महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में एक बार फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर का अंतर्विरोध खुलकर सामने आ गया है। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और दिवंगत नेता अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद NCP में अंदरूनी कलह तेज हो गई है। पार्टी के ही एक वरिष्ठ नेता ने इस चुनाव प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देते हुए इसे पूरी तरह 'असंवैधानिक' करार दिया है और 15 दिनों के भीतर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है।
क्या है पूरा विवाद?
NCP के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार के अध्यक्ष चुने जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने दिल्ली की एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म 'ARS एसोसिएट्स' के जरिए 9 जुलाई को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को एक कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस में दावा किया गया है कि इस साल 26 फरवरी को हुआ राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव असंवैधानिक था, इसलिए इसे तत्काल प्रभाव से "अमान्य, शून्य और निष्प्रभावी" घोषित किया जाना चाहिए। यह कानूनी नोटिस खुद सुनेत्रा पवार, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजा गया है।
सुनेत्रा पवार, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजे गए नोटिस में आरोप लगाया गया कि चुनाव प्रक्रिया NCP पार्टी के संविधान के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना और प्रतिनिधियों तथा पदाधिकारियों को उचित सूचना दिए बिना शुरू की गई थी।
नोटिस के अनुसार, 28 जनवरी को तत्कालीन NCP अध्यक्ष अजीत पवार के निधन के बाद, पार्टी ने चुनाव आयोग को सूचित किया था कि नया प्रमुख चुने जाने तक पटेल कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में काम करेंगे।
सुनेत्रा पवार के चुनाव को चुनौती देने का कारण क्या है?
यह कानूनी विवाद 28 जनवरी, 2026 को अजीत पवार की मृत्यु के बाद शुरू हुआ। सिंह के अनुसार, पार्टी ने 17 फरवरी, 2026 को चुनाव आयोग को एक संशोधित संविधान सौंपा था। इसके तहत, राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने तक कार्यवाहक अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल को अध्यक्ष की सभी शक्तियां दी गई थीं।
सिंह का तर्क है कि संशोधित संविधान के अनुसार, केवल प्रफुल्ल पटेल को ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाने का अधिकार था। ऐसे में पार्टी महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव ने 26 फरवरी को बैठक कैसे बुला ली? उन्होंने नोटिस में यह भी आरोप लगाया कि 18 फरवरी को चुनाव आयोग को नेशनल एग्जीक्यूटिव की बैठक बुलाने के लिए जो पत्र भेजा गया था, उसे उस समय के एग्जीक्यूटिव सदस्यों ने मंज़ूरी नहीं दी थी। इससे बाद में हुए चुनावों की वैधता पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद श्रीवास्तव ने नेशनल कन्वेंशन बुलाया और चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी, जबकि उनके पास ऐसा करने का संवैधानिक अधिकार नहीं था।
नोटिस में दावा किया गया, "पार्टी के संविधान के मुताबिक कोई भी सही तरीके से गठित केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण, रिटर्निंग ऑफिसर या चुनाव कैलेंडर नहीं बनाया गया था। डेलीगेट्स को उम्मीदवार नॉमिनेट करने, चुनाव लड़ने या वोट देने का मौका नहीं दिया गया।"
सिंह ने चुनाव आयोग को भेजे गए पार्टी के कम्युनिकेशन को वापस लेने की मांग की
सिंह ने मांग की है कि इस साल 28 फरवरी, 10 मार्च और 29 अप्रैल को चुनाव आयोग को भेजे गए पार्टी के कम्युनिकेशन को वापस लिया जाए, जिनमें चुनाव और पदाधिकारियों का ज़िक्र था। साथ ही, उन्होंने एक स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण के तहत नए सिरे से संगठनात्मक चुनाव कराने की मांग की है।
नोटिस में पार्टी लीडरशिप को इन मांगों को पूरा करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। ऐसा न करने पर याचिकाकर्ता ने आगे कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखा है। संपर्क करने पर NCP के प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने कहा कि सिंह 26 फरवरी को नेशनल कन्वेंशन में मौजूद थे और उन्होंने हाथ उठाकर सुनेत्रा पवार के पक्ष में वोट दिया था। चव्हाण ने ज़ोर देकर कहा, "उनके चुनाव में सभी नियमों का पालन किया गया था।"