Hindu Mythology: क्यों कहलाती हैं मां लक्ष्मी 'चंचला'? जानें Goddess of Wealth से जुड़ा यह बड़ा Secret

हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। हर व्यक्ति यह चाहता है कि उनके घर-परिवार पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मां लक्ष्मी को 'चंचला' क्यों कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में मान्यताओं में मां लक्ष्मी को चंचला कहने के पीछे एक विशेष कारण बताया गया है। मान्यता के मुताबिक जिस घर में परिश्रम, स्वच्छता, दान-पुण्य और धर्म का पालन होता है, वहां पर मां लक्ष्मी का वास होता है। वहीं जिस घर में अहंकार, आलस, कलह और अनैतिक कार्य बढ़ जाते हैं, वहां पर मां लक्ष्मी वास नहीं करती हैं। इसी वजह से मां लक्ष्मी को चंचला कहा जाता है।चंचल मन से की गई मां लक्ष्मी की तुलनासंस्कृत भाषा में 'चंचला' का अर्थ होता है, जो एक स्थान पर स्थिर न रहे, जैसे कि हमारा मन। आपने अक्सर लोगों से यह सुना होगा कि मन बहुत चंचल होता है। हमारा मन गतिशील रहता है। मां लक्ष्मी को चंचला नाम देने के पीछे की वजह यह है कि धन और संपत्ति कभी भी स्थायी नहीं होती है। जीवन में धन का आना-जाना एक स्वाभाविक प्रक्रिया होती है। आज जो व्यक्ति धनवान है, वह भविष्य में आर्थिक समस्याओं में घिर सकता है। वहीं कठिन परिस्थितियों में रहने वाला समय में धनी और समृद्ध बन सकता है।इसे भी पढ़ें: City of Thousand Temples: भारत की 'City of Thousand Temples', जानिए क्यों है इतनी खास यह नगरीवहीं पुराणों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि समुद्र मंथन के समय मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। मां लक्ष्मी ने भगवान श्रीहरि विष्णु को अपना पति चुना और क्षीर सागर में वास करने लगीं। वहीं भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार माना जाता है और वह संतुलन बनाए रखने का काम करते हैं। इसलिए माना जाता है कि लक्ष्मी भी उस स्थान पर ज्यादा समय रहती हैं, जहां पर अनुशासन, संतुलन और सद्गुण मौजूद होते हैं।लक्ष्मी प्राप्ति के सूत्ररोजाना घर की पहली रोटी गाय को और आखिरी रोटी कुत्ते को देना चाहिए। ऐसा करने से भाग्य का द्वार खुलता है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।हर शुक्रवार को नियमित रूप से श्रीसूक्त या लक्ष्मी सूक्त का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी का उस स्थान पर स्थायी वास होता है।रोजाना सुबह उठकर सबसे पहले मुख्यद्वार पर गृहलक्ष्मी को एक लोटा जल डालना चाहिए। इससे मां लक्ष्मी के घर आने का मार्ग प्रशस्त होता है।घर में पूजा के दौरान घी का जो दीपक जलाया जाता है, उसमें रुई की बत्ती की जगह मौली का इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि मां लक्ष्मी को लाल रंग अतिप्रिय है।

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Jul 6, 2026 - 12:59
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Hindu Mythology: क्यों कहलाती हैं मां लक्ष्मी 'चंचला'? जानें Goddess of Wealth से जुड़ा यह बड़ा Secret
हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। हर व्यक्ति यह चाहता है कि उनके घर-परिवार पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मां लक्ष्मी को 'चंचला' क्यों कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में मान्यताओं में मां लक्ष्मी को चंचला कहने के पीछे एक विशेष कारण बताया गया है। मान्यता के मुताबिक जिस घर में परिश्रम, स्वच्छता, दान-पुण्य और धर्म का पालन होता है, वहां पर मां लक्ष्मी का वास होता है। वहीं जिस घर में अहंकार, आलस, कलह और अनैतिक कार्य बढ़ जाते हैं, वहां पर मां लक्ष्मी वास नहीं करती हैं। इसी वजह से मां लक्ष्मी को चंचला कहा जाता है।

चंचल मन से की गई मां लक्ष्मी की तुलना

संस्कृत भाषा में 'चंचला' का अर्थ होता है, जो एक स्थान पर स्थिर न रहे, जैसे कि हमारा मन। आपने अक्सर लोगों से यह सुना होगा कि मन बहुत चंचल होता है। हमारा मन गतिशील रहता है। मां लक्ष्मी को चंचला नाम देने के पीछे की वजह यह है कि धन और संपत्ति कभी भी स्थायी नहीं होती है। जीवन में धन का आना-जाना एक स्वाभाविक प्रक्रिया होती है। आज जो व्यक्ति धनवान है, वह भविष्य में आर्थिक समस्याओं में घिर सकता है। वहीं कठिन परिस्थितियों में रहने वाला समय में धनी और समृद्ध बन सकता है।

इसे भी पढ़ें: City of Thousand Temples: भारत की 'City of Thousand Temples', जानिए क्यों है इतनी खास यह नगरी


वहीं पुराणों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि समुद्र मंथन के समय मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। मां लक्ष्मी ने भगवान श्रीहरि विष्णु को अपना पति चुना और क्षीर सागर में वास करने लगीं। वहीं भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार माना जाता है और वह संतुलन बनाए रखने का काम करते हैं। इसलिए माना जाता है कि लक्ष्मी भी उस स्थान पर ज्यादा समय रहती हैं, जहां पर अनुशासन, संतुलन और सद्गुण मौजूद होते हैं।

लक्ष्मी प्राप्ति के सूत्र

रोजाना घर की पहली रोटी गाय को और आखिरी रोटी कुत्ते को देना चाहिए। ऐसा करने से भाग्य का द्वार खुलता है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

हर शुक्रवार को नियमित रूप से श्रीसूक्त या लक्ष्मी सूक्त का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी का उस स्थान पर स्थायी वास होता है।

रोजाना सुबह उठकर सबसे पहले मुख्यद्वार पर गृहलक्ष्मी को एक लोटा जल डालना चाहिए। इससे मां लक्ष्मी के घर आने का मार्ग प्रशस्त होता है।

घर में पूजा के दौरान घी का जो दीपक जलाया जाता है, उसमें रुई की बत्ती की जगह मौली का इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि मां लक्ष्मी को लाल रंग अतिप्रिय है।

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