Manikya Gemstone: सूर्य का रत्न पहनने से पहले जानें ये Rules, वरना फायदे की जगह होगा बड़ा नुकसान

रत्नों की दुनिया में माणिक्य रत्न को 'रत्नों का राजा' माना जाता है। माणिक्य रत्न न सिर्फ दिखने में काफी ज्यादा खूबसूरत और आकर्षित होता है। वहीं ज्योतिष शास्त्र में माणिक्य रत्न को सबसे शक्तिशाली रत्नों में से एक माना जाता है। माणिक्य लाल रंग का रत्न होता है और यह सीधे तौर पर ग्रहों के राजा सूर्य से संबंधित है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको माणिक्य रत्न की खासियत और इसके लाभ के बारे में बताने जा रहे हैं।सूर्य का आशीर्वाद और माणिक्य रत्नज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सूर्य पिता के साथ संबंधों, आत्मविश्वास, मान सम्मान और नेतृत्व क्षमता का कारक है। जब किसी की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, तो उसको अक्सर शारीरिक कमजोरी, असफलता और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में माणिक्य धारण करने से सूर्य की ऊर्जा को सक्रिय करने का काम करता है।इसे भी पढ़ें: Maa Lakshmi Puja: Friday को करें मां लक्ष्मी के ये 5 अचूक उपाय, घर में होगी धन की वर्षा, मिलेगा Good Luckलाभअगर आप भीड़ में बोलने से या फिर फैसले लेने से डरते हैं। तो माणिक्य धारण करने से आपके अंदर एक नई ऊर्जा और साहस आती है।शास्त्रीय ग्रंथ फलदीपिका के आधार पर जो लोग राजनीति, प्रशासनिक सेवाओं या उच्च पदों पर जाना चाहते हैं। उनके लिए माणिक्य धारण करना भाग्य को खोलने वाला माना जाता है।माणिक्य पहनने से आंखों की रोशनी में सुधार होता है और हृदय संबंधी समस्याओं में सुधार होता है। इसको धारण करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।माणिक्य रत्न को धारण करने से पिता के साथ चल रहे वैचारिक मतभेद दूर होते हैं और समाज में आपका रुतबा बढ़ता है।जानिए किसे नहीं पहनना चाहिएबता दें कि माणिक्य जितना प्रभावशाली है, उतना ही संवेदनशील भी है। अगर आपकी कुंडली में सूर्य की स्थिति प्रतिकूल है, तो इसको पहनने से आपको आंखों में जलन, सिरदर्द या अहंकार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। माणिक्य रत्न को कभी भी नीलम, हीरा या गोमेद के साथ पहनने की सलाह नहीं दी जाती है। क्योंकि यह ग्रह आपस में शत्रुता रखते हैं।ऐसे करें धारणमाणिक्य रत्न को हमेशा सोने या तांबे की अंगूठी में पहनना चाहिए। रविवार को सुबह सूर्योदय के समय गंगाजल और कच्चे दूध से अंगूठी को शुद्ध कर लें। फिर अनामिका उंगली में इस अंगूठी को धारण करें।

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Feb 27, 2026 - 22:03
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Manikya Gemstone: सूर्य का रत्न पहनने से पहले जानें ये Rules, वरना फायदे की जगह होगा बड़ा नुकसान
रत्नों की दुनिया में माणिक्य रत्न को 'रत्नों का राजा' माना जाता है। माणिक्य रत्न न सिर्फ दिखने में काफी ज्यादा खूबसूरत और आकर्षित होता है। वहीं ज्योतिष शास्त्र में माणिक्य रत्न को सबसे शक्तिशाली रत्नों में से एक माना जाता है। माणिक्य लाल रंग का रत्न होता है और यह सीधे तौर पर ग्रहों के राजा सूर्य से संबंधित है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको माणिक्य रत्न की खासियत और इसके लाभ के बारे में बताने जा रहे हैं।

सूर्य का आशीर्वाद और माणिक्य रत्न

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सूर्य पिता के साथ संबंधों, आत्मविश्वास, मान सम्मान और नेतृत्व क्षमता का कारक है। जब किसी की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, तो उसको अक्सर शारीरिक कमजोरी, असफलता और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में माणिक्य धारण करने से सूर्य की ऊर्जा को सक्रिय करने का काम करता है।

इसे भी पढ़ें: Maa Lakshmi Puja: Friday को करें मां लक्ष्मी के ये 5 अचूक उपाय, घर में होगी धन की वर्षा, मिलेगा Good Luck


लाभ

अगर आप भीड़ में बोलने से या फिर फैसले लेने से डरते हैं। तो माणिक्य धारण करने से आपके अंदर एक नई ऊर्जा और साहस आती है।

शास्त्रीय ग्रंथ फलदीपिका के आधार पर जो लोग राजनीति, प्रशासनिक सेवाओं या उच्च पदों पर जाना चाहते हैं। उनके लिए माणिक्य धारण करना भाग्य को खोलने वाला माना जाता है।

माणिक्य पहनने से आंखों की रोशनी में सुधार होता है और हृदय संबंधी समस्याओं में सुधार होता है। इसको धारण करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

माणिक्य रत्न को धारण करने से पिता के साथ चल रहे वैचारिक मतभेद दूर होते हैं और समाज में आपका रुतबा बढ़ता है।

जानिए किसे नहीं पहनना चाहिए

बता दें कि माणिक्य जितना प्रभावशाली है, उतना ही संवेदनशील भी है। अगर आपकी कुंडली में सूर्य की स्थिति प्रतिकूल है, तो इसको पहनने से आपको आंखों में जलन, सिरदर्द या अहंकार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। माणिक्य रत्न को कभी भी नीलम, हीरा या गोमेद के साथ पहनने की सलाह नहीं दी जाती है। क्योंकि यह ग्रह आपस में शत्रुता रखते हैं।

ऐसे करें धारण

माणिक्य रत्न को हमेशा सोने या तांबे की अंगूठी में पहनना चाहिए। रविवार को सुबह सूर्योदय के समय गंगाजल और कच्चे दूध से अंगूठी को शुद्ध कर लें। फिर अनामिका उंगली में इस अंगूठी को धारण करें।

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