Ram Raja Mandir Orchha: Orchha के Ram Raja, भारत का एकमात्र मंदिर जहां भगवान को मिलती है Guard of Honour

वैसे तो भारत में भगवान श्रीराम के हजारों मंदिर है। लेकिन मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में स्थित ओरछा एक ऐसी पावन नगरी है, जिसकी कहानी सबसे ज्यादा निराली है। यहां पर भगवान श्रीराम को 'ईश्वर' के रूप में नहीं बल्कि ओरछा के 'वैध राजा' के रूप में पूजा जाता है। वहीं ओरछा को 'बुंदेलखंड की अयोध्या' भी कहा जाता है और यहां की परंपराएं इतनी अनूठी है कि दुनिया में कहीं और ऐसा देखने को नहीं मिलता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको भारत के इस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर भगवान श्रीराम को राजा की तरह पूजते हैं।भक्ति और जिद की कहानीराम राजा के मंदिर का इतिहास करीब 500 साल पुराना है। वहीं इसका संबंध ओरछा के राजा मधुकर शाह और उनकी रानी कुंवरि गणेश से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक राजा मधुकर शाह भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त थे, जबकि रानी कुंवरि गणेश भगवान श्रीराम की अनन्य भक्त थीं।इसे भी पढ़ें: Ram Navami 2026: सदैव अनुकरणीय रहेंगे मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम के आदर्शएक बार राजा मधुकर शाह ने अपनी रानी को साथ वृंदावन चलने का आग्रह किया था। लेकिन रानी अयोध्या जाना चाहती थीं। इस बात पर दोनों के बीच बहस हो गई और राजा ने व्यंग्य करते हुए कहा, 'अगर तुम्हारे राम इतने बच्चे हैं, तो उनको अयोध्या से ओर लाकर दिखाओ।' रानी ने इस चुनौती को स्वीकार किया और यह ठान लिया कि वह अयोध्या से तभी लौटेंगी तब स्वयं रामलला उनके साथ होंगे।सफर और 3 शर्तेंजब रानी अयोध्या पहुंची, तो सरयू किनारे कठिन तपस्या की। जब भगवान प्रकट नहीं हुए तो उन्होंने सरयू में छलांग लगा दी। रानी की अटूट भक्ति को देखकर भगवान श्रीराम बालरूप में उनकी गोद में प्रकट हुए। स्थानीय कथाओं के मुताबिक भगवान श्रीराम ने ओरछा चलने के लिए रानी के सामने तीन बड़ी शर्तें रखी थीं।पहली शर्त थी कि वह पुष्य नक्षत्र में यात्रा करेंगे, दूसरी शर्त है कि उनको जहां पहली बार बिठा दिया जाएगा, वह वहीं स्थापित हो जाएंगे। वहीं तीसरी शर्त थी कि ओरछा पहुंचने के बाद उनकी सत्ता होगी, वहां पर कोई दूसरा राजा राज नहीं करेगा।महल बना मंदिरजब रानी रामलला को लेकर ओरछा पहुंची, तो रात हो चुकी थी। इसलिए उन्होंने प्रतिमा को महल की रसोई में रख दिया। लेकिन जब अगले दिन वह विशाल 'चतुर्भुज मंदिर' में भगवान को लेकर जाने की कोशिश करने लगी। तो प्रतिमा टस से मस नहीं हुई। भगवान की शर्त के मुताबिक रसोई ही रामलला का स्थायी निवास बन गई, जिसको आज हम राम राजा मंदिर के रूप में जानते हैं।माना जाता है कि तब से भगवान रात के हाथों में ओरछा की पूरी सत्ता है। राजा मधुकर शाह ने अपना राजपाठ भगवान राम के चरणों में सौंप दिया। आज भी यहां पुलिस के जवान चारों पहर भगवान को 'गार्ड ऑफ ऑनर' देते हैं।

PNSPNS
Mar 28, 2026 - 12:35
 0
Ram Raja Mandir Orchha: Orchha के Ram Raja, भारत का एकमात्र मंदिर जहां भगवान को मिलती है Guard of Honour
वैसे तो भारत में भगवान श्रीराम के हजारों मंदिर है। लेकिन मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में स्थित ओरछा एक ऐसी पावन नगरी है, जिसकी कहानी सबसे ज्यादा निराली है। यहां पर भगवान श्रीराम को 'ईश्वर' के रूप में नहीं बल्कि ओरछा के 'वैध राजा' के रूप में पूजा जाता है। वहीं ओरछा को 'बुंदेलखंड की अयोध्या' भी कहा जाता है और यहां की परंपराएं इतनी अनूठी है कि दुनिया में कहीं और ऐसा देखने को नहीं मिलता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको भारत के इस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर भगवान श्रीराम को राजा की तरह पूजते हैं।

भक्ति और जिद की कहानी

राम राजा के मंदिर का इतिहास करीब 500 साल पुराना है। वहीं इसका संबंध ओरछा के राजा मधुकर शाह और उनकी रानी कुंवरि गणेश से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक राजा मधुकर शाह भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त थे, जबकि रानी कुंवरि गणेश भगवान श्रीराम की अनन्य भक्त थीं।

इसे भी पढ़ें: Ram Navami 2026: सदैव अनुकरणीय रहेंगे मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम के आदर्श


एक बार राजा मधुकर शाह ने अपनी रानी को साथ वृंदावन चलने का आग्रह किया था। लेकिन रानी अयोध्या जाना चाहती थीं। इस बात पर दोनों के बीच बहस हो गई और राजा ने व्यंग्य करते हुए कहा, 'अगर तुम्हारे राम इतने बच्चे हैं, तो उनको अयोध्या से ओर लाकर दिखाओ।' रानी ने इस चुनौती को स्वीकार किया और यह ठान लिया कि वह अयोध्या से तभी लौटेंगी तब स्वयं रामलला उनके साथ होंगे।

सफर और 3 शर्तें

जब रानी अयोध्या पहुंची, तो सरयू किनारे कठिन तपस्या की। जब भगवान प्रकट नहीं हुए तो उन्होंने सरयू में छलांग लगा दी। रानी की अटूट भक्ति को देखकर भगवान श्रीराम बालरूप में उनकी गोद में प्रकट हुए। स्थानीय कथाओं के मुताबिक भगवान श्रीराम ने ओरछा चलने के लिए रानी के सामने तीन बड़ी शर्तें रखी थीं।

पहली शर्त थी कि वह पुष्य नक्षत्र में यात्रा करेंगे, दूसरी शर्त है कि उनको जहां पहली बार बिठा दिया जाएगा, वह वहीं स्थापित हो जाएंगे। वहीं तीसरी शर्त थी कि ओरछा पहुंचने के बाद उनकी सत्ता होगी, वहां पर कोई दूसरा राजा राज नहीं करेगा।

महल बना मंदिर

जब रानी रामलला को लेकर ओरछा पहुंची, तो रात हो चुकी थी। इसलिए उन्होंने प्रतिमा को महल की रसोई में रख दिया। लेकिन जब अगले दिन वह विशाल 'चतुर्भुज मंदिर' में भगवान को लेकर जाने की कोशिश करने लगी। तो प्रतिमा टस से मस नहीं हुई। भगवान की शर्त के मुताबिक रसोई ही रामलला का स्थायी निवास बन गई, जिसको आज हम राम राजा मंदिर के रूप में जानते हैं।

माना जाता है कि तब से भगवान रात के हाथों में ओरछा की पूरी सत्ता है। राजा मधुकर शाह ने अपना राजपाठ भगवान राम के चरणों में सौंप दिया। आज भी यहां पुलिस के जवान चारों पहर भगवान को 'गार्ड ऑफ ऑनर' देते हैं।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow