Energy Sector में Game Changer बनेगा कोयला गैसीकरण, G. Kishan Reddy बोले- आयात से मिलेगी मुक्ति
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोयले से गैस बनाना देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और इससे आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। रेड्डी ने सतही कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं की प्रोत्साहन योजना पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि गैसीकरण परियोजनाओं में निवेश से देश में सिनगैस, मेथनॉल, हाइड्रोजन, एथेनॉल, यूरिया और विमानन ईंधन सहित कई उत्पादों का घरेलू उत्पादन संभव होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इन उत्पादों का बड़ी मात्रा में आयात किया जाता है, लेकिन कोयला गैसीकरण के जरिए इनका उत्पादन देश में बढ़ाया जा सकता है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी, आयात पर निर्भरता घटेगी और उर्वरक, इस्पात, रसायन, परिवहन एवं स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में नयी औद्योगिक मूल्य शृंखलाओं का विकास होगा। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, कोयला क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के नेता, प्रौद्योगिकी प्रदाता, निवेशक तथा अन्य हितधारक शामिल हुए।
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोयले से गैस बनाना देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और इससे आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। रेड्डी ने सतही कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं की प्रोत्साहन योजना पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि गैसीकरण परियोजनाओं में निवेश से देश में सिनगैस, मेथनॉल, हाइड्रोजन, एथेनॉल, यूरिया और विमानन ईंधन सहित कई उत्पादों का घरेलू उत्पादन संभव होगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में इन उत्पादों का बड़ी मात्रा में आयात किया जाता है, लेकिन कोयला गैसीकरण के जरिए इनका उत्पादन देश में बढ़ाया जा सकता है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी, आयात पर निर्भरता घटेगी और उर्वरक, इस्पात, रसायन, परिवहन एवं स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में नयी औद्योगिक मूल्य शृंखलाओं का विकास होगा।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, कोयला क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के नेता, प्रौद्योगिकी प्रदाता, निवेशक तथा अन्य हितधारक शामिल हुए।
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