Hormuz में टकराए भारत-पाकिस्तान नेवी के युद्धपोत? फिर जो हुआ...

स्टेट ऑफ हार्मोंस के बेहद संवेदनशील समुद्री इलाके में अचानक भारत और पाकिस्तान की युद्धपोत गतिविधि ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रीट ऑफ हॉर्मोस से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। जिसमें दावा किया गया है कि भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के जहाज बेहद करीब ऑपरेट करते नजर आए। दोनों देशों के जहाजों के बीच दूरी लगभग 18 समुद्री यानी करीब 33 किमी बताई जा रही है। जिससे समुद्री सुरक्षा एजेंसियों में भी हलचल मच गई। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस विश्लेषक डेमियन साइमन ने इस गतिविधि को लेकर जानकारी साझा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्ट पर बताया है कि ओमान के तट के पास दोनों देशों के युद्धपोत समानांतर रूप से सक्रिय नजर आए।  उनका कहना है कि क्षेत्र में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच दोनों नौसेनाएं अपने-अपने व्यापारिक और रणनीतिक हितों की सुरक्षा में जुटी हुई हैं। सूत्रों के अनुसार भारतीय नौसेना ने ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक अपनी उपस्थिति और मजबूत कर दी है। इसे भी पढ़ें: तेल, गैस...भारत का दिल देखो, मुसीबत में एक नहीं अनेक देशों को कर रहा मददभारतीय युद्धपोतों को खासतौर पर एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले जहाजों की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। एक अधिकारी के मुताबिक नौसेना ना केवल इन जहाजों की ट्रैकिंग कर रही है बल्कि उन्हें सुरक्षित मार्ग भी उपलब्ध करा रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। अनुमान यह भी है कि इस समय 10 से अधिक भारतीय जहाज इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि युद्ध विराम की स्थिति बनी हुई है। लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी गहरे हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाए। जबकि तेहरान इस [संगीत] पर सहमत बिल्कुल नहीं दिख रहा। इसी बीच दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की वार्ता की संभावना भी बन रही हैं। ईरान ने संकेत दिए हैं कि यदि कोई ठोस समझौता होता है तो वो स्टेट ऑफ हॉर्मो से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित सुनिश्चित करने में सहयोग कर सकता है। इसके बदले ईरान अपनी अर्थव्यवस्था पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है। इसे भी पढ़ें: पाकिस्‍तान बनेगा कूटनीति का केंद्र! US-Iran संकट पर सोमवार को दूसरे दौर की वार्ता संभववर्षों से प्रतिबंध झेल रहे ईरान के लिए यह वार्ता आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्टेट ऑफ हॉर्मोस दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की हलचल अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर सीधा असर डाल सकती है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया है कि ईरान के साथ बातचीत में प्रगति हो रही है। उन्होंने यह भी कहा है कि अगर कोई शांति समझौता होता है तो वह उसमें शामिल हो सकते हैं। साथ ही ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि यह समझौता इस्लामाबाद में फाइनल होता है तो वह पाकिस्तान जाने पर विचार कर सकते हैं। ???? Rare moment off Oman near the Strait of HormuzWarships of the Indian Navy & Pakistan Navy operated just 18 nautical miles apartBoth securing merchant shipping amid West Asia tensionsIndia safeguarding critical energy routes under Operation Urja Suraksha#India #Pakistán pic.twitter.com/DvQdZVnT4A— InsightsofWave (@InsightsofWave) April 17, 2026

PNSPNS
Apr 19, 2026 - 06:20
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Hormuz में टकराए भारत-पाकिस्तान नेवी के युद्धपोत? फिर जो हुआ...
स्टेट ऑफ हार्मोंस के बेहद संवेदनशील समुद्री इलाके में अचानक भारत और पाकिस्तान की युद्धपोत गतिविधि ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रीट ऑफ हॉर्मोस से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। जिसमें दावा किया गया है कि भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के जहाज बेहद करीब ऑपरेट करते नजर आए। दोनों देशों के जहाजों के बीच दूरी लगभग 18 समुद्री यानी करीब 33 किमी बताई जा रही है। जिससे समुद्री सुरक्षा एजेंसियों में भी हलचल मच गई। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस विश्लेषक डेमियन साइमन ने इस गतिविधि को लेकर जानकारी साझा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्ट पर बताया है कि ओमान के तट के पास दोनों देशों के युद्धपोत समानांतर रूप से सक्रिय नजर आए।  उनका कहना है कि क्षेत्र में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच दोनों नौसेनाएं अपने-अपने व्यापारिक और रणनीतिक हितों की सुरक्षा में जुटी हुई हैं। सूत्रों के अनुसार भारतीय नौसेना ने ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक अपनी उपस्थिति और मजबूत कर दी है। 

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भारतीय युद्धपोतों को खासतौर पर एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले जहाजों की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। एक अधिकारी के मुताबिक नौसेना ना केवल इन जहाजों की ट्रैकिंग कर रही है बल्कि उन्हें सुरक्षित मार्ग भी उपलब्ध करा रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। अनुमान यह भी है कि इस समय 10 से अधिक भारतीय जहाज इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि युद्ध विराम की स्थिति बनी हुई है। लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी गहरे हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाए। जबकि तेहरान इस [संगीत] पर सहमत बिल्कुल नहीं दिख रहा। इसी बीच दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की वार्ता की संभावना भी बन रही हैं। ईरान ने संकेत दिए हैं कि यदि कोई ठोस समझौता होता है तो वो स्टेट ऑफ हॉर्मो से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित सुनिश्चित करने में सहयोग कर सकता है। इसके बदले ईरान अपनी अर्थव्यवस्था पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है। 

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वर्षों से प्रतिबंध झेल रहे ईरान के लिए यह वार्ता आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्टेट ऑफ हॉर्मोस दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की हलचल अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर सीधा असर डाल सकती है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया है कि ईरान के साथ बातचीत में प्रगति हो रही है। उन्होंने यह भी कहा है कि अगर कोई शांति समझौता होता है तो वह उसमें शामिल हो सकते हैं। साथ ही ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि यह समझौता इस्लामाबाद में फाइनल होता है तो वह पाकिस्तान जाने पर विचार कर सकते हैं। 

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