पश्चिम एशिया में युद्ध की आग अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ईरान और अमेरिका के बीच सीधा सैन्य टकराव लगातार तेज होता जा रहा है, जबकि इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र में दिखाई देने लगा है। मिसाइल और ड्रोन हमलों, समुद्री मार्गों की नाकेबंदी तथा तेल टैंकरों पर हमलों के बीच होरमुज जलडमरूमध्य संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। इसी दौरान ओमान के समुद्री क्षेत्र में होरमुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे संयुक्त अरब अमीरात के ध्वज वाले दो तेल टैंकरों पर हुए मिसाइल हमले में एक भारतीय चालक दल के सदस्य की मौत और कई अन्य लोगों के घायल होने के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर ईरान के उप मिशन प्रमुख मोहम्मद जवाद होसेनी समेत ईरानी राजनयिकों को तलब कर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और हमले पर स्पष्टीकरण मांगा है। भारत ने व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अपनी गंभीर चिंता भी ईरान के समक्ष स्पष्ट रूप से रखी है।
जहां तक गहराते युद्ध की बात है तो आपको बता दें कि ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़ा हमला किया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड का कहना है कि बहरीन के जुफैर नौसैनिक अड्डे पर स्थित अमेरिकी हथियार भंडार, उपग्रह संचार केंद्र और अमेरिकी सैनिकों के आवास को निशाना बनाया गया। इसी अड्डे पर अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय है। हालांकि अमेरिका और बहरीन ने अभी तक इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है, लेकिन बहरीन में दूसरी बार मिसाइल चेतावनी सायरन बजने से तनाव की गंभीरता साफ झलकती है।
इस बीच, अमेरिका ने भी ईरान के सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए हैं। वॉशिंगटन का कहना है कि उसका उद्देश्य होरमुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ईरान की समुद्री हमले करने की क्षमता को कमजोर करना है। ईरानी सरकारी माध्यमों के अनुसार बंदर अब्बास और किश्म द्वीप सहित कई दक्षिणी बंदरगाहों में विस्फोट हुए हैं और सैन्य कर्मियों के हताहत होने की खबरें भी सामने आई हैं।
तनाव की जड़ होरमुज जलडमरूमध्य बना हुआ है। ईरान का दावा है कि उसने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही रोक दी है और अनधिकृत मार्गों से गुजरने वाले पोतों को रोका जा रहा है। दूसरी ओर अमेरिका इस मार्ग को अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता बताते हुए नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने पर अड़ा है। ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने दो विशाल तेल टैंकरों को निष्क्रिय कर दिया क्योंकि उन्होंने चेतावनियों की अनदेखी की, अपने नौवहन उपकरण बंद कर दिए और कथित रूप से खतरनाक मार्ग से गुजरने की कोशिश की।
संघर्ष का सबसे दुखद असर नागरिक समुद्री यातायात पर भी पड़ा है। संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय के अनुसार ओमान के समुद्री क्षेत्र में होरमुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे संयुक्त अरब अमीरात के ध्वज वाले दो तेल टैंकरों पर ईरानी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। इस हमले में एक भारतीय चालक दल के सदस्य की मौत हो गई, जबकि आठ लोग घायल हुए। घायलों में छह भारतीय और दो यूक्रेन के नागरिक शामिल हैं। दोनों टैंकरों में आग लग गई, हालांकि बाद में उस पर काबू पा लिया गया। इस घटना ने भारत सहित कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।
संयुक्त अरब अमीरात ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताते हुए ईरान की कड़ी निंदा की है। उसने होरमुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने, व्यावसायिक जहाजों पर हमले रोकने और समुद्री व्यापार को बाधित करने की कोशिशों को आर्थिक दबाव तथा समुद्री डकैती करार दिया है। साथ ही भारत के मृतक नागरिक के परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की गई है।
युद्ध का दायरा अब कई खाड़ी देशों तक फैल चुका है। कतर, कुवैत, बहरीन, जार्डन, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात ने मिसाइल या ड्रोन गतिविधियों की सूचना दी है। जॉर्डन ने बताया कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली ईरान से दागी गई चार मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन जॉर्डन ने इसे अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है। वहीं ओमान ने अपने क्षेत्र में ड्रोन हमलों के बाद तेहरान के समक्ष औपचारिक विरोध दर्ज कराया है, जबकि कतर ने इसे बेहद खतरनाक उकसावा बताया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अमेरिकी संसद को औपचारिक रूप से सूचित किया है कि सात जुलाई से ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान फिर शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि होरमुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हमलों के बाद युद्धविराम का उल्लंघन हुआ और अमेरिकी नागरिकों तथा राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई आवश्यक थी। ट्रंप ने यह दावा भी किया कि अमेरिकी हमलों से ईरान की नौसेना, वायुसेना, वायु रक्षा व्यवस्था और शीर्ष सैन्य नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व की ताकत लगभग समाप्त हो चुकी है।
समुद्री तनाव के बीच किश्म द्वीप के निकट दो मालवाहक जहाजों की टक्कर की घटना भी सामने आई। ईरान ने विदेशी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लेने का दावा किया है, हालांकि दुर्घटना के कारणों और जहाजों की स्थिति को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
उधर, लगातार बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी हिला दिया है। दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट से कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में भारी उतार चढ़ाव बना हुआ है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है, जबकि ओमान और कतर दोनों पक्षों के बीच बातचीत के रास्ते खुले रखने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने यह साफ कर दिया है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को लंबे और विनाशकारी युद्ध की ओर धकेल सकता है।