Bangladesh Tight Security | शेख हसीना के खिलाफ न्यायाधिकरण के फैसले से पहले बांग्लादेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई

बांग्लादेश रविवार को देर रात हुए विस्फोटों और बढ़ती अशांति से दहल उठा, क्योंकि अधिकारी अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) के फैसले से पहले बढ़ते तनाव को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। पिछले साल छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह पर सैन्य कार्रवाई के मामले में दोषी पाए जाने पर उन्हें मौत की सजा हो सकती है।न्यायाधिकरण पिछले साल के घातक जुलाई विद्रोह से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों पर अपना फैसला सुनाने वाला है। अभियोजकों ने हसीना के लिए मौत की सजा की मांग की है, जो अभी भारत में हैं। उन पर और उनके सह-आरोपी, पूर्व गृह मंत्री, असदुज्जमां खान कमाल पर उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया।इसे भी पढ़ें: हाथ में गुब्बारे लेकर दिल्ली की CM रेखा गुप्ता बड़ा ऐलान, मचा देगा राजनीतिक हड़कंप सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गईराष्ट्रीय राजधानी में पुलिस को हिंसक प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया है। इस बीच, हसीना ने कहा कि अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि वे घबराएं नहीं।हसीना के लिए मौत की सजा की मांग दोहराई  अभियोजन पक्ष ने रविवार को हसीना के लिए मौत की सजा की मांग दोहराई। बांग्लादेश का अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) सोमवार को 78 वर्षीय हसीना के खिलाफ फैसला सुनाएगा। इस मामले की सुनवाई उनके गैर हाजिर रहने के दौरान हुई। आईसीटी-बीडी के अभियोजक गाजी एमएच तमीम ने संवाददाताओं को से कहा, ‘‘हमने हसीना के लिए यथासंभव अधिकतम सजा की मांग की है। इसके अतिरिक्त, हमने दोषी की संपत्ति जब्त करने और उसे (पिछले साल के प्रदर्शन के दौरान) शहीदों और घायलों के परिवारों में वितरित करने का अनुरोध किया है।’’इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina को सुनाई जाएगी सजा-ए-मौत! 'देखते ही गोली मारने' के आदेश से बांग्लादेश में तनाव | Bangladesh Insurgency तमीम ने कहा कि आईसीटी-बीडी कानून हसीना को उच्चतम न्यायालय के शीर्ष अपीलीय प्रभाग में फैसले को चुनौती देने से तब तक रोकेग, जब तक कि वह आत्मसमर्पण नहीं कर देतीं या फैसले के बाद 30 दिन के भीतर गिरफ्तार नहीं कर ली जातीं। सरकारी समाचार एजेंसी ‘बांग्लादेश संगबाद संस्था’ (बीएसएस) की खबर के मुताबिक, गृह सलाहकार जहांगीर आलम चौधरी ने कहा, ‘‘देश भर में अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अपनी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।’’ फैसले से पहले कानून और व्यवस्था की स्थिति को लेकर तनाव पैदा होने के बीच बीजीबी की तैनाती के अलावा, ढाका में पुलिस को हिंसक प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया है। स्थानीय अखबारों की खबर के अनुसार, ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) आयुक्त एसएम सज्जात अली ने कहा, ‘‘मैंने वायरलेस पर संदेश दिया कि जो कोई भी बसों में आग लगाए या जान से मारने के इरादे से देसी बम फेंके, उसे गोली मार दी जानी चाहिए। हमारे कानून में यह अधिकार स्पष्ट रूप से दिया गया है।’’ हसीना, उनके गृह मंत्री असद-उज-जमां खान कमाल और तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून पर पिछले वर्ष सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराध करने का आरोप है। इनमें हत्या, हत्या की कोशिश, प्रताड़ित करना और अन्य अमानवीय कृत्य शामिल हैं। न्यायाधिकरण ने 10 जुलाई को तीनों के खिलाफ आरोप तय किए थे। हसीना और कमाल पर उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया तथा अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया, जबकि मामून ने व्यक्तिगत रूप से मुकदमे का सामना किया, लेकिन वह सरकारी गवाह बन गया। इस बीच, हसीना ने अपनी पार्टी अवामी लीग की वेबसाइट पर अपलोड किए गए एक ऑडियो संदेश में पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से सजा के बारे में चिंता न करने को कहा। उन्होंने कहा कि ‘‘हमने इस तरह के हमलों और मामलों को बहुत देखा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘...मुझे परवाह नहीं है, अल्लाह ने मुझे जीवन दिया है और एक दिन मेरी मौत आएगी, लेकिन मैं देश के लोगों के लिए काम कर रही हूं और ऐसा करना जारी रखूंगी।’’ अपदस्थ प्रधानमंत्री ने सामूहिक हत्याओं के आरोपों से इनकार किया और अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर जिम्मेदारी डालते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं कहा था कि उन्होंने एक ‘‘सुनियोजित योजना’’ के तहत ‘‘मेरी सरकार’’ को अपदस्थ किया था। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संविधान के अनुच्छेद 7 (बी) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगर कोई निर्वाचित प्रतिनिधियों को बलपूर्वक सत्ता से हटाता है, तो उसे दंडित किया जाएगा। यूनुस ने यही (मुझे बलपूर्वक सत्ता से हटाया) किया।’’ हसीना ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप लगाने वाले अभियोजक ‘‘पूरी तरह से झूठे’’ हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई अदालत में झूठी शिकायत करता है, तो उस पर कानून के तहत मुकदमा चलता है और एक दिन ऐसा होगा ही।

