Delimitation पर भड़कीं Sonia Gandhi, बोलीं- यह Constitution पर सीधा हमला, बेहद खतरनाक

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को कहा कि संसद के विशेष सत्र के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विधायी एजेंडा परिसीमन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है, जिसे उन्होंने अत्यंत खतरनाक और संविधान पर सीधा हमला बताया। द हिंदू में प्रकाशित एक लेख में गांधी ने कहा कि संसद के समक्ष मुख्य मुद्दा महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन प्रक्रिया के निहितार्थ हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकसभा की संख्या में कोई भी वृद्धि केवल गणितीय रूप से नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी न्यायसंगत होनी चाहिए। इसे भी पढ़ें: Bengal Elections 2026: मिथुन चक्रवर्ती का TMC पर हमला, बोले- हार के डर से मचाया जा रहा है बवालसोनिया गांधी ने लेख में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विपक्षी दलों से उन विधेयकों का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं जिन्हें सरकार उस समय संसद के विशेष सत्र में पारित करना चाहती है जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर होगा। इस असाधारण तरीके की जल्दबाजी का केवल एक ही कारण हो सकता है, वह है राजनीतिक लाभ प्राप्त करना और विपक्ष को रक्षात्मक मुद्रा में लाना। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री हमेशा की तरह सच्चाई से दूर हैं। उनका कहना है, संसद ने एक विशेष सत्र के दौरान सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को सर्वसम्मति से पारित किया था। अधिनियम के माध्यम से संविधान में अनुच्छेद 334-ए जोड़ा गया, जिसने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण अनिवार्य कर दिया। यह अगली जनगणना और जनगणना-आधारित परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने के बाद लागू होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष ने यह शर्त नहीं मानी थी। दरअसल, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने 2024 के लोकसभा चुनाव से ही आरक्षण प्रावधान लागू करने की पुरजोर मांग की थी। सरकार इससे सहमत नहीं हुई। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि अब इस रुख से ‘यू-टर्न’ लेने में प्रधानमंत्री को 30 महीने क्यों लग गए? उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि सरकार ने विपक्ष की ओर से की गई सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग को ठुकरा दिया। सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों के बीच संसद सत्र का आयोजन करना एक गुप्त रणनीति है जो निर्णय लेने के लिए प्रधानमंत्री के एकाधिकार और उनके माई वे या हाइवे वाले दृष्टिकोण को दर्शाती है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने इस बात को याद दिलाया कि 73वें और 74वें संविधान संशोधन विधेयक क्रमशः अप्रैल 1993 और जून 1993 में संसद द्वारा पारित किए गए तथा उन विधेयकों पर लगभग पांच साल तक चर्चा और विचार विमर्श हुआ था, जिसके बाद पंचायतों और नगर पालिकाओं के चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण कानून बना। उन्होंने कहा, यह दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एक अनोखी उपलब्धि थी। उन्होंने दावा किया कि पिछली दशकीय जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन मोदी सरकार इसे टालती रही, जिसका एक परिणाम यह हुआ है कि 10 करोड़ से अधिक लोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत अपने कानूनी अधिकारों से वंचित हो गए हैं। उनका कहना है कि इस सत्र को बुलाने और परिसीमन कराने की जल्दबाजी के लिए सरकार के बहाने स्पष्ट रूप से खोखले हैं। सोनिया गांधी ने कहा, दरअसल, प्रधानमंत्री का असली इरादा अब जाति जनगणना को और विलंबित करना और पटरी से उतारना है।  इसे भी पढ़ें: जाति जनगणना पर Jairam Ramesh का बड़ा हमला, बोले- Modi Government का है Hidden Agendaउन्होंने कहा, विशेष सत्र 16 अप्रैल को शुरू होने वाला है। फिर भी, अब तक, सांसदों के साथ कोई आधिकारिक प्रस्ताव साझा नहीं किया गया है कि सरकार वास्तव में सत्र पर क्या विचार कराना चाहती है। ऐसा लग रहा है कि परिसीमन का कोई फॉर्मूला सुझाया जा रहा है। किसी भी परिसीमन से पहले पूर्व की भांति जनगणना प्रक्रिया होनी चाहिए। और यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि लोकसभा की सीटों की संख्या में वृद्धि से संबंधित कोई भी परिसीमन राजनीतिक रूप से होना चाहिए, न कि केवल अंकगणितीय रूप से। जो राज्य परिवार नियोजन में अग्रणी रहे हैं, उन्हें और छोटे राज्यों को पूर्ण या सापेक्ष में नहीं रखा जाना चाहिए। कांग्रेस नेता के अनुसार, सीटों की संख्या में समानुपातिक वृद्धि, सापेक्ष प्रभाव के नुकसान का कारण बन सकती है क्योंकि अलग-अलग राज्यों में सीटों की संख्या के बीच अंतर बढ़ जाता है।

