Guru Tegh Bahadur Birth Anniversary: 13 साल में उठाई तलवार, जानें 'हिंद की चादर' बनने का पूरा सफर

सिख धर्म में गुरु तेग बहादुर का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। आज ही के दिन यानी की 01 अप्रैल को गुरु तेग बहादुर का जन्म हुआ था। गुरु तेग बहादुर ने मुगलों के अत्याचार से पीड़ित हिंदू समाज को बचाने के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया था। गुरु तेग बहादुर को 'हिंद की चादर' भी कहा जाता था। उन्होंने अपना सिर कलम कराना मंजूर कर लिया, लेकिन इस्लाम स्वीकार नहीं किया था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर गुरु तेग बहादुर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और परिवारपंजाब के अमृतसर में 01 अप्रैल 1621 को गुरु तेग बहादुर का जन्म हुआ था। इनके बचपन का नाम त्यागमल था। उनके पिता का नाम गुरु हरगोबिंद साहिब और मां का नाम नानकी था। गुरु हरगोविंद सिंह सिखों के छठे गुरु थे। माना जाता है कि त्यागमल ने महज 13 साल की उम्र में मुगलों के खिलाफ लड़ने के लिए तलवार उठा ली थी। जिसके चलते उनके पिता ने इनका नाम बदलकर तेग बहादुर रख दिया था। लंबे समय तक गुरु तेग बहादुर ने बकाला में आध्यात्मिक साधना की और बाद में सिखों के 9वें गुरु बने।इसे भी पढ़ें: Avantibai Lodhi Death Anniversary: चूड़ियां भेजकर British Rule को दी चुनौती, जानें वीरांगना महारानी अवंतीबाई की शौर्यगाथाहिंद की चादरबता दें कि गुरु तेग बहादुर 'हिंद की चादर' कहा जाता है। क्योंकि उन्होंने मुगलों के अत्याचार के आगे कभी घुटने नहीं टेके और अपने सिद्धांत पर अडिग रहते हुए भारत के आत्मसम्मान को बनाए रखने का काम किया। उन्होंने मुगलों से पीड़ित कश्मीरी पंडितों को यह भरोसा दिलाया था कि उनके बलिदान के बाद मुगल शासक औरंगजेब के सैनिकों का अत्याचार खत्म हो जाएगा। फिर उन्होंने कश्मीरी पंडितों के अधिकारों और विश्वास की रक्षा के लिए जो बलिदान किया, उसके सम्मान में गुरु तेग बहादुर को 'हिंद की चादर' के सम्मान से नवाजा गया। दिल्ली के लाल किले के पास गुरु तेग बहादुर ने औरंगजेब द्वारा कश्मीरी पंडितों पर जबरन धर्म परिवर्तन करवाने का विरोध किया था। जिसके बाद औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर पर इस्लाम स्वीकार करने का दबाव करने लगा। जिस पर गुरु तेग बहादुर ने इस्लाम स्वीकार करने से इंकार कर दिया। जिस पर मुगल शासक औरंगजेब ने उनका सिर काटने का आदेश दे दिया था। मृत्युमाना जाता है कि औरंगजेब की तमाम कठोर यातनाओं को गुरु तेग बहादुर सकते रहे, लेकिन उन्होंने झुकने से इंकार कर दिया। इस बात से बौखलाए औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर और उनके साथियों को कठोर मौत दी थी।

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Apr 3, 2026 - 12:24
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Guru Tegh Bahadur Birth Anniversary: 13 साल में उठाई तलवार, जानें 'हिंद की चादर' बनने का पूरा सफर
सिख धर्म में गुरु तेग बहादुर का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। आज ही के दिन यानी की 01 अप्रैल को गुरु तेग बहादुर का जन्म हुआ था। गुरु तेग बहादुर ने मुगलों के अत्याचार से पीड़ित हिंदू समाज को बचाने के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया था। गुरु तेग बहादुर को 'हिंद की चादर' भी कहा जाता था। उन्होंने अपना सिर कलम कराना मंजूर कर लिया, लेकिन इस्लाम स्वीकार नहीं किया था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर गुरु तेग बहादुर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

पंजाब के अमृतसर में 01 अप्रैल 1621 को गुरु तेग बहादुर का जन्म हुआ था। इनके बचपन का नाम त्यागमल था। उनके पिता का नाम गुरु हरगोबिंद साहिब और मां का नाम नानकी था। गुरु हरगोविंद सिंह सिखों के छठे गुरु थे। माना जाता है कि त्यागमल ने महज 13 साल की उम्र में मुगलों के खिलाफ लड़ने के लिए तलवार उठा ली थी। जिसके चलते उनके पिता ने इनका नाम बदलकर तेग बहादुर रख दिया था। लंबे समय तक गुरु तेग बहादुर ने बकाला में आध्यात्मिक साधना की और बाद में सिखों के 9वें गुरु बने।

इसे भी पढ़ें: Avantibai Lodhi Death Anniversary: चूड़ियां भेजकर British Rule को दी चुनौती, जानें वीरांगना महारानी अवंतीबाई की शौर्यगाथा

हिंद की चादर

बता दें कि गुरु तेग बहादुर 'हिंद की चादर' कहा जाता है। क्योंकि उन्होंने मुगलों के अत्याचार के आगे कभी घुटने नहीं टेके और अपने सिद्धांत पर अडिग रहते हुए भारत के आत्मसम्मान को बनाए रखने का काम किया। उन्होंने मुगलों से पीड़ित कश्मीरी पंडितों को यह भरोसा दिलाया था कि उनके बलिदान के बाद मुगल शासक औरंगजेब के सैनिकों का अत्याचार खत्म हो जाएगा। फिर उन्होंने कश्मीरी पंडितों के अधिकारों और विश्वास की रक्षा के लिए जो बलिदान किया, उसके सम्मान में गुरु तेग बहादुर को 'हिंद की चादर' के सम्मान से नवाजा गया। 

दिल्ली के लाल किले के पास गुरु तेग बहादुर ने औरंगजेब द्वारा कश्मीरी पंडितों पर जबरन धर्म परिवर्तन करवाने का विरोध किया था। जिसके बाद औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर पर इस्लाम स्वीकार करने का दबाव करने लगा। जिस पर गुरु तेग बहादुर ने इस्लाम स्वीकार करने से इंकार कर दिया। जिस पर मुगल शासक औरंगजेब ने उनका सिर काटने का आदेश दे दिया था। 

मृत्यु

माना जाता है कि औरंगजेब की तमाम कठोर यातनाओं को गुरु तेग बहादुर सकते रहे, लेकिन उन्होंने झुकने से इंकार कर दिया। इस बात से बौखलाए औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर और उनके साथियों को कठोर मौत दी थी।

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