Baldev Raj Chopra Death Anniversary: हिंदी सिनेमा के वो जादूगर, जिनके बिना 'महाभारत' अधूरी, ऐसा रहा बीआर चोपड़ा का सफर

बलदेव राज चोपड़ा सिनेमा की एक ऐसी शख्सियत, जिन्होंने दुनिया को कई लोकप्रिय फिल्मों की सौगात दी। इसके साथ ही उन्होंने छोटे पर्दे की दुनिया में 'महाभारत' जैसा धारावाहिक बना डाला। आज ही के दिन यानी की 05 नवंबर को बी आर चोपड़ा का निधन हो गया था। बता दें कि बीआर चोपड़ा ने अपने छह दशक के लंबे करियर में कई कामयाब फिल्में की और 'महाभारत' जैसा धारावाहिक बनाया। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर बीआ चोपड़ा के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और शिक्षातत्कालीन पंजाब के लुधियाना में 22 अप्रैल 1914 को बी आर चोपड़ा का जन्म हुआ था। उन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा पूरी करने के बाद लाहौर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इसके बाद साल 1944 में बी आर चोपड़ा मासिक पत्रिका सिने हेराल्ड से जुड़ गए।इसे भी पढ़ें: Shakuntala Devi Birth Anniversary: गणित की पहेली को सेकेंड्स में हल कर देती थीं शकुंतला देवी, कहा जाता था ह्यूमन कंप्यूटरफिल्मी सफरबी आर चोपड़ा ने अपने फिल्मी सफर की शुरूआत फिल्म 'अफसाना' से की। इसके बाद साल 1955 में उन्होंने अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस बीआर फिल्म्स शुरू किया। इस प्रोडक्शन तले कई हिट और सफल फिल्में बनीं। बी आर चोपड़ा ने 'कानून', 'साधना', 'पति पत्नी और वो', 'गुमराह', 'एक ही रास्ता', 'निकाह', 'हमराज', 'कर्म' और 'बाबुल' जैसी कई सुपरहिट फिल्में दी। लेकिन बाद में धीरे-धीरे यह प्रोडक्शन हाउस बर्बादी की कगार पर आ गया।मेकिंग से शुरू हुए उल्टे दिनप्रोडक्शन हॉउस बीआर फिल्म्स के बैनर तले कई फिल्में सफल हुईं। लेकिन फिल्म 'बिंदा ये बिंदास है' की मेकिंग के दौरान इस प्रोडक्शन हाउस के उल्टे दिन शुरू हो गए थे। इस फिल्म के निर्माण के दौरान उन पर साहित्यिक चोरी का आरोप लगा। दरअसल, ऐसा इसलिए क्योंकि जिस समय बी आर चोपड़ा की फिल्में सिनेमा की दुनिया में सफलता की नई इबारत लिख रही थीं, लेकिन फिल्मों की सफलता कहीं न कहीं बी आर चोपड़ा में घमंड ला रही थीं।बताया जाता है कि फिल्म 'नया दौर' के समय वह पूरी टीम के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट साइन करना चाहते थे। जिसके तहत वह सभी अन्य किसी प्रोडक्शन हाउस के साथ काम नहीं कर सकते थे। लेकिन बी आर चोपड़ा की यह बात मोहम्मद रफी को समझ नहीं आई और उन्होंने कहा कि वह जनता की आवाज हैं। इसलिए वह हर निर्माता-निर्देशक के साथ काम करेंगे। यह बात कहीं न कहीं बी आर चोपड़ा को अखर गई।महाभारत धारावाहिकसाल 1988 बीआर चोपड़ा का प्रसारित हुआ शो 'महाभारत' से घर-घर में खास पहचान मिली थी। इस दौरान महाभारत की लागत में 9 करोड़ रुपए आई थी। बीआर चोपड़ा की आखिरी फिल्म 'भूतनाथ' थी।मृत्युवहीं मुंबई में 05 नवंबर 2008 को बीआर चोपड़ा ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था।

