Pramod Mahajan Death Anniversary: भाजपा के 'लक्ष्मण' माने जाते थे प्रमोद महाजन, सियासी सितारे की भाई ने कर दी थी हत्या

आज ही के दिन यानी की 03 मई को भाजपा के कद्दावर नेता प्रमोद महाजन की हत्या कर दी गई थी। यह हत्या किसी और ने नहीं बल्कि प्रमोद महाजन के छोटे भाई प्रवीण महाजन ने की थी। प्मोद महाजन को गजब के संभावनाओं वाला नेता कहा जाता था। वह हमेशा मीडिया के सामने मुस्कुराते हुए आते थे। प्रमोद महाजन को कभी पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने पार्टी का लक्ष्मण कहा था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर प्रमोद महाजन के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और शिक्षातेलंगाना के महबूबनगर में 30 अक्तूबर 1949 को प्रमोद महाजन का जन्म हुआ था। स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही प्रमोद महाजन संघ से जुड़ गए थे। उन्होंने पुणे के रानाडे इंस्टीट्यूट ऑफ जर्नलिज्म से पत्रकारिता की पढ़ाई की थी। लेकिन इस क्षेत्र में कुछ खास न कर पाने के बाद वह एक कॉलेज में अंग्रेजी के टीचर बन गए। उनके पिता पेशे से शिक्षक थे। वहीं वह 22 साल के थे, जब उनके सिर से पिता का साया उठ गया था।संघ प्रचारकप्रमोद महाजन को शुरूआत से ही दिलचस्पी थी, वह राजनीतिक बहसों में भी हिस्सा लिया करते थे। साल 1974 में उन्होंने कॉलेज में पढ़ाना बंद कर दिया था। संघ से जुड़ने के बाद आरएसएस के मराठी अखबार 'तरुण भारत' में काम करना शुरूकर दिया और वह जल्द ही उप संपादक बन गए। फिर वह पूरी तरह से संघ के लिए काम करने लगे। साल 1974 में प्रमोद महाजन को संघ प्रचारक बनाया गया औऱ वह लगातार तीन बार भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष भी रहे।इसे भी पढ़ें: Morarji Desai Death Anniversary: लंबे समय तक PM पद के दावेदार रहे मोरारजी देसाई, फिर ऐसे बनें भारत के पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्रीजब देश में आपातकाल लगा तो प्रमोद महाजन ने आरएसएस के लिए जमकर काम करते हुए इंदिरा विरोध मार्च निकाला था। संघ के प्रति उनकी निष्ठा देखते हुए उनको भाजपा में शामिल कर लिया गया। यहीं से प्रमोद महाजन के राजनीतिक सफर की शुरूआत हुई थी। साल 1983 से लेकर 1985 तक वह भाजपा के अखिल भारतीय सचिव थे। इसके बाद साल 1986 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने। फिर साल 1984 में उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा था। लेकिन इस दौरान उनको हार का सामना करना पड़ा था।बीजेपी ने भेजा राज्‍यसभाजब साल 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी सत्ता पर काबिज हुए, उसी दौरान उन्होंने अपना पहला लोकसभा चुनाव जीते और रक्षा मंत्री बनाया गया। लेकिन यह सरकार महज 13 दिन चल सकी। फिर साल 1998 में एक बार फिर चुनाव हुए और भाजपा ने सत्ता में वापसी की। लेकिन प्रमोद महाजन हार गए और उनको राज्यसभा भेजा गया। राजनीति में प्रमोद महाजन वह नाम थे, जो कम समय में शीर्ष पर पहुंच गए।मृत्युप्रमोद महाजन 22 अप्रैल 2006 को मुंबई में वर्ली स्थित अपने आवास पर मौजूद थे। तभी उनके छोटे भाई प्रवीण महाजन उनसे मिलने पहुंचे और दोनों भाइयों के बीच किसी बात को लेकर बहस हो गई। इसी दौरान बहस इतनी बढ़ी कि प्रवीण ने प्रमोद पर रिवॉल्वर तान दी और फायर कर दिया। जिसके बाद उनको आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन इलाज के दौरान 03 मई 2006 को उनकी मृत्यु हो गई।

