Chai Par Sameeksha: PM Modi पर Vote Chori के आरोप में दम है या Rahul Gandhi की राजनीति बेदम है?

प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोप और बिहार चुनाव पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने राहुल गांधी के वोट चोरी वाले आरोपी पर साफ तौर पर कहा कि यह ध्यान भटकने की राजनीति है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का जो हाइड्रोजन बम था वह पूरी तरीके से फ्यूज कर गया है। राहुल गांधी के आरोपों में दम नजर नहीं आ रहा है। नीरज दुबे ने इस बात पर भी सहमति जताई कि राहुल गांधी सिर्फ और सिर्फ मीडिया में बने रहने की राजनीति करते हैं। इसके अलावा वह खुद के लिए एक सर्वाइवल का तरीका भी ढूंढने लगे हैं क्योंकि लगातार उनके नेतृत्व में कांग्रेस और उसके गठबंधन के साथियों को हार का सामना करना पड़ रहा है। राहुल गांधी बेबुनियाद आरोप लगाते रह रहे हैं।प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि अब राहुल गांधी को इस बात की आशंका सताने लगी है कि कभी ना कभी कांग्रेस के नेता उनसे यह जरूर पूछेंगे कि आप हमें चुनाव कब जीता रहे हो। ऐसे में राहुल गांधी को जवाब देना मुश्किल होगा। यही कारण है कि उन्होंने लगातार अपनी अलग-अलग भूमिकाएं बनाने की कोशिश की है। 2014 से आपने देखा होगा कि राहुल गांधी अलग-अलग भूमिकाएं बनाने की कोशिश करते हैं। बावजूद इसके जनता में उसकी विश्वसनीयता कम होती दिखाई दे रही है। कांग्रेस को सफलताएं नहीं मिल रही है तो राहुल गांधी और उनकी पार्टी लगातार पहले ईडी और सीबीआई को निशाने पर लेते थे। लेकिन अब वे सीधे तौर पर चुनाव आयोग को ही निशाने पर ले रहे हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस को अदालत से भी फटकार लग चुकी है। लेकिन उनकी पार्टी अभी भी सुधरने का नाम नहीं ले रही है। राहुल गांधी को बार-बार अपने बेबुनियाद आरोपों की वजह से डांट भी खानी पड़ रही है। लेकिन सुधार नहीं दिख रहा है।इसे भी पढ़ें: नेता सत्ता के लिए कर सकते हैं हवाई वादाप्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने यह भी कहा कि राहुल गांधी बार-बार जैन जी की बात कर रहे हैं। लेकिन यह भारत है। भारत के युवा जानते हैं कि हमारा देश लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास करता है। शांति में विश्वास करता है और इसलिए राहुल गांधी का कोई मकसद यहां कामयाब होने वाला नहीं है। नीरज दुबे ने कहा कि वोट चोरी का आरोप राहुल गांधी अभी से ही इसलिए लग रहे हैं क्योंकि उनको पता है कि बिहार में चुनावी हार के बाद उनसे फिर से सवाल पूछा जाएगा और यही कारण है कि वह अभी से ही चुनाव आयोग और वोट चोरी का आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। एसआईआर को लेकर भी राहुल गांधी ने तमाम आरोप लगाए। लेकिन जब फाइनल मतदाता सूची आया तो कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से एक भी सवाल नहीं उठाया गया। इसका मतलब साफ है कि राहुल गांधी ने जो आरोप लगाए थे वह कहीं ना कहीं एजेंडा सेट करने के लिए थे ना कि उसमें कोई सत्यता थी। प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि अब बीजेपी की ओर से कभी भी पार का नारा नहीं दिया जाएगा बीजेपी की ओर से मिनिमम नंबर्स दिए जा रहे हैं। यह कहीं ना कहीं लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा के एजेंडे में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा समय के साथ अपनी रणनीति में बदलाव करती है। अमित शाह ने भाजपा के लिए बिहार में पूरी मेहनत की है। इसके अलावा नीतीश कुमार को लेकर जो अटकलें चलाई जा रही थी वह पूरी तरीके से ध्वस्त हो चुका है। नीतीश कुमार ने भी इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत लगा दी है। आप चुनाव से पहले देखिए किस तरीके से बिहार में एनडीए सरकार के खिलाफ नाराजगी दिखाई जा रही थी। लेकिन वह सब चीजे अब पूरी तरीके से समाप्त हो चुकी है। एनडीए एकजुट होकर एक नेतृत्व में चुनाव लड़ता हुआ दिखाई दे रहा है और इसी वजह से महागठबंधन के लोग परेशानी में है। 

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Nov 15, 2025 - 09:02
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Chai Par Sameeksha: PM Modi पर Vote Chori के आरोप में दम है या Rahul Gandhi की राजनीति बेदम है?
प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोप और बिहार चुनाव पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने राहुल गांधी के वोट चोरी वाले आरोपी पर साफ तौर पर कहा कि यह ध्यान भटकने की राजनीति है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का जो हाइड्रोजन बम था वह पूरी तरीके से फ्यूज कर गया है। राहुल गांधी के आरोपों में दम नजर नहीं आ रहा है। नीरज दुबे ने इस बात पर भी सहमति जताई कि राहुल गांधी सिर्फ और सिर्फ मीडिया में बने रहने की राजनीति करते हैं। इसके अलावा वह खुद के लिए एक सर्वाइवल का तरीका भी ढूंढने लगे हैं क्योंकि लगातार उनके नेतृत्व में कांग्रेस और उसके गठबंधन के साथियों को हार का सामना करना पड़ रहा है। राहुल गांधी बेबुनियाद आरोप लगाते रह रहे हैं।

प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि अब राहुल गांधी को इस बात की आशंका सताने लगी है कि कभी ना कभी कांग्रेस के नेता उनसे यह जरूर पूछेंगे कि आप हमें चुनाव कब जीता रहे हो। ऐसे में राहुल गांधी को जवाब देना मुश्किल होगा। यही कारण है कि उन्होंने लगातार अपनी अलग-अलग भूमिकाएं बनाने की कोशिश की है। 2014 से आपने देखा होगा कि राहुल गांधी अलग-अलग भूमिकाएं बनाने की कोशिश करते हैं। बावजूद इसके जनता में उसकी विश्वसनीयता कम होती दिखाई दे रही है। कांग्रेस को सफलताएं नहीं मिल रही है तो राहुल गांधी और उनकी पार्टी लगातार पहले ईडी और सीबीआई को निशाने पर लेते थे। लेकिन अब वे सीधे तौर पर चुनाव आयोग को ही निशाने पर ले रहे हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस को अदालत से भी फटकार लग चुकी है। लेकिन उनकी पार्टी अभी भी सुधरने का नाम नहीं ले रही है। राहुल गांधी को बार-बार अपने बेबुनियाद आरोपों की वजह से डांट भी खानी पड़ रही है। लेकिन सुधार नहीं दिख रहा है।

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प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने यह भी कहा कि राहुल गांधी बार-बार जैन जी की बात कर रहे हैं। लेकिन यह भारत है। भारत के युवा जानते हैं कि हमारा देश लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास करता है। शांति में विश्वास करता है और इसलिए राहुल गांधी का कोई मकसद यहां कामयाब होने वाला नहीं है। नीरज दुबे ने कहा कि वोट चोरी का आरोप राहुल गांधी अभी से ही इसलिए लग रहे हैं क्योंकि उनको पता है कि बिहार में चुनावी हार के बाद उनसे फिर से सवाल पूछा जाएगा और यही कारण है कि वह अभी से ही चुनाव आयोग और वोट चोरी का आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। एसआईआर को लेकर भी राहुल गांधी ने तमाम आरोप लगाए। लेकिन जब फाइनल मतदाता सूची आया तो कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से एक भी सवाल नहीं उठाया गया। इसका मतलब साफ है कि राहुल गांधी ने जो आरोप लगाए थे वह कहीं ना कहीं एजेंडा सेट करने के लिए थे ना कि उसमें कोई सत्यता थी। 

प्रभासाक्षी के संपादक नीरज दुबे ने कहा कि अब बीजेपी की ओर से कभी भी पार का नारा नहीं दिया जाएगा बीजेपी की ओर से मिनिमम नंबर्स दिए जा रहे हैं। यह कहीं ना कहीं लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा के एजेंडे में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा समय के साथ अपनी रणनीति में बदलाव करती है। अमित शाह ने भाजपा के लिए बिहार में पूरी मेहनत की है। इसके अलावा नीतीश कुमार को लेकर जो अटकलें चलाई जा रही थी वह पूरी तरीके से ध्वस्त हो चुका है। नीतीश कुमार ने भी इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत लगा दी है। आप चुनाव से पहले देखिए किस तरीके से बिहार में एनडीए सरकार के खिलाफ नाराजगी दिखाई जा रही थी। लेकिन वह सब चीजे अब पूरी तरीके से समाप्त हो चुकी है। एनडीए एकजुट होकर एक नेतृत्व में चुनाव लड़ता हुआ दिखाई दे रहा है और इसी वजह से महागठबंधन के लोग परेशानी में है। 

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