज पुराने नाम से होने से सत्यापन में दिक्कत।

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