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Nov 7, 2025 - 22:17
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Baldev Raj Chopra Death Anniversary: हिंदी सिनेमा के वो जादूगर, जिनके बिना 'महाभारत' अधूरी, ऐसा रहा बीआर चोपड़ा का सफर
बलदेव राज चोपड़ा सिनेमा की एक ऐसी शख्सियत, जिन्होंने दुनिया को कई लोकप्रिय फिल्मों की सौगात दी। इसके साथ ही उन्होंने छोटे पर्दे की दुनिया में 'महाभारत' जैसा धारावाहिक बना डाला। आज ही के दिन यानी की 05 नवंबर को बी आर चोपड़ा का निधन हो गया था। बता दें कि बीआर चोपड़ा ने अपने छह दशक के लंबे करियर में कई कामयाब फिल्में की और 'महाभारत' जैसा धारावाहिक बनाया। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर बीआ चोपड़ा के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और शिक्षा

तत्कालीन पंजाब के लुधियाना में 22 अप्रैल 1914 को बी आर चोपड़ा का जन्म हुआ था। उन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा पूरी करने के बाद लाहौर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इसके बाद साल 1944 में बी आर चोपड़ा मासिक पत्रिका सिने हेराल्ड से जुड़ गए।

इसे भी पढ़ें: Shakuntala Devi Birth Anniversary: गणित की पहेली को सेकेंड्स में हल कर देती थीं शकुंतला देवी, कहा जाता था ह्यूमन कंप्यूटर

फिल्मी सफर

बी आर चोपड़ा ने अपने फिल्मी सफर की शुरूआत फिल्म 'अफसाना' से की। इसके बाद साल 1955 में उन्होंने अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस बीआर फिल्म्स शुरू किया। इस प्रोडक्शन तले कई हिट और सफल फिल्में बनीं। बी आर चोपड़ा ने 'कानून', 'साधना', 'पति पत्नी और वो', 'गुमराह', 'एक ही रास्ता', 'निकाह', 'हमराज', 'कर्म' और 'बाबुल' जैसी कई सुपरहिट फिल्में दी। लेकिन बाद में धीरे-धीरे यह प्रोडक्शन हाउस बर्बादी की कगार पर आ गया।

मेकिंग से शुरू हुए उल्टे दिन

प्रोडक्शन हॉउस बीआर फिल्म्स के बैनर तले कई फिल्में सफल हुईं। लेकिन फिल्म 'बिंदा ये बिंदास है' की मेकिंग के दौरान इस प्रोडक्शन हाउस के उल्टे दिन शुरू हो गए थे। इस फिल्म के निर्माण के दौरान उन पर साहित्यिक चोरी का आरोप लगा। दरअसल, ऐसा इसलिए क्योंकि जिस समय बी आर चोपड़ा की फिल्में सिनेमा की दुनिया में सफलता की नई इबारत लिख रही थीं, लेकिन फिल्मों की सफलता कहीं न कहीं बी आर चोपड़ा में घमंड ला रही थीं।

बताया जाता है कि फिल्म 'नया दौर' के समय वह पूरी टीम के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट साइन करना चाहते थे। जिसके तहत वह सभी अन्य किसी प्रोडक्शन हाउस के साथ काम नहीं कर सकते थे। लेकिन बी आर चोपड़ा की यह बात मोहम्मद रफी को समझ नहीं आई और उन्होंने कहा कि वह जनता की आवाज हैं। इसलिए वह हर निर्माता-निर्देशक के साथ काम करेंगे। यह बात कहीं न कहीं बी आर चोपड़ा को अखर गई।

महाभारत धारावाहिक

साल 1988 बीआर चोपड़ा का प्रसारित हुआ शो 'महाभारत' से घर-घर में खास पहचान मिली थी। इस दौरान महाभारत की लागत में 9 करोड़ रुपए आई थी। बीआर चोपड़ा की आखिरी फिल्म 'भूतनाथ' थी।

मृत्यु

वहीं मुंबई में 05 नवंबर 2008 को बीआर चोपड़ा ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था।

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