Laal Singh Chaddha फ्लॉप होने का गम नहीं, Naga Chaitanya बोले- Aamir Khan के साथ अनुभव खास रहा

साउथ इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बना चुके नागा चैतन्य  ने साल 2022 में आमिर खान के साथ फिल्म लाल सिंह चड्ढा के जरिए हिंदी सिनेमा में कदम रखा था। हालांकि फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिली, लेकिन चैतन्य के लिए यह अनुभव किसी मायने में नकारात्मक नहीं रहा। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म के बाद उन्होंने अब तक कोई नई हिंदी फिल्म साइन नहीं की है—और इसकी वजह वो किसी असफलता को नहीं मानते।  इसे भी पढ़ें: 'सिगरेट नहीं पी, बस फोन तोड़े थे'... R Madhavan से तुलना पर Paresh Rawal का जवाब हुआ Viralचैतन्य का कहना है कि हिंदी फिल्मों से दूरी किसी खास रणनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि पिछले कुछ समय से वह अपने साउथ प्रोजेक्ट्स में इतने व्यस्त रहे कि उनका पूरा फोकस वहीं चला गया। उनके मुताबिक, “ऐसा नहीं है कि मैं हिंदी फिल्मों के बारे में सोच नहीं रहा। मैं पूरी तरह खुला हूं, बस फिलहाल जिन फिल्मों पर काम कर रहा हूं, उन्होंने मेरा काफी समय और ऊर्जा ली है। लेकिन मैं हिंदी में फिर से कुछ खास करने का इंतजार कर रहा हूं।”जब उनसे पूछा गया कि क्या फिल्म लाल सिंह चड्ढा के ठंडे रिस्पॉन्स ने उन्हें हिंदी फिल्मों के चुनाव को लेकर ज्यादा सतर्क बना दिया है, तो उन्होंने इसे साफ तौर पर नकार दिया। उनका कहना है कि उस फिल्म की शूटिंग का अनुभव उनके लिए बेहद खास रहा। उन्होंने वहां बहुत कुछ सीखा और पूरी टीम से उन्हें भरपूर सहयोग मिला। उनके शब्दों में, “हर फिल्म का सफर अलग होता है—कभी सफलता मिलती है, कभी नहीं। लेकिन इससे मेरे सोचने का तरीका नहीं बदला। मैं आज भी उतना ही उत्साहित हूं जितना पहले था।” इसे भी पढ़ें: पोल्का डॉट ड्रेस में दिखीं Nupur Sanon, क्या घर आने वाला है नन्हा मेहमान?अपनी मौजूदा व्यस्तता के बारे में बात करते हुए चैतन्य बताते हैं कि उनकी आने वाली फिल्म Thandel और प्रोजेक्ट Vrushakarma काफी जटिल हैं। खासतौर पर Vrushakarma में VFX का बड़ा रोल है, जिससे पूरी प्रक्रिया लंबी और मेहनत भरी हो जाती है। वह कहते हैं कि इस तरह की फिल्मों में प्री-प्रोडक्शन से लेकर शूटिंग तक हर चीज में काफी बारीकी और समय लगता है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि वह किसी खास प्लानिंग के तहत हिंदी फिल्मों से दूर हैं—असल में वह सिर्फ अपने मौजूदा काम को पूरा समर्पण देना चाहते हैं।जहां एक तरफ इंडस्ट्री में अब भाषाओं की सीमाएं धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं और साउथ व हिंदी सिनेमा के बीच क्रॉसओवर बढ़ रहा है, वहीं चैतन्य इस ट्रेंड को लेकर भी काफी सहज नजर आते हैं। उनके लिए “सही समय” से ज्यादा अहम है “सही स्क्रिप्ट”। उनका मानना है कि आज का दर्शक हर भाषा की फिल्मों को खुले दिल से स्वीकार कर रहा है, इसलिए एक अभिनेता के लिए भाषा अब कोई रुकावट नहीं रही। चैतन्य साफ तौर पर कहते हैं कि वह हिंदी फिल्मों में वापसी के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन शर्त सिर्फ इतनी है कि कहानी और किरदार उन्हें भीतर से उत्साहित करें। वह ऐसे फिल्ममेकर्स के साथ काम करना चाहते हैं जिनके साथ उनका जुड़ाव बने और जहां काम का सफर उतना ही यादगार हो जितना नतीजा। उनके लिए असली मायने उसी सफर के हैं, जो उन्हें एक बेहतर कलाकार बनाता है—चाहे वह किसी भी भाषा की फिल्म क्यों न हो।

PNSPNS
Apr 3, 2026 - 12:22
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Laal Singh Chaddha फ्लॉप होने का गम नहीं, Naga Chaitanya बोले- Aamir Khan के साथ अनुभव खास रहा
साउथ इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बना चुके नागा चैतन्य  ने साल 2022 में आमिर खान के साथ फिल्म लाल सिंह चड्ढा के जरिए हिंदी सिनेमा में कदम रखा था। हालांकि फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिली, लेकिन चैतन्य के लिए यह अनुभव किसी मायने में नकारात्मक नहीं रहा। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म के बाद उन्होंने अब तक कोई नई हिंदी फिल्म साइन नहीं की है—और इसकी वजह वो किसी असफलता को नहीं मानते।  

इसे भी पढ़ें: 'सिगरेट नहीं पी, बस फोन तोड़े थे'... R Madhavan से तुलना पर Paresh Rawal का जवाब हुआ Viral

चैतन्य का कहना है कि हिंदी फिल्मों से दूरी किसी खास रणनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि पिछले कुछ समय से वह अपने साउथ प्रोजेक्ट्स में इतने व्यस्त रहे कि उनका पूरा फोकस वहीं चला गया। उनके मुताबिक, “ऐसा नहीं है कि मैं हिंदी फिल्मों के बारे में सोच नहीं रहा। मैं पूरी तरह खुला हूं, बस फिलहाल जिन फिल्मों पर काम कर रहा हूं, उन्होंने मेरा काफी समय और ऊर्जा ली है। लेकिन मैं हिंदी में फिर से कुछ खास करने का इंतजार कर रहा हूं।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या फिल्म लाल सिंह चड्ढा के ठंडे रिस्पॉन्स ने उन्हें हिंदी फिल्मों के चुनाव को लेकर ज्यादा सतर्क बना दिया है, तो उन्होंने इसे साफ तौर पर नकार दिया। उनका कहना है कि उस फिल्म की शूटिंग का अनुभव उनके लिए बेहद खास रहा। उन्होंने वहां बहुत कुछ सीखा और पूरी टीम से उन्हें भरपूर सहयोग मिला। उनके शब्दों में, “हर फिल्म का सफर अलग होता है—कभी सफलता मिलती है, कभी नहीं। लेकिन इससे मेरे सोचने का तरीका नहीं बदला। मैं आज भी उतना ही उत्साहित हूं जितना पहले था।” 

इसे भी पढ़ें: पोल्का डॉट ड्रेस में दिखीं Nupur Sanon, क्या घर आने वाला है नन्हा मेहमान?

अपनी मौजूदा व्यस्तता के बारे में बात करते हुए चैतन्य बताते हैं कि उनकी आने वाली फिल्म Thandel और प्रोजेक्ट Vrushakarma काफी जटिल हैं। खासतौर पर Vrushakarma में VFX का बड़ा रोल है, जिससे पूरी प्रक्रिया लंबी और मेहनत भरी हो जाती है। वह कहते हैं कि इस तरह की फिल्मों में प्री-प्रोडक्शन से लेकर शूटिंग तक हर चीज में काफी बारीकी और समय लगता है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि वह किसी खास प्लानिंग के तहत हिंदी फिल्मों से दूर हैं—असल में वह सिर्फ अपने मौजूदा काम को पूरा समर्पण देना चाहते हैं।

जहां एक तरफ इंडस्ट्री में अब भाषाओं की सीमाएं धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं और साउथ व हिंदी सिनेमा के बीच क्रॉसओवर बढ़ रहा है, वहीं चैतन्य इस ट्रेंड को लेकर भी काफी सहज नजर आते हैं। उनके लिए “सही समय” से ज्यादा अहम है “सही स्क्रिप्ट”। उनका मानना है कि आज का दर्शक हर भाषा की फिल्मों को खुले दिल से स्वीकार कर रहा है, इसलिए एक अभिनेता के लिए भाषा अब कोई रुकावट नहीं रही। चैतन्य साफ तौर पर कहते हैं कि वह हिंदी फिल्मों में वापसी के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन शर्त सिर्फ इतनी है कि कहानी और किरदार उन्हें भीतर से उत्साहित करें। वह ऐसे फिल्ममेकर्स के साथ काम करना चाहते हैं जिनके साथ उनका जुड़ाव बने और जहां काम का सफर उतना ही यादगार हो जितना नतीजा। उनके लिए असली मायने उसी सफर के हैं, जो उन्हें एक बेहतर कलाकार बनाता है—चाहे वह किसी भी भाषा की फिल्म क्यों न हो।

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