काल भैरव के नाम से पहचाने जाने वाले भैरव बाबा भगवान शिव का अद्वितीय और शक्तिशाली रूप हैं। भगवान भैरव नाथ न्याय, शक्ति और भयमुक्ति के देवता हैं। भैरव बाबा को समय और मृत्यु का भी स्वामी माना जाता है। माना जाता है कि भगवान शिव की तांडव शक्ति से भैरव बाबा का जन्म हुआ था। दिल्ली के चाणक्यपुरी में भी भैरव नाथ का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है।
धार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना स्वयं भीम ने की थी। इस कारण यहां पर पूजा के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि भैरव नाथ मंदिर की स्थापना कैसे हुए और इस मंदिर के दर्शन कैसे करें।
भैरव मंदिर की स्थापना
वाराणसी के बटुक भैरव से जुड़े दिल्ली के इस मंदिर की स्थापना भीम ने की थी। स्कंद पुराण की कथा के मुताबिक महाभारत के युद्ध के दौरान काशी से भैरव बाबा को लेकर भीम हस्तिनापुर चले गए थे। भीम ने बाबा को यह वचन दिया था कि वह उनको रास्ते में अपने कंधे से नहीं उतारेंगे। लेकिन दिल्ली आते-आते भीम को बहुत प्यास लगी तो उन्होंने बाबा को अपने कंधे से उतार दिया। भीम ने अपनी प्यास तो बुझा ली, लेकिन बाबा को दिया हुआ वचन टूट गया।
ऐसे में जब बाबा को भीम ने दोबारा उठाने की कोशिश की, तो वह ऐसा नहीं कर सके। तब भैरव बाबा ने अपनी शक्ति का परिचय देते हुए कुंए की मुंडेर पर विराजमान होने का निश्चय किया। भीम के प्रार्थना करने के बाद भी बाबा भैरव ने अपनी स्थिति को नहीं बदला और तब से भैरव नाथ स्थायी रूप से यहीं विराजमान हो गए।
मंदिर की मान्यता
बाबा भैरव नाथ शक्ति, न्याय और भयमुक्ति के देवता माने जाते हैं। उनका स्वरूप भक्तों के लिए रौद्र और दयालु दोनों हैं। माना जाता है कि भैरव नाथ की पूजा करने से व्यक्ति को संकटों से मुक्ति मिलती है। साथ ही सुख-शांति का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।