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Nov 17, 2025 - 10:02
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Bangladesh Tight Security | शेख हसीना के खिलाफ न्यायाधिकरण के फैसले से पहले बांग्लादेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई

बांग्लादेश रविवार को देर रात हुए विस्फोटों और बढ़ती अशांति से दहल उठा, क्योंकि अधिकारी अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) के फैसले से पहले बढ़ते तनाव को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। पिछले साल छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह पर सैन्य कार्रवाई के मामले में दोषी पाए जाने पर उन्हें मौत की सजा हो सकती है।

न्यायाधिकरण पिछले साल के घातक जुलाई विद्रोह से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों पर अपना फैसला सुनाने वाला है। अभियोजकों ने हसीना के लिए मौत की सजा की मांग की है, जो अभी भारत में हैं। उन पर और उनके सह-आरोपी, पूर्व गृह मंत्री, असदुज्जमां खान कमाल पर उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया।

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सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई

राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस को हिंसक प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया है। इस बीच, हसीना ने कहा कि अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि वे घबराएं नहीं।

हसीना के लिए मौत की सजा की मांग दोहराई 

अभियोजन पक्ष ने रविवार को हसीना के लिए मौत की सजा की मांग दोहराई। बांग्लादेश का अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) सोमवार को 78 वर्षीय हसीना के खिलाफ फैसला सुनाएगा। इस मामले की सुनवाई उनके गैर हाजिर रहने के दौरान हुई। आईसीटी-बीडी के अभियोजक गाजी एमएच तमीम ने संवाददाताओं को से कहा, ‘‘हमने हसीना के लिए यथासंभव अधिकतम सजा की मांग की है। इसके अतिरिक्त, हमने दोषी की संपत्ति जब्त करने और उसे (पिछले साल के प्रदर्शन के दौरान) शहीदों और घायलों के परिवारों में वितरित करने का अनुरोध किया है।’’

इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina को सुनाई जाएगी सजा-ए-मौत! 'देखते ही गोली मारने' के आदेश से बांग्लादेश में तनाव | Bangladesh Insurgency

तमीम ने कहा कि आईसीटी-बीडी कानून हसीना को उच्चतम न्यायालय के शीर्ष अपीलीय प्रभाग में फैसले को चुनौती देने से तब तक रोकेग, जब तक कि वह आत्मसमर्पण नहीं कर देतीं या फैसले के बाद 30 दिन के भीतर गिरफ्तार नहीं कर ली जातीं। सरकारी समाचार एजेंसी ‘बांग्लादेश संगबाद संस्था’ (बीएसएस) की खबर के मुताबिक, गृह सलाहकार जहांगीर आलम चौधरी ने कहा, ‘‘देश भर में अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अपनी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।’’

फैसले से पहले कानून और व्यवस्था की स्थिति को लेकर तनाव पैदा होने के बीच बीजीबी की तैनाती के अलावा, ढाका में पुलिस को हिंसक प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया है। स्थानीय अखबारों की खबर के अनुसार, ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) आयुक्त एसएम सज्जात अली ने कहा, ‘‘मैंने वायरलेस पर संदेश दिया कि जो कोई भी बसों में आग लगाए या जान से मारने के इरादे से देसी बम फेंके, उसे गोली मार दी जानी चाहिए। हमारे कानून में यह अधिकार स्पष्ट रूप से दिया गया है।’’

हसीना, उनके गृह मंत्री असद-उज-जमां खान कमाल और तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून पर पिछले वर्ष सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराध करने का आरोप है। इनमें हत्या, हत्या की कोशिश, प्रताड़ित करना और अन्य अमानवीय कृत्य शामिल हैं। न्यायाधिकरण ने 10 जुलाई को तीनों के खिलाफ आरोप तय किए थे।

हसीना और कमाल पर उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया तथा अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया, जबकि मामून ने व्यक्तिगत रूप से मुकदमे का सामना किया, लेकिन वह सरकारी गवाह बन गया। इस बीच, हसीना ने अपनी पार्टी अवामी लीग की वेबसाइट पर अपलोड किए गए एक ऑडियो संदेश में पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से सजा के बारे में चिंता न करने को कहा।

उन्होंने कहा कि ‘‘हमने इस तरह के हमलों और मामलों को बहुत देखा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘...मुझे परवाह नहीं है, अल्लाह ने मुझे जीवन दिया है और एक दिन मेरी मौत आएगी, लेकिन मैं देश के लोगों के लिए काम कर रही हूं और ऐसा करना जारी रखूंगी।’’ अपदस्थ प्रधानमंत्री ने सामूहिक हत्याओं के आरोपों से इनकार किया और अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर जिम्मेदारी डालते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं कहा था कि उन्होंने एक ‘‘सुनियोजित योजना’’ के तहत ‘‘मेरी सरकार’’ को अपदस्थ किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संविधान के अनुच्छेद 7 (बी) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगर कोई निर्वाचित प्रतिनिधियों को बलपूर्वक सत्ता से हटाता है, तो उसे दंडित किया जाएगा। यूनुस ने यही (मुझे बलपूर्वक सत्ता से हटाया) किया।’’ हसीना ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप लगाने वाले अभियोजक ‘‘पूरी तरह से झूठे’’ हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई अदालत में झूठी शिकायत करता है, तो उस पर कानून के तहत मुकदमा चलता है और एक दिन ऐसा होगा ही।

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