Japan में Piyush Goyal का बड़ा वादा, Semiconductor और AI सेक्टर के लिए आसान होंगे BIS Certification से जुड़े कड़े नियम

भारत में सेमीकंडक्टर और एआई से जुड़े उद्योगों के लिए कारोबार आसान बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम पहल के संकेत दिए हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 25 अगस्त को जापान के टोक्यो में आयोजित सेमीकंडक्टर और एआई क्षेत्र से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों की बैठक में कहा कि सरकार भारतीय मानक ब्यूरो के प्रमाणन से जुड़ी मौजूदा जरूरतों को आसान बनाने के लिए नया ढांचा तैयार करेगी।पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य भारत को इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाना है। उनके मुताबिक, सेमीकंडक्टर उद्योग इस समय देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारें भी इस क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों को पूरा सहयोग देंगी।बैठक के दौरान जापानी कंपनियों की ओर से भारतीय मानक ब्यूरो के प्रमाणन से जुड़ी कुछ परेशानियां सामने रखी गईं। मौजूद जानकारी के अनुसार, कंपनियों ने विशेष रूप से उन उपकरणों और कलपुर्जों के आयात से जुड़े नियमों पर चिंता जताई, जिनका इस्तेमाल भारत में मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां स्थापित करने के लिए किया जाना है।पीयूष गोयल ने कहा कि उन्होंने इन चिंताओं को गंभीरता से लिया है। उन्होंने वाणिज्य मंत्रालय और भारतीय मानक ब्यूरो को इस दिशा में काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कुछ मामलों में प्रमाणन की जरूरत से छूट देने का विकल्प रखा जा सकता है।उन्होंने बताया कि यह छूट पूरे क्षेत्र, किसी विशेष कंपनी, उत्पाद या परियोजना के स्तर पर दी जा सकती है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने वाली कंपनियों को जरूरी सामान, उपकरण और सेवाओं की आपूर्ति में अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।गौरतलब है कि भारत पिछले कुछ वर्षों से सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत आधार तैयार करने पर जोर दे रहा है। मोबाइल फोन से लेकर वाहन, दूरसंचार उपकरण और एआई से जुड़े उत्पादों तक में चिप की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में घरेलू स्तर पर चिप निर्माण और उससे जुड़े आपूर्ति तंत्र को मजबूत करना सरकार की प्रमुख औद्योगिक प्राथमिकताओं में शामिल है।जापान को इस प्रयास में महत्वपूर्ण साझेदार के तौर पर देखा जा रहा है। पीयूष गोयल ने भारत और जापान के बीच उन्नत तकनीक और विनिर्माण के क्षेत्र में बढ़ती साझेदारी को दोनों देशों के लिए बड़ा अवसर बताया। उन्होंने जापानी कंपनियों को भारत में संभावित साझेदारों और निवेशकों की पहचान करने में मदद देने की भी बात कही।बता दें कि सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत वैश्विक कंपनियों को देश में उत्पादन बढ़ाने और नई मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां स्थापित करने के लिए आकर्षित कर रहा है। प्रमाणन और नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने से नई परियोजनाओं की शुरुआत तेज होने और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

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Aug 26, 2026 - 04:31
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Japan में Piyush Goyal का बड़ा वादा, Semiconductor और AI सेक्टर के लिए आसान होंगे BIS Certification से जुड़े कड़े नियम
भारत में सेमीकंडक्टर और एआई से जुड़े उद्योगों के लिए कारोबार आसान बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम पहल के संकेत दिए हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 25 अगस्त को जापान के टोक्यो में आयोजित सेमीकंडक्टर और एआई क्षेत्र से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों की बैठक में कहा कि सरकार भारतीय मानक ब्यूरो के प्रमाणन से जुड़ी मौजूदा जरूरतों को आसान बनाने के लिए नया ढांचा तैयार करेगी।

पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य भारत को इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाना है। उनके मुताबिक, सेमीकंडक्टर उद्योग इस समय देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारें भी इस क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों को पूरा सहयोग देंगी।

बैठक के दौरान जापानी कंपनियों की ओर से भारतीय मानक ब्यूरो के प्रमाणन से जुड़ी कुछ परेशानियां सामने रखी गईं। मौजूद जानकारी के अनुसार, कंपनियों ने विशेष रूप से उन उपकरणों और कलपुर्जों के आयात से जुड़े नियमों पर चिंता जताई, जिनका इस्तेमाल भारत में मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां स्थापित करने के लिए किया जाना है।

पीयूष गोयल ने कहा कि उन्होंने इन चिंताओं को गंभीरता से लिया है। उन्होंने वाणिज्य मंत्रालय और भारतीय मानक ब्यूरो को इस दिशा में काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कुछ मामलों में प्रमाणन की जरूरत से छूट देने का विकल्प रखा जा सकता है।

उन्होंने बताया कि यह छूट पूरे क्षेत्र, किसी विशेष कंपनी, उत्पाद या परियोजना के स्तर पर दी जा सकती है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने वाली कंपनियों को जरूरी सामान, उपकरण और सेवाओं की आपूर्ति में अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।

गौरतलब है कि भारत पिछले कुछ वर्षों से सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत आधार तैयार करने पर जोर दे रहा है। मोबाइल फोन से लेकर वाहन, दूरसंचार उपकरण और एआई से जुड़े उत्पादों तक में चिप की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में घरेलू स्तर पर चिप निर्माण और उससे जुड़े आपूर्ति तंत्र को मजबूत करना सरकार की प्रमुख औद्योगिक प्राथमिकताओं में शामिल है।

जापान को इस प्रयास में महत्वपूर्ण साझेदार के तौर पर देखा जा रहा है। पीयूष गोयल ने भारत और जापान के बीच उन्नत तकनीक और विनिर्माण के क्षेत्र में बढ़ती साझेदारी को दोनों देशों के लिए बड़ा अवसर बताया। उन्होंने जापानी कंपनियों को भारत में संभावित साझेदारों और निवेशकों की पहचान करने में मदद देने की भी बात कही।

बता दें कि सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत वैश्विक कंपनियों को देश में उत्पादन बढ़ाने और नई मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां स्थापित करने के लिए आकर्षित कर रहा है। प्रमाणन और नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने से नई परियोजनाओं की शुरुआत तेज होने और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

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