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May 4, 2025 - 03:31
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Pramod Mahajan Death Anniversary: भाजपा के 'लक्ष्मण' माने जाते थे प्रमोद महाजन, सियासी सितारे की भाई ने कर दी थी हत्या
आज ही के दिन यानी की 03 मई को भाजपा के कद्दावर नेता प्रमोद महाजन की हत्या कर दी गई थी। यह हत्या किसी और ने नहीं बल्कि प्रमोद महाजन के छोटे भाई प्रवीण महाजन ने की थी। प्मोद महाजन को गजब के संभावनाओं वाला नेता कहा जाता था। वह हमेशा मीडिया के सामने मुस्कुराते हुए आते थे। प्रमोद महाजन को कभी पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने पार्टी का लक्ष्मण कहा था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर प्रमोद महाजन के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और शिक्षा
तेलंगाना के महबूबनगर में 30 अक्तूबर 1949 को प्रमोद महाजन का जन्म हुआ था। स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही प्रमोद महाजन संघ से जुड़ गए थे। उन्होंने पुणे के रानाडे इंस्टीट्यूट ऑफ जर्नलिज्म से पत्रकारिता की पढ़ाई की थी। लेकिन इस क्षेत्र में कुछ खास न कर पाने के बाद वह एक कॉलेज में अंग्रेजी के टीचर बन गए। उनके पिता पेशे से शिक्षक थे। वहीं वह 22 साल के थे, जब उनके सिर से पिता का साया उठ गया था।

संघ प्रचारक
प्रमोद महाजन को शुरूआत से ही दिलचस्पी थी, वह राजनीतिक बहसों में भी हिस्सा लिया करते थे। साल 1974 में उन्होंने कॉलेज में पढ़ाना बंद कर दिया था। संघ से जुड़ने के बाद आरएसएस के मराठी अखबार 'तरुण भारत' में काम करना शुरूकर दिया और वह जल्द ही उप संपादक बन गए। फिर वह पूरी तरह से संघ के लिए काम करने लगे। साल 1974 में प्रमोद महाजन को संघ प्रचारक बनाया गया औऱ वह लगातार तीन बार भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष भी रहे।

इसे भी पढ़ें: Morarji Desai Death Anniversary: लंबे समय तक PM पद के दावेदार रहे मोरारजी देसाई, फिर ऐसे बनें भारत के पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री

जब देश में आपातकाल लगा तो प्रमोद महाजन ने आरएसएस के लिए जमकर काम करते हुए इंदिरा विरोध मार्च निकाला था। संघ के प्रति उनकी निष्ठा देखते हुए उनको भाजपा में शामिल कर लिया गया। यहीं से प्रमोद महाजन के राजनीतिक सफर की शुरूआत हुई थी। साल 1983 से लेकर 1985 तक वह भाजपा के अखिल भारतीय सचिव थे। इसके बाद साल 1986 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने। फिर साल 1984 में उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा था। लेकिन इस दौरान उनको हार का सामना करना पड़ा था।

बीजेपी ने भेजा राज्‍यसभा
जब साल 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी सत्ता पर काबिज हुए, उसी दौरान उन्होंने अपना पहला लोकसभा चुनाव जीते और रक्षा मंत्री बनाया गया। लेकिन यह सरकार महज 13 दिन चल सकी। फिर साल 1998 में एक बार फिर चुनाव हुए और भाजपा ने सत्ता में वापसी की। लेकिन प्रमोद महाजन हार गए और उनको राज्यसभा भेजा गया। राजनीति में प्रमोद महाजन वह नाम थे, जो कम समय में शीर्ष पर पहुंच गए।

मृत्यु
प्रमोद महाजन 22 अप्रैल 2006 को मुंबई में वर्ली स्थित अपने आवास पर मौजूद थे। तभी उनके छोटे भाई प्रवीण महाजन उनसे मिलने पहुंचे और दोनों भाइयों के बीच किसी बात को लेकर बहस हो गई। इसी दौरान बहस इतनी बढ़ी कि प्रवीण ने प्रमोद पर रिवॉल्वर तान दी और फायर कर दिया। जिसके बाद उनको आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन इलाज के दौरान 03 मई 2006 को उनकी मृत्यु हो गई।

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