Holi Purnima 2026 Date: Holi Purnima 2026 पर महासंयोग, जानें Date, शुभ मुहूर्त और Lunar Eclipse का Time

होली पूर्णिमा को फाल्गुन पूर्णिमा, वसंत पूर्णिमा, डोल पूर्णिमा और फागुन पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन लोग व्रत करते हैं और शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है। होली पूर्णिमा पर स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। इस बार आज यानी की होली पूर्णिमा पर साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। जिसका सूतक 03 मार्च 2026 की सुबह 09:20 मिनट से शुरू हो रहा है। ऐसे में सूतक काल लगने से पहले ही पूर्णिमा से जुड़े धार्मिक कर्मकांड संपन्न कर लेना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं पूर्णिमा की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और कथा के बारे में...तिथि व मुहूर्तबता दें कि होली पूर्णिमा का पर्व 03 मार्च 2026 को मनाया जा रहा है। 02 मार्च की दोपहर 05:55 मिनट से पूर्णिमा तिथि की शुरूआत हो चुकी है। वहीं इस तिथि की समाप्ति आज यानी की 03 मार्च 2026 की शाम 05:07 मिनट तक रहेगी। पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय का समय शाम 05:51 मिनट का है।पूजन विधिहोली पूर्णिमा के दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नरसिंह की पूजा करने का विधान है। इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर घर के मंदिर में दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें। यह व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक रखा जाता है। गाय के गोबर से होलिका का निर्माण करें। एक थाली में गुड़, माला, पुष्प, साबुत हल्दी, कच्चा सूत, नारियल, गुलाल, बताशे, मूंग दाल, रोली, गेंहूं की बालियां और एक लोटा जल रखें।अब भगवान नरसिंह का ध्यान करते हुए बनाई गई होलिका पर अक्षत, रोली, फूल और बताशे आदि अर्पित करें। फिर मौली को होलिका के चारों ओर 5, 7 या 11 बार लपेटें। अब होलिका पर प्रह्लाद का नाम लेकर पुष्प अर्पित करें। भगवान नरसिंह का नाम लेते हुए होलिका पर 5 तरह के अनाज चढ़ाएं। अब होलिका दहन करें और फिर परिवार सहित होलिका की परिक्रमा करें। इसके बाद होलिका की अग्नि में गुलाल अर्पित करें।होली पूर्णिमा कथाफाल्गुन माह की पूर्णिमा पर राक्षसी होलिका भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई थी। जिससे कि प्रह्लाद की मृत्यु हो जाए। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ, बल्कि राक्षसी होलिका खुद जलकर खाक हो गई। माना जाता है कि इसलिए हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है।

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Mar 3, 2026 - 13:01
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Holi Purnima 2026 Date: Holi Purnima 2026 पर महासंयोग, जानें Date, शुभ मुहूर्त और Lunar Eclipse का Time
होली पूर्णिमा को फाल्गुन पूर्णिमा, वसंत पूर्णिमा, डोल पूर्णिमा और फागुन पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन लोग व्रत करते हैं और शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है। होली पूर्णिमा पर स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। इस बार आज यानी की होली पूर्णिमा पर साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। जिसका सूतक 03 मार्च 2026 की सुबह 09:20 मिनट से शुरू हो रहा है। ऐसे में सूतक काल लगने से पहले ही पूर्णिमा से जुड़े धार्मिक कर्मकांड संपन्न कर लेना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं पूर्णिमा की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और कथा के बारे में...

तिथि व मुहूर्त

बता दें कि होली पूर्णिमा का पर्व 03 मार्च 2026 को मनाया जा रहा है। 02 मार्च की दोपहर 05:55 मिनट से पूर्णिमा तिथि की शुरूआत हो चुकी है। वहीं इस तिथि की समाप्ति आज यानी की 03 मार्च 2026 की शाम 05:07 मिनट तक रहेगी। पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय का समय शाम 05:51 मिनट का है।

पूजन विधि

होली पूर्णिमा के दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नरसिंह की पूजा करने का विधान है। इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर घर के मंदिर में दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें। यह व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक रखा जाता है। गाय के गोबर से होलिका का निर्माण करें। एक थाली में गुड़, माला, पुष्प, साबुत हल्दी, कच्चा सूत, नारियल, गुलाल, बताशे, मूंग दाल, रोली, गेंहूं की बालियां और एक लोटा जल रखें।

अब भगवान नरसिंह का ध्यान करते हुए बनाई गई होलिका पर अक्षत, रोली, फूल और बताशे आदि अर्पित करें। फिर मौली को होलिका के चारों ओर 5, 7 या 11 बार लपेटें। अब होलिका पर प्रह्लाद का नाम लेकर पुष्प अर्पित करें। भगवान नरसिंह का नाम लेते हुए होलिका पर 5 तरह के अनाज चढ़ाएं। अब होलिका दहन करें और फिर परिवार सहित होलिका की परिक्रमा करें। इसके बाद होलिका की अग्नि में गुलाल अर्पित करें।

होली पूर्णिमा कथा

फाल्गुन माह की पूर्णिमा पर राक्षसी होलिका भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई थी। जिससे कि प्रह्लाद की मृत्यु हो जाए। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ, बल्कि राक्षसी होलिका खुद जलकर खाक हो गई। माना जाता है कि इसलिए हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है।

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