Carlo Lombardi ने FCRA Bill का किया समर्थन, बोले- Foreign Policy का जरिया भी हो सकते हैं NGOs

भारत-इटली संबंधों के सीनियर एनालिस्ट और सलाहकार कार्लो लोम्बार्डी ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) अमेंडमेंट बिल में प्रस्तावित बदलावों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को मिलने वाली विदेशी फंडिंग की जांच-पड़ताल करना देश के हित में है, क्योंकि इन फंड्स का इस्तेमाल विदेश नीति के औजार के तौर पर भी किया जा सकता है। बिल के इतिहास का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह कानून सबसे पहले 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया था। लोम्बार्डी ने कहा, 2010 में मनमोहन सिंह की सरकार ने इसमें बड़े बदलाव किए थे, और असल में उस समय यह कानून और भी ज़्यादा सख्त था।इसे भी पढ़ें: FCRA Bill पर हल्ला मचा रहे विपक्षी दलों और ईसाई संगठनों को मार्को रुबियो का बयान सुनना चाहिएएएनआई के साथ बातचीत में उन्होंने NGOs की मानवीय भूमिका को माना और कहा, "मेरी मुख्य बात यह है कि NGOs बहुत अच्छे होते हैं। वे मानवता के लिए बहुत अच्छा काम करते हैं, लेकिन वे विदेश नीति का एक ज़रिया भी हैं। यह कोई छिपी हुई बात नहीं है। उन्होंने 1983 में US नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी (NED) के गठन का ज़िक्र किया और इसके सह-संस्थापक एलन वेनस्टीन के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि यह संगठन दिखाता है कि कैसे गैर-सरकारी संस्थाएं विदेश नीति के बड़े लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में शामिल हो सकती हैं। लोम्बार्डी ने ANI से कहा NGO भी विदेश नीति का एक ज़रिया हैं और यह बिल्कुल सही है कि सरकार को पता हो कि कौन किसे और किस वजह से फ़ंडिंग कर रहा है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है कि विदेशी NGO से आने वाले पैसे का इस्तेमाल असल में उन्हीं मक़सदों के लिए हो जिनके बारे में बताया गया है, न कि उसका गलत इस्तेमाल हो।इसे भी पढ़ें: FCRA संशोधन बिल नियंत्रण के लिए, पारदर्शिता के लिए नहीं: Shashi Tharoor का आरोपFCRA जैसे कानून वाले दूसरे देशों के बारे में बात करते हुए लोम्बार्डी ने कहा कि पश्चिमी देशों में ऐसे कानून कई दशकों से मौजूद हैं। इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई, जिसने 1938 में 'फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट' पास किया था। ऐसा जर्मनी के उस गुप्त प्रभाव का मुक़ाबला करने के लिए किया गया था, जिसके ज़रिए जर्मनी अमेरिका की नीति को 'नेशनल सोशलिस्ट जर्मनी' की तरफ़ मोड़ने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और UK जैसे देश भी हैं।

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Aug 12, 2026 - 17:50
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Carlo Lombardi ने FCRA Bill का किया समर्थन, बोले- Foreign Policy का जरिया भी हो सकते हैं NGOs
भारत-इटली संबंधों के सीनियर एनालिस्ट और सलाहकार कार्लो लोम्बार्डी ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) अमेंडमेंट बिल में प्रस्तावित बदलावों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को मिलने वाली विदेशी फंडिंग की जांच-पड़ताल करना देश के हित में है, क्योंकि इन फंड्स का इस्तेमाल विदेश नीति के औजार के तौर पर भी किया जा सकता है। बिल के इतिहास का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह कानून सबसे पहले 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया था। लोम्बार्डी ने कहा, 2010 में मनमोहन सिंह की सरकार ने इसमें बड़े बदलाव किए थे, और असल में उस समय यह कानून और भी ज़्यादा सख्त था।

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एएनआई के साथ बातचीत में उन्होंने NGOs की मानवीय भूमिका को माना और कहा, "मेरी मुख्य बात यह है कि NGOs बहुत अच्छे होते हैं। वे मानवता के लिए बहुत अच्छा काम करते हैं, लेकिन वे विदेश नीति का एक ज़रिया भी हैं। यह कोई छिपी हुई बात नहीं है। उन्होंने 1983 में US नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी (NED) के गठन का ज़िक्र किया और इसके सह-संस्थापक एलन वेनस्टीन के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि यह संगठन दिखाता है कि कैसे गैर-सरकारी संस्थाएं विदेश नीति के बड़े लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में शामिल हो सकती हैं। लोम्बार्डी ने ANI से कहा NGO भी विदेश नीति का एक ज़रिया हैं और यह बिल्कुल सही है कि सरकार को पता हो कि कौन किसे और किस वजह से फ़ंडिंग कर रहा है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है कि विदेशी NGO से आने वाले पैसे का इस्तेमाल असल में उन्हीं मक़सदों के लिए हो जिनके बारे में बताया गया है, न कि उसका गलत इस्तेमाल हो।

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FCRA जैसे कानून वाले दूसरे देशों के बारे में बात करते हुए लोम्बार्डी ने कहा कि पश्चिमी देशों में ऐसे कानून कई दशकों से मौजूद हैं। इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई, जिसने 1938 में 'फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट' पास किया था। ऐसा जर्मनी के उस गुप्त प्रभाव का मुक़ाबला करने के लिए किया गया था, जिसके ज़रिए जर्मनी अमेरिका की नीति को 'नेशनल सोशलिस्ट जर्मनी' की तरफ़ मोड़ने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और UK जैसे देश भी हैं।

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