Jinping के विशेष दूत वेनेजुएला में थे मौजूद, 3 घंटे मादुरो संग हुई मीटिंग, तभी अचानक अमेरिका ने कर दिया अटैक, अब क्या चीन खुलकर मैदान में उतरने की हिम्मत कर पाएगा?
नए साल को आए अभी दो दिन ही नहीं बीते थे कि दुनिया में एक नए जंग की शुरुआत हो गई। अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर दिया। गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मादुरो की हथकड़ी और आंखों पर पट्टी बंधी हुई, ग्रे नाइकी टेक ट्रैकसूट पहने हुए एक तस्वीर साझा की। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन होने तक अमेरिका ही शासन संभालेगा। हालांकि, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार को संकेत दिया कि अमेरिका वेनेजुएला के शासन में दैनिक हस्तक्षेप नहीं करेगा, सिवाय देश पर लागू तेल प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के। मादुरो की अनुपस्थिति में, वेनेजुएला के सर्वोच्च न्यायालय ने देश की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज़ को कार्यवाहक राष्ट्रपति का पदभार संभालने का आदेश दिया है। लेकिन सबसे दिलचस्प बात ये है कि ये हमला उस समय में हुआ जब चीन के विशेष दूत वेनेजुएला की राजधानी में थे। हमले से पहले तीन घंटे तक राष्ट्रपति मादुरो ने चीन के दूतों के साथ बातचीत भी की। उनके रहते अमेरिका ने हमला किया। ऐसे में ये भी माना जा रहा है कि अमेरिका चीन को कोई संदेश दे रहा है। वेनेजुएला से सबसे अधिक ईंधन की सप्लाई, कच्चे तेल की सप्पलाई चीन को होती है। सबकी नजर इस बात पर होगी की वेनेजुएला पर कंट्रोल के बाद ट्रंप चीन को होने वाली सप्लाई को लेकर क्या फैसला करते हैं और चीन जवाब में क्या करता है।इसे भी पढ़ें: काबुल से बग़दाद तक, अमेरिका का ‘Regime Change’ मॉडल कितना कारगर? चीन क्या अमेरिका के खिलाफ मैदान में उतरेगा?अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर चीन को बड़ी चुनौती दी है। चीन ने संयम की अपील की है। चीन ने हमले से पहले वेनेजुएला को सपोर्ट करने का वादा किया था। लेकिन वेनेजुएला के राष्ट्रपति को कैद करके अमेरिका ले जाने के बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रपति को इस तरह अपने देश ले जाना गलत है। इस मुद्दे का हल बातचीत से होना चाहिए। इससे पहले भी चीन ने अमेरिका की कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। अब ऐसे में वेनेजुएला की मदद के लिए चीन सपोर्ट के वादे पर अमेरिका के खिलाफ मैदान में उतरेगा? या फिर चुपचाप बयान देकर साइड हो जाएगा। चीन वैसे तो कभी अमेरिका के बहकावे में नहीं आता और न ही ट्रंप की लड़ने की चुनौती को स्वीकार करता है। मगर पीछे भी नहीं हटता।इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने अमेरिका में लाभ उठाने वाले प्रवासियों के संदर्भ में देशों की सूची जारी की, भारत का नाम शामिल नहीं चीन पर बड़ा असरचीन वेनेजुएला से तेल खरीदने में सबसे आगे हैं। उसने फरवरी 2025 में वेनेजुएला लगभग 5,03,000 बैरल प्रति दिन तेल खरीदा, जो वेनेजुएला के कुल निर्यात का 55% है। अमेरिका के हमले से वेनेजुएला का तेल सप्लाई प्रभावित होगा, जिसका असर खरीदार देशों पर होगा। उन देशों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, परिवहन, मैन्युफैक्चरिंग की लागत बढ़ सकती है। जियो पॉलिटिकल टेंशन की वजह से तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है। अगर इस हमले से सप्लाई चेन टूटता है तो भारत से ज्यादा असर चीन पर देखने को मिलेगा।
नए साल को आए अभी दो दिन ही नहीं बीते थे कि दुनिया में एक नए जंग की शुरुआत हो गई। अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर दिया। गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मादुरो की हथकड़ी और आंखों पर पट्टी बंधी हुई, ग्रे नाइकी टेक ट्रैकसूट पहने हुए एक तस्वीर साझा की। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन होने तक अमेरिका ही शासन संभालेगा। हालांकि, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार को संकेत दिया कि अमेरिका वेनेजुएला के शासन में दैनिक हस्तक्षेप नहीं करेगा, सिवाय देश पर लागू तेल प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के। मादुरो की अनुपस्थिति में, वेनेजुएला के सर्वोच्च न्यायालय ने देश की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज़ को कार्यवाहक राष्ट्रपति का पदभार संभालने का आदेश दिया है। लेकिन सबसे दिलचस्प बात ये है कि ये हमला उस समय में हुआ जब चीन के विशेष दूत वेनेजुएला की राजधानी में थे। हमले से पहले तीन घंटे तक राष्ट्रपति मादुरो ने चीन के दूतों के साथ बातचीत भी की। उनके रहते अमेरिका ने हमला किया। ऐसे में ये भी माना जा रहा है कि अमेरिका चीन को कोई संदेश दे रहा है। वेनेजुएला से सबसे अधिक ईंधन की सप्लाई, कच्चे तेल की सप्पलाई चीन को होती है। सबकी नजर इस बात पर होगी की वेनेजुएला पर कंट्रोल के बाद ट्रंप चीन को होने वाली सप्लाई को लेकर क्या फैसला करते हैं और चीन जवाब में क्या करता है।
इसे भी पढ़ें: काबुल से बग़दाद तक, अमेरिका का ‘Regime Change’ मॉडल कितना कारगर?
चीन क्या अमेरिका के खिलाफ मैदान में उतरेगा?
अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर चीन को बड़ी चुनौती दी है। चीन ने संयम की अपील की है। चीन ने हमले से पहले वेनेजुएला को सपोर्ट करने का वादा किया था। लेकिन वेनेजुएला के राष्ट्रपति को कैद करके अमेरिका ले जाने के बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रपति को इस तरह अपने देश ले जाना गलत है। इस मुद्दे का हल बातचीत से होना चाहिए। इससे पहले भी चीन ने अमेरिका की कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। अब ऐसे में वेनेजुएला की मदद के लिए चीन सपोर्ट के वादे पर अमेरिका के खिलाफ मैदान में उतरेगा? या फिर चुपचाप बयान देकर साइड हो जाएगा। चीन वैसे तो कभी अमेरिका के बहकावे में नहीं आता और न ही ट्रंप की लड़ने की चुनौती को स्वीकार करता है। मगर पीछे भी नहीं हटता।
इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने अमेरिका में लाभ उठाने वाले प्रवासियों के संदर्भ में देशों की सूची जारी की, भारत का नाम शामिल नहीं
चीन पर बड़ा असर
चीन वेनेजुएला से तेल खरीदने में सबसे आगे हैं। उसने फरवरी 2025 में वेनेजुएला लगभग 5,03,000 बैरल प्रति दिन तेल खरीदा, जो वेनेजुएला के कुल निर्यात का 55% है। अमेरिका के हमले से वेनेजुएला का तेल सप्लाई प्रभावित होगा, जिसका असर खरीदार देशों पर होगा। उन देशों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, परिवहन, मैन्युफैक्चरिंग की लागत बढ़ सकती है। जियो पॉलिटिकल टेंशन की वजह से तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है। अगर इस हमले से सप्लाई चेन टूटता है तो भारत से ज्यादा असर चीन पर देखने को मिलेगा।
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