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Apr 14, 2026 - 09:34
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Delimitation पर भड़कीं Sonia Gandhi, बोलीं- यह Constitution पर सीधा हमला, बेहद खतरनाक
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को कहा कि संसद के विशेष सत्र के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विधायी एजेंडा परिसीमन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है, जिसे उन्होंने अत्यंत खतरनाक और संविधान पर सीधा हमला बताया। द हिंदू में प्रकाशित एक लेख में गांधी ने कहा कि संसद के समक्ष मुख्य मुद्दा महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन प्रक्रिया के निहितार्थ हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकसभा की संख्या में कोई भी वृद्धि केवल गणितीय रूप से नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी न्यायसंगत होनी चाहिए।
 

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सोनिया गांधी ने लेख में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विपक्षी दलों से उन विधेयकों का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं जिन्हें सरकार उस समय संसद के विशेष सत्र में पारित करना चाहती है जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर होगा। इस असाधारण तरीके की जल्दबाजी का केवल एक ही कारण हो सकता है, वह है राजनीतिक लाभ प्राप्त करना और विपक्ष को रक्षात्मक मुद्रा में लाना। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री हमेशा की तरह सच्चाई से दूर हैं। उनका कहना है, संसद ने एक विशेष सत्र के दौरान सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को सर्वसम्मति से पारित किया था। 

अधिनियम के माध्यम से संविधान में अनुच्छेद 334-ए जोड़ा गया, जिसने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण अनिवार्य कर दिया। यह अगली जनगणना और जनगणना-आधारित परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने के बाद लागू होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष ने यह शर्त नहीं मानी थी। दरअसल, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने 2024 के लोकसभा चुनाव से ही आरक्षण प्रावधान लागू करने की पुरजोर मांग की थी। सरकार इससे सहमत नहीं हुई। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि अब इस रुख से ‘यू-टर्न’ लेने में प्रधानमंत्री को 30 महीने क्यों लग गए? उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि सरकार ने विपक्ष की ओर से की गई सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग को ठुकरा दिया। 

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों के बीच संसद सत्र का आयोजन करना एक गुप्त रणनीति है जो निर्णय लेने के लिए प्रधानमंत्री के एकाधिकार और उनके माई वे या हाइवे वाले दृष्टिकोण को दर्शाती है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने इस बात को याद दिलाया कि 73वें और 74वें संविधान संशोधन विधेयक क्रमशः अप्रैल 1993 और जून 1993 में संसद द्वारा पारित किए गए तथा उन विधेयकों पर लगभग पांच साल तक चर्चा और विचार विमर्श हुआ था, जिसके बाद पंचायतों और नगर पालिकाओं के चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण कानून बना। उन्होंने कहा, यह दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एक अनोखी उपलब्धि थी। उन्होंने दावा किया कि पिछली दशकीय जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन मोदी सरकार इसे टालती रही, जिसका एक परिणाम यह हुआ है कि 10 करोड़ से अधिक लोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत अपने कानूनी अधिकारों से वंचित हो गए हैं। उनका कहना है कि इस सत्र को बुलाने और परिसीमन कराने की जल्दबाजी के लिए सरकार के बहाने स्पष्ट रूप से खोखले हैं। सोनिया गांधी ने कहा, दरअसल, प्रधानमंत्री का असली इरादा अब जाति जनगणना को और विलंबित करना और पटरी से उतारना है। 
 

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उन्होंने कहा, विशेष सत्र 16 अप्रैल को शुरू होने वाला है। फिर भी, अब तक, सांसदों के साथ कोई आधिकारिक प्रस्ताव साझा नहीं किया गया है कि सरकार वास्तव में सत्र पर क्या विचार कराना चाहती है। ऐसा लग रहा है कि परिसीमन का कोई फॉर्मूला सुझाया जा रहा है। किसी भी परिसीमन से पहले पूर्व की भांति जनगणना प्रक्रिया होनी चाहिए। और यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि लोकसभा की सीटों की संख्या में वृद्धि से संबंधित कोई भी परिसीमन राजनीतिक रूप से होना चाहिए, न कि केवल अंकगणितीय रूप से। जो राज्य परिवार नियोजन में अग्रणी रहे हैं, उन्हें और छोटे राज्यों को पूर्ण या सापेक्ष में नहीं रखा जाना चाहिए। कांग्रेस नेता के अनुसार, सीटों की संख्या में समानुपातिक वृद्धि, सापेक्ष प्रभाव के नुकसान का कारण बन सकती है क्योंकि अलग-अलग राज्यों में सीटों की संख्या के बीच अंतर बढ़ जाता